‘काले सोने’ की ‘धार’ का आखिर अगुवा कौन!

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करीब एक वर्ष पूर्व संसद में उत्तराखंड में खनन को लेकर दिए गए पूर्व सीएम त्रिवेंद्र का बयान अब हो रहा सही साबित
राजधानी ही नहीं, पूरे प्रदेश में खनन माफिया की ‘बेखौफ’ कारस्तानी का कोई नहीं सानी
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। प्रदेश में ‘काले सोने’ के धंधे को उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और हरिद्वार के वर्तमान भाजपा सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत द्वारा 28 मार्च 2025 को लोकसभा में ऐसे ही नहीं उठाया गया था, बल्कि इसके कई मायने भी थे, क्योंकि वैसे भी किसी भी माफिया, चाहे वह जिस भी क्षेत्र का हो बिना ‘सत्ता’ की धमक और अफसरशाही की सरपरस्ती के सिर नहीं उठा सकता। ये बात दीगर है कि उस समय रावत का लोकसभा में दिया गया बयान प्रदेश की सत्ता में भूचाल लेकर आया था और एक ओर लोगों ने जहां उनकी इस बात को बेबाक बयानी बताया था, वहीं संगठन के स्तर पर काफी किरकिरी हुई थी। उत्तराखंड में अफसरशाही की सरपरस्ती में नदी-नालों का सीना चीरकर किए जा रहे अवैध खनन और खनन माफिया की बेखौफ करतूतों के चलते राजस्व के नुकसान को पूर्व सीएम ने यूं ही इंगित नहीं किया था, बल्कि आज उनकी सभी बातें सही लग रही हैं। प्रदेश में खनन माफिया इतने निरंकुश और हावी हो चुके हैं कि अफसरशाही इनके आगे ऐसा लगता है कि नतमस्तक हो रखी है? वैसे इसको इस तरह भी कहा जा सकता है कि खनन माफिया ने अफसरशाही को भी अपनी ‘जेब’ में रख रखा है, जिसकी वजह से इन अधिकारियों की नाक और खुली आंखों के नीचे यह धंधा लगातार अपनी ‘धार’ को मजबूत ही करता जा रहा है।
अब जनता के मन में एक सवाल और भी कौंध रहा है कि आखिरकार इस धंधे की ‘धार’ का खेवनहार कौन है। कहीं ऐसा तो नहीं, सत्तापक्ष के ही कुछ ‘शातिर’ और ’धमक’ रखने वाले इसको शह दे रहे हो या यूं कहें कि कमान पर्दे के पीछे से कोई खुद चला रहा हो और कोई खुलासा होने पर ‘ठीकरा’ माफिया के सिर पर फोड़ दें? वैसे जनता की आवाज को कथित रूप से अपना सुर देने वाले इस मामले में जिस तरह से खामोशी को ओढ़े हुए हैं, वह भी कहीं न कहीं इनकी दिलचस्पी और मिलीभगत की ओर ‘इशारा’ कर रही है?
लोगों का तो यहां तक इस वक्त आरोप है कि बिना इनकी सरपरस्ती के खनन माफिया की कोई विसात नहीं कि उनके डंपर खुलेआम राजधानी की सड़कों में ही नहीं, बल्कि प्रदेश के कुछ जिलांे में चल रहे हो? अब ये तो नहीं कहा जा सकता कि इस मामले में कौन-कौन से किरदार अपनी भूमिका को पर्दे के पीछे से चला रहे हैं, लेकिन यह तो अब खुलासा हो ही चुका है कि खनन माफिया की खुलेआम ‘दादागीरी’ ऐसे तो नहीं चल सकती, जिस प्रकार से इस वक्त चल रही है? अभी दो दिन पूर्व राजधानी के पछवादून के विकासनगर तहसील क्षेत्र के ढकरानी गांव और ढालीपुर क्षेत्र में नदियों से किए जा रहे अवैध खनन की मीडिया और सोशल मीडिया में जब खबरें वायरल हुई तो स्थानीय प्रशासन को आखिरकार कड़ा रुख अपनाना पड़ा और जिला खनन अधिकारी ऐश्वर्या शाह के नेतृत्व में खनन विभाग की टीम ने ताबड़तोड़ छापेमारी कर आठ ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को सीज कर दिया और भारी अनियमितताएं मिलने पर तीन खनन पट्टों को भी तत्काल प्रभाव से सीज कर दिया।
इस बाबत सूत्रों का कहना है कि ढकरानी में बीते कुछ दिनों से यमुना नदी का सीना छलनी कर और प्रतिबंधित मशीनों का इस्तेमाल कर कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे। इन खबरों में पट्टा कहीं और होने और खनन कहीं और करने के आरोप लगाए गए थे। इसके बाद खनन विभाग ने टीम गठित कर ढालीपुर और ढकरानी में ताबड़तोड़ छापे मारे। इस छापेमारी के दौरान ढकरानी में तीन और ढालीपुर में पांच ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को अवैध खनन की निकासी करते मौके पर ही पकड़ लिया गया। इस दौरान यमुना किनारे संचालित खनन माफिया के तीन खनन पट्टों में भी भारी उल्लंघन मिला। इसके बाद खनन विभाग ने तीनों पट्टों को सीज कर दिया। अब विभाग की कार्रवाई से यह संकेत जरूर मिला कि यहां पर लंबे समय से नियम विरुद्ध खनन की गतिविधियां खनन माफिया द्वारा संचालित की जा रहीं थीं। इसके अलावा इतनी गड़बड़ियां ऐसे कैसे इतने लंबे समय से जारी रहीं और विभाग क्यों खामोश रहा, यह भी अपने आप में एक चौंकाने वाली बात है?

