हुजूर सलाहकारों से रहो सावधान!

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चंद एक्स सीएम की कुर्सी खा गये चापलूस सलाहकार
आखिर कौन ‘सरकार’ को कर रहा गुमराह?
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के अन्दर कुछ एक्स सीएम ने अपने चापलूस सलाहकारों पर अभेद भरोसा किया था और उसका खामियाजा उन्हें अपनी कुर्सी गवाकर भुगतना पडा था। उत्तराखण्ड के अन्दर हमेशा यह बहस चलती आ रही है जब-जब सरकारों के मुखिया ने अपने कुछ सलाहकारों पर अभेद भरोसा किया तो उन्हें इस बात का इल्म ही नहीं हुआ कि कब वो सलाहकार उनकी कुर्सी पर ग्रहण लगाने के लिए आगे आ गये? उत्तराखण्ड के हुजूर शानदार अंदाज में सरकार चला रहे हैं लेकिन फिर भी राज्य के अन्दर यह बहस चल रही है कि कुछ सलाहकार ऐसे जरूर नजर आ रहे हैं जो हुजूर को कहीं न कहीं कुछ मामलों में अब तक गुमराह करने के खेल में आगे बढे हैं जिससे ‘सरकार’ को आवाम के बीच उसका खामियाजा भुगतना पडा है? ऐसे में अब हुजूर को चाहिए कि वह अपने कुछ उन सलाहकारों से सावधान हो जायें जो उन्हें इस बात का सच बताने के लिए आगे नहीं आ रहे कि कौन सा फैसला सरकार के लिए सही है और कौन सा फैसला सरकार की किरकिरी करा सकता है?
उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी ने अपना अब तक का कार्यकाल शानदार अंदाज में आवाम के सामने रखा है और यही कारण है कि वह राज्य के अन्दर आवाम की पसंद भी बने। हालांकि कुछ अर्से से राज्य के अन्दर कुछ सलाहकार अपने आपको सरकार के अन्दर पॉवरफुल समझने का भ्रम पाल चुके हैं और इस भ्रम के चलते वह ‘सरकार’ से उनके काफी करीबियों को दूर रखने के एजेंडे पर चलाकी के साथ खेल खेल रहे हैं जिसका शायद ‘सरकार’ को भी कोई इल्म नहीं है और यह ‘सरकार’ के लिए शुभ संकेत भी नहीं माना जा रहा? उत्तराखण्ड का इतिहास गवाह है कि जब भी किसी सरकार के मुखिया ने अपने विश्वासपात्र सलाहकारों पर अभेद भरोसा किया तो उन्हें इस का खामियाजा भी भुगतना पडा था यह भी किसी से छिपा नहीं है? सलाहकारों का काम ‘सरकार’ के मुखिया को सही जानकारी देना होता है लेकिन देखने मे आता है कि अधिकांश सलाहकार इस बात पर विश्वास रखते हैं कि अगर उन्होंने अपने हुजूर को राज्य में हो रही हकीकत से रूबरू कराया तो यह उनके लिए घातक हो सकता है इसलिए वह सरकार के मुखिया को सिर्फ और सिर्फ चापलूसी वाली कथा सुनाने मे भी विश्वास रखते हैं और इसका खामियाजा अकसर सरकार के मुखियाओं को उठाना पडा है?
मुख्यमंत्री राज्य के अन्दर सबको साथ लेकर चलने में कुछ वर्षों तक आगे बढे लेकिन पिछले कुछ अर्से से उनके कुछ सलाहकार और चंद अफसर ऐसे हैं जिन्होंने कुछ मीडियाकर्मियों और कुछ लोगों को जोकि मुख्यमंत्री के विकास को जन-जन तक पहुंचाने के लिए आगे बढ़ते रहे हैं उन्हें अपने निशाने पर लेने का कुचक्र रचा हुआ है और वह कहीं न कहीं उन्हें मुख्यमंत्री के करीब देखने में विश्वास नहीं रखते और वह उन्हें सरकार के हुजूर से दूर करने के एजेंडे पर आखिर किसके इशारे से ऐसा कर रहे हैं यह तो एक पहेली ही है लेकिन सरकार के मुखिया को ऐसे चापलूस सलाहकारों से भी सावधान रहना होगा जो उन्हें सही और गलत का अंतर बताने के लिए कभी आगे आने को तैयार ही नहीं होते? उत्तराखण्ड में अधिकांश सरकारों ने अपने सलाहकारों के कामों की कभी समीक्षा की हो ऐसा देखने को नहीं मिला और मौजूदा दौर में सरकार के कौन सलाहकार कितने मीडियाकर्मियों से सीधा संवाद करके ‘सरकार’ के हुजूर द्वारा किये जा रहे विकास को लेकर महामंथन करते हों इसकी समीक्षा आखिर कौन कर रहा है यह भी एक बडा सवाल राज्य के अन्दर लम्बे समय से तैर रहा है? उत्तराखण्ड में यह बात उठ रही है कि कुछ सलाहकार जो कि अपनी कुर्सी बचाये रखने के लिए सिर्फ अपना हित साधते हैं उनकी कुंडली भी सरकार के मुखिया को जरूर खंगालनी चाहिए कि वह सरकार के लिए काम कर रहे हैं या फिर वह अपने हित के एजंेडे को सफल बनाने के लिए अपने ही मुखिया को सच से रूबरू कराने के लिए आगे नहीं आ रहे?

पिटकुल एमडी पर किसने करवाई सरकार की फजीहत?
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी धाकड़ अंदाज में ‘सरकार’ चलाकर दिल्ली भाजपा हाईकमान की राजनीतिक पाठशाला में अव्वल रहे। वहीं पिछले कुछ समय से शायद कुछ सलाहकार और अफसर ऐसे हैं जो सरकार को सही दिशा में जाते हुए नहीं देख पा रहे हैं? हैरानी वाली बात है कि जब एक परीक्षा में नकल कराने का डंका बजा तो सैकडों बेरोजगार छात्रों ने आंदोलन शुरू किया और मामले की जांच सीबीआई से कराने का दम भरा और इस मामले में सरकार के मुखिया को कुछ सलाहकारों और अफसरों ने सही दिशा नहीं दिखाई और उसके चलते सरकार को असहज होना पडा लेकिन बाद में मुख्यमंत्री ने खुद छात्रों के बीच जाकर सीबीआई जांच के आदेश दिये थे। वहीं अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी को लेकर सीबीआई से जांच कराने की मांग उठी तो उसके बाद उनकी इस मांग पर लम्बे समय तक सीबीआई जांच के आदेश न हो पायें इसके लिए कुछ सलाहकार और चंद अफसरों का खेल चलता रहा? हालांकि बाद में मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी ने आगे आकर इस मामले में सीबीआई जांच की संस्तुति कर सबके अरमानों पर पानी फेर दिया था। वहीं पिटकुल के एमडी पीसी ध्यानी को हटाने के लिए हाईकोर्ट ने आदेश किया लेकिन कुछ सलाहकार और चंद अफसरों ने सरकार के मुखिया को कहीं न कहीं भ्रमित कर कैबिनेट बैठक में जो फैसला करवाया उससे सरकार की फजीहत हुई और इसके कौन गुनाहगार हैं यह अब सरकार को तय करना है?

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