उत्तराखण्ड की अस्थाई राजधानी में एक लम्बे दशक से अधिकांश प्राइवेट अस्पतालों में मरीजों और उनके परिजनों से हो रही खुलेआम लूट का शोर तेजी के साथ मचता आ रहा है लेकिन यह शोर सरकार के कानों में कभी क्यों सुनाई नहीं पड़ता यह हैरान करने जैसा ही नजर आता है? राजधानी में सारी सरकार और शासन के तमाम अफसर विराजमान हैं ऐसे में अगर राजधानी के अधिकांश प्राइवेट अस्पताल बेलगाम होकर आम जनमानस की जेब पर प्रहार करने से बाज नहीं आ रहे हैं तो यह सरकार का सीधेतौर पर फेलियर ही माना जायेगा क्योंकि आवाम को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ देना सरकार का दायित्व है और अगर प्राइवेट अस्पतालों में एक आम मरीज के साथ खुलेआम लूट खसोट का तांडव चल रहा है तो यह उत्तराखण्ड के आम जनमानस के लिए एक घातक संदेश है? राजधानी के कुछ प्राइवेट अस्पतालों पर बार-बार दाग लग रहे हैं कि वह मृत मरीजों को वैल्टिनेटर पर रखकर उनके परिजनों को यह झूठ परोसते रहते हैं कि उनके मरीज का इलाज चल रहा है लेकिन हाल ही में एक बडे प्राइवेट अस्पताल में जब एक मरीज के परिजनों ने वहां खुलकर तांडव किया कि उनका मरीज मर चुका था लेकिन अस्पताल प्रशासन कुछ दिन से यही दावे कर रहा था कि मरीज अभी जिंदा है। मृत मरीज को जिंदा बताकर उसके इलाज का पैसा उनके परिजनों से लूटने वाले अस्पताल के खिलाफ परिवार के लोगों ने रोते-बिलखते हुए खूब बददुआ दी लेकिन अस्पताल प्रशासन पर शायद इसका कोई असर नहीं दिखा? हैरानी वाली बात है कि सरकार के सामने भी जरूर इस प्राइवेट अस्पताल का यह कारनामा जरूर गूंजा होगा लेकिन सरकार की खामोशी ने कई सवालों को जन्म दे दिया है कि आखिरकार प्राइवेट अस्पतालों की लूट पर वह कब तक घृतराष्ट्र बनी रहेगी और आम जनमानस को ऐसे प्राइवेट अस्पतालों की लूट का खुलेआम शिकार होना पडेगा? उत्तराखण्ड के सरकारी अस्पतालों को प्राइवेट अस्पताल की तर्ज पर चलाने का दावा आम जनमानस को तो रास नहीं आ रहा है लेकिन जब वह अपने मरीज को कुछ बडे प्राइवेट अस्पतालों में इलाज के लिए ले जा रहे हैं तो वहां उनके साथ अस्पताल के डाक्टर जिस तरह से धोखा कर रहे हैं वह अब डाक्टर पेशे पर भी दाग लगा रहा है? उत्तराखण्ड की राजधानी में अगर प्राइवेट अस्पतालों की मनमानी का खेल बंद करने में सरकार आगे नहीं आ रही तो उससे साफ समझा जा सकता है कि वह राज्य को गुलजार करने के लिए जो दावे करती आ रही है वह धरातल पर कहीं न कहीं हवा-हवाई से ज्यादा कुछ नहीं है?
शासन पहुंची अस्पतालों की लूट की दास्तां
जन संघर्ष मोर्चा अध्यक्ष ने मरीजों से हो रही उगाही पर दिखाई नाराजगी
मुख्य सचिव को रघुनाथ ने बताई अस्पतालों की लूट
देहरादून(संवाददाता)। राजधानी के अधिकांश नामी प्राइवेट अस्पतालों में मरीजों से की जा रही खुली लूट-खसोट को लेकर अब जन संघर्ष मोर्चा ने भी विरोध का झंडा उठा लिया है और उन्होंने शासन में दस्तक देकर मुख्य सचिव से रूबरू होते हुए बताया कि किस तरह से राजधानी के अधिकांश प्राइवेट अस्पतालों में मरीजों