सांसद बलूनी ने आवाम को दिलाया संकल्प पलायन से लड़ेंगे युद्ध

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भूतिया गांव को बसाने में बलूनी आये आगे
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड मंे एक दशक से पहाड़ों से हो रहे पलायन को लेकर एक बडा भूचाल मचता आ रहा है। पहाड़ के सैकडों गांव पलायन के कारण खाली होते चले गये और इस पलायन को रोकने के लिए सरकार ने भले ही पलायन आयोग का गठन किया हो लेकिन धरातल पर आयोग पहाड़ों से हो रहे पलायन को रोकने में कामयाब होता हुआ नहीं दिख रहा है जिसके चलते हमेशा यह बहस चलती आ रही है कि आखिरकार पलायन से खाली हो चुके गांव के गांव कब आबाद होंगे जहां हर तरफ चहल-पहल होगी और बडे बुजुर्गों को अपनों का खुलकर साथ और प्यार मिलेगा। पलायन आयोग भले ही पलायन रोकने में अभी तक फिस्ड्डी साबित हो रहा हो लेकिन पौडी से सांसद ने इन दिनों होली मिलन समारोह में आवाम को संकल्प दिलाने का मिशन शुरू कर रखा है कि सब पलायन से युद्ध लडेंगे जिससे कि भूतिया गांव को फिर बसाया जा सके।
गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी ने कहा है कि आज जिस तरह से गांवों से पलायन हो रहा है। उन्होंने कहा कि पूरे गांव के गांव खाली हो रहे है। वह दर्दनाक है। उन्होंने कहा कि गांव के गांव खाली हो रहे है। उन्होंने कहा कि पिछले दिनों में वह पौडी में थे और एक ऐसे गांव में गए जहां पर एक भी व्यक्ति नहीं था और आज उन गांवों के लोगों को देहरादून, श्रीनगर, दिल्ली एवं अन्य स्थानों से बुलाया है। उन्होंने कहा कि एक दिन गांव में रहे और कोई त्योहार मनाओ और गांव को निर्जन न होने दो। यह गांव जहां हमारे पूर्वज रहे है। उन्होंने कहा कि गांव को विरान न होने दे। बडोनी ने कहा है कि गांवों को घोस्त विलेज यानि भूतिया गांव न बनने दे। उन्होंने कहा कि कम से कम अपने गांव को ऐसा नहीं छोड़ना है। उन्होंने कहा कि यहां पर माताएं बहने बैठी है और हमारे साथी बैठे है। उन्होंने कहा कि युवा साथी भी बहुत बड़ी संख्या में यहां पर है।
उन्होंने कहा कि जब उत्तराखंड राज्य बना था तब चमोली में हमारी चार विधानसभाएं थी और जब परिसीमन हुआ तो तीन रह गई है और उन्होंने कहा कि आने वाले समय में फिर परिसीमन होगा अगर तीन में से दो विधानसभा रह गई तो सोचिए क्या होगा। बलूनी ने कहा है कि इसी तरह से पौडी में आठ विधानसभाए थी और छह विधानसभाएं रह गई। उन्होंने कहा कि परिसीमन के बाद आने वाले समय में चार रह जाएगी। उन्होंने कहा कि न नेता कोई आएगा उसके बाद न ही अधिकारी कोई इस तरफ आएगा। उन्होंने कहा कि सब कुछ उजड़ रहा है। उन्होंने कहा कि उन्होंने का कि पलायन के साथ हम सबकों मिलकर युद्ध लड़ना है और सभी लोग संकल्प ले लें कि जितने अपने नातेदार है, रिश्तेदार है और अपना वोट गांव में बनाएं। अभी जनगणना होने वाली है अपने सभी रिश्तेदारों से कह दो अपनी गिनती अपने गांव में कराएं। उन्होंने कहा कि अपने गांव को कमजोर न बनने दे।
बलूनी ने कहा है कि इसी तरह से हमारे गांव खाली होते रहे और विधानसभाएं कम होती रही तो पहाड़ एक दम उजाड़ हो जाएगा और हम सब लोग जो पहाड़ के बच्चे है। उन्होंने कहा है कि वह बच्चे कैसे गर्त में रह जाएंगें और कल भी पौड़ी जिले के एक हमारा गांव है जो कि सुनसान व निर्जन है। उन्होंने कहा कि इसलिए संकल्प लिया है कि कल उस गांव में जाकर होली मनाऊंगा और उस गांव के तमाम लोगों को बुलाऊंगा और आप सब लोग इस पर चिंता करें। उन्होंने कहा कि अपना वोट अपने गांव में बनाईए, अपने भाई बंधुओं से कहे कि अपना वोट अपने गांव में बनाएं। बलूनी ने कहा है कि इस पहाड़ को बचाने के लिए संकल्प बहुत जरूरी है।
उत्तराखण्ड बनने के बाद से ही देखने मे आ रहा है कि गढ़वाल के कई पहाड़ी जनपदों में पलायन के चलते गांव के गांव या तो खाली हो चुके हैं या फिर उसमें मात्र कुछ बडे बुजुर्ग ही रह रहे हैं जिनके लाडले दूसरे राज्यों में जाकर नौकरियां कर रहे हैं। पहाड़ों में पलायन से गांव खाली होने के कारण वहां का दर्द महसूस करने के लिए सरकारों ने कभी अपने आपको आगे नहीं रखा जिसके चलते उन युवाओं के सपने हमेशा चूरचूर होते चले गये जो दूसरे राज्यों में नौकरी करने के लिए गये और पहाड़ों में अपने बुजुर्गों को भगवान भरोसे छोड़ आये। उत्तराखण्ड के पहाड़ी जनपदों में तेजी के साथ हुये पलायन ने आम जनमानस के मन में एक बडी पीडा भर रखी है कि जो पहाड के गांव हमेशा अपनों से गुलजार होते थे वह गांव अब अपनों के दूसरे राज्यों में नौकरी करने के कारण खाली हो गये हैं। उन्हें सरकार कब हराभरा करने के लिए कोई ऐसा पैमाना बनायेगी जिससे दूसरे राज्यों में नौकरी करने गये युवा अपने गांव में लौट सकें।
उत्तराखण्ड में तेजी के साथ हुये पलायन को रोकने के लिए कुछ वर्ष पूर्व पलायन आयोग का गठन किया गया था। इस आयोग का गठन करने के पीछे सरकार की मंशा थी कि पहाडों से खाली हो चुके गांव को कैसे दुबारा आबाद किया जाये जिससे कि वहां के गांव फिर उसी तरह से हरे भरे हो सकें जैसे राज्य बनने से पहले हुआ करते थे। पलायन आयोग का गठन तो हुआ लेकिन वह पहाडों से हुये पलायन को रोकने के लिए कोई ऐसा पैमाना सेट नहीं कर पाये जिससे कि पहाडों में रिर्वस पलायन हो सके। सरकारों ने हमेशा रिर्वस पलायन का संदेश देशभर में रह रहे उत्तराखण्डवासियों को दिया लेकिन धरातल पर उसका कोई असर देखने को नहीं मिला जिसके चलते पलायन से आज भी पहाड़ के सैकडों गांव सुनसान पडे हुये हैं। अब पौडी से भाजपा सांसद अनिल बलूनी ने अपने संसदीय क्षेत्रों में पलायन रोकने के लिए एक बडा संकल्प आम जनमानस को दिलाया है और उनका दो टूक कहना है कि हम सबको पलायन के साथ एक युद्ध लडना है जिससे कि पलायन से खाली हो चुके गांव को फिर बसाया जा सके।

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