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खनन माफियाओं के चंगुल मंे है चंद इलाके

राजधानी में कई और क्षेत्र भी खनन माफिया के चंगुल में
अगर अकेले राजधानी देहरादून की बात की जाए तो केवल विकासनगर क्षेत्र हीं नहीं, बल्कि कई अन्य क्षेत्र भी ‘काले सोने’ की खान खनन माफिया के लिए बने हुए हैं। इनमें सबसे बड़ा नाम रायपुर क्षेत्र का इस वक्त उभरकर आ रहा है। यहां पर नदियों का सीना बड़ी ही बेबाकी से छलनी किया जा रहा है। यहां तो आलम ये है कि दिन में भी खनन से भरे डंपरों की आवक सड़कों पर बेखौफ जारी रहती है। इसी का नतीजा है कि अभी कुछ दिन पूर्व एक किशोर को इन्हीं डंपरों की वजह से जान भी गंवानी पड़ी थी। बच्चे की गलती बस इतनी थी कि वह शाम को संकरी सड़क पर घर से निकलकर टहलने निकला था और इसी बीच एक खनन से भरे डंपर ने उसको अपनी चपेट में ले लिया और उसको कुचल दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी। ये बात दीगर है कि पुलिस ने बच्चे को कुचलने के बाद डंपर समेत भागे चालक को रात में ही दबोच लिया था, लेकिन इस क्षेत्र में अवैध खनन गतिविधियों की इस घटना के बाद से शासन प्रशासन की और भी पोल खुल गई है।

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नदियों का सीना चीर रहे खनन माफिया

रिस्पना और बिंदाल नदियों का भी सीना हो रहा छलनी
राजधानी के अंदर भी इन दोनों नदियों से अवैध खनन खुलेआम किया जा रहा है। चाहे डोईवाला क्षेत्र हो या अन्य क्षेत्र नदियों का सीना बुरी तरह से ये खनन माफिया छलनी करने से बाज नहीं आ रहे हैं। डोईवाला क्षेत्र में तो दिन के साथ रात के अंधेरे में भी खनन माफिया अपनी कारगुजारियां करने से बाज नहीं आ रहे हैं। इसके अलावा मालदेवता क्षेत्र में भी दिन-रात अवैध खनन का कार्य जारी है, जबकि ये वह क्षेत्र है, जहां पर बड़े अफसरों और सत्ता में बैठे लोगों का यहां पर आना-जाना लगा रहता है।

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पूर्व सीएम ने संसद में ये बात कही थी

पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने संसद में अवैध खनन का मुद्दा उठाते हुए सरकार और अधिकारियों की कार्य प्रणाली पर कई सवाल भी खड़े किए थे। आरोप लगाया था उत्तराखंड में खनन माफिया की पकड़ मजबूत हो चुकी है। उन्होंने राज्य में खनन माफिया के बढ़ते प्रभाव, पर्यावरण को हो रहे नुकसान और राजस्व के कथित दुरुपयोग को लेकर केंद्र सरकार का ध्यान खींचते हुए आरोप लगाया था कि उत्तराखंड में खनन माफिया की पकड़ मजबूत हो चुकी है, जिससे सरकारी खजाने को बड़ा नुकसान हो रहा है। इसके साथ ही प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन किया जा रहा है। संसद में चर्चा के दौरान कहा था कि प्रदेश में खनन की आड़ में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हो रही हैं। आरोप लगाया था कि कई खनन क्षेत्रों में तय सीमा से अधिक खनन किया जा रहा, जिससे नदियों और पर्यावरण को भारी नुकसान हो रहा है। पूर्व सीएम ने मांग की थी कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

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