चेताया, अब जरा सी भी गुस्ताखी की तो जेल की सीखचों में गुजरेंगे दिन-रात
देहरादून। एक बार फिर से राजधानी पुलिस अब अपने ‘इकबाल’ को पाने में कामयाब होती दिख रही है। या यूं कहें कि अपराधियों और शातिर बदमाशों के बुलंद हौंसलों को खत्म करने की तरफ अपने कदम दून पुलिस ने उत्तराखंड एसटीएफ के साथ बढ़ा दिए हैं। इसी का नतीजा है कि उत्तराखंड की जेल में बंद पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुख्यात हिस्ट्रीशीटर सुनील राठी गैंग के दो शातिर शूटरों को राजधानी पुलिस ने एसटीएफ की मदद से दबोच कर अपने इरादे भी जाहिर कर दिए हैं कि अब बस, बहुत हुआ…, अब बदमाशों की खैर नहीं और न ही पनाह देने को बख्शा जाएगा। हां! इसको संयोग कहें या ये कहें कि दून के नए कप्तान प्रमेंद्र डोबाल के आने के बाद यह सब मुमकिन होने लगा है, लेकिन ऐसा भी नहीं है कि पूर्व कप्तान का शहर में दबदबा नहीं था और उन्होंने पुलिसिंग के लिए कुछ नहीं किया। उन्होंने भी कई दफा बड़े-बड़े अपराधियों को अपनी अगुवाई में इसी टीम के साथ दबोचा और कइयों को मुठभेड़ के दौरान श्लंगड़ाश् भी किया। इसके बाद अचानक बदमाश सकते में आए और अपराधों में लगाम भी लगी, लेकिन हत्याओं जैसी जघन्य वारदातों के बाद चारों ओर से पुलिस के ‘इकबाल’ को बदमाशों की चुनौती करार दिया जाने लगा और इसका पूरा ठीकरा तत्कालीन पुलिस कप्तान अजय सिंह के सिर फोड़ दिया गया। इस मामले में कहीं न कहीें अधीनस्थों की भी जिम्मेदारी बनती है कि वे भी तो सड़कों पर उतरकर कप्तान के कंधा से कंधा मिलाकर चलें, लेकिन इस मामले में उस वक्त ऐसा कुछ भी देखने को नहीं मिला और राजधानी में पिछले दिनों दो दिन के अंतराल में एक गैस एजेंसी के मालिक और फिर कुख्यात हिस्ट्रीशीटर विक्रम शर्मा की पॉश इलाके में गोलियों से भून दिया गया था। इसके बाद ही पूर्व कप्तान अजय सिंह के सिर पर इसका ठीकरा फूटा तो… उनको अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी।
जिले की कप्तानी की कुर्सी तो उन्होंने जरूर गंवाई, लेकिन एसटीएफ जैसी एजेंसी का मुखिया बनकर पहले दिन से काम शुरू करते हुए बदमाशों और ड्रग्स माफिया पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया। हां, अब ऐसा लगता है कि इस मामले में एसटीएफ और राजधानी पुलिस ने साथ-साथ कदमताल करना शुरू कर दिया है। एसटीएफ मुखिया और राजधानी के मुखिया ने देखा जाए तो एक प्रकार से ठान लिया है कि अब कुख्यातों और शातिरों की खैर नहीं है। किसी को भी राजधानी में पैर जमाने नहीं दिया जाएगा और सख्त से सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। इसी का नतीजा है कि राजधानी देहरादून के पुलिस कप्तान प्रमेंद्र डोबाल और एसटीएफ के कप्तान अजय सिंह की पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए दो दिन पूर्व कुख्यात गैंगस्टर और जेल में सुनील राठी के दो सक्रिय सदस्यों को एक स्कॉर्पियो वाहन, दो अवैध पिस्टल और सात कारतूस के साथ गिरफ्तार कर लिया गया।कुख्यात सुनील राठी के जिन दो गुर्गों यूपी के सहारनपुर निवासी भानू चौधरी और मुजफ्फरनगर निवासी पारस को एसटीएफ और दून पुलिस ने दबोचने में सफलता पाई वो कोई ऐसे-वैसे बदमाश नहीं हैं, बल्कि ठीक-ठाक शूटर हैं, जो यूपी के कुख्यात और अब मर चुके मुख्तार अंसारी और संजीव जीवा गैंग के बेहतरीन शूटरों में सुमार रखते थे, लेकिन मुख्तार और संजीव की मौत के बाद सुनील राठी गैंग में शामिल हो गए और इसी के लिए काम करने लगे।
इंसेट—
पारस था संजीव जीवा और मुख्तार अंसारी गैंग का शूटर
उत्तराखंड सूत्रों के मुताबिक, एसटीएफ और राजधानी पुलिस की गिरफ्त में आए सुनील राठी गैंग का शूटर इसके पूर्व उत्तर प्रदेश के माफिया डॉन और अब मर चुके मुख्तार अंसारी गैंग का तेजतर्रार शूटर था। इसके अलावा कुख्यात और चर्चित गैंगस्टर माफिया संजीव उर्फ जीवा गैंग का भी शूटर था, लेकिन दोनों की मौत के बाद पारस पश्चिमी यूपी के कुख्यात बदमाश सुनील राठी गैंग में शामिल हो गया। इसके बाद से पारस और भानू चौधरी सुनील राठी के इशारे पर राजधानी देहरादून और हरिद्वार जिले की विवादित भूमियों पर कब्जा कराने और उगाही का काम करने लगे थे। राजधानी पुलिस के सूत्रों का कहना है कि मोबाइल चौट और कॉल डिटेल से यह बात साबित हो गई है कि शूटर पारस जेल में बंद सुनील राठी से नियमित संपर्क में था। इसके अलावा गिरफ्तार शूटर भानू चौधरी भी कुख्यात सुनील राठी से मिलने जेल जाता था। पुलिस का दावा है कि दोनों शूटर राजधानी में में किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की तैयारी में थे।
इंसेट—
राठी का नाम लेकर व्यापारियों को थे धमकाते
उत्तराखंड एसटीएफ और स्थानीय पुलिस सूत्रों का कहना है कि कई व्यापारियों को सुनील राठी का नाम लेकर दोनों शूटर धमकाते थे।इसके अलावा पुलिस पूछताछ में हरिद्वार के एक विवादित प्रॉपर्टी डीलर का नाम भी सामने आया है, जो जेल में बंद कुख्यात सुनील राठी से लगातार संपर्क में था। पुलिस का कहना है कि पारस के खिलाफ मुजफ्फरनगर, शामली और राजधानी देहरादून में 2012 से 2020 तक हत्या, मारपीट, लूट, धमकी, गैंगस्टर एक्ट और आर्म्स एक्ट के आठ गंभीर मुकदमे दर्ज हैं, जो इसके खौफनाक इरादों को बताने के लिए काफी हैं। पुलिस अब दोनों शूटरों के अन्य सहयोगियों के साथ इनको पनाह देने वालों की भी जांच करते हुए इन लोगों के गिरेबान तक पहुंचने की कोशिश में जुट गई है।
इंसेट
अजय और प्रमेंद्र मचाएंगे धमाल
उत्तराखंड एसटीएफ के पुलिस कप्तान अजय सिंह और राजधानी के पुलिस कप्तान प्रमेंद्र डोबाल आने वाले दिनों में बदमाशों और माफिया के लिए किसी कॉल से कम साबित नहीं होने वाले, क्योंकि इन दोनों की कुछ दिनों की ही केमिस्ट्री ने सब कुछ बयां कर दिया है अगर देखा जाए तो दोनों ही पीपीएस से आईपीएस बने हैं और अपने को पूरी तरीके से साबित कर रहे हैं कि हम किसी से काम नहीं, साथ ही जो काम हम पहले करते थे वहीं अब करेंगे, मसलन बदमाशों के लिए कॉल बनेंगे और उत्तराखंड की राजधानी के बाशिंदों को सुख और चौन से सोने देंगे। वैसे देखा जाए तो दोनों का अपना-अपना काम करने का तरीका रहा है और इसी तरीके की वजह से जहां अजय सिंह राजधानी जैसी जगह की पुलिस कप्तानी बखूबी निभा चुके हैं, वहीं अब प्रमेंद्र डोबाल भी अपने को साबित करने में जुट गए हैं।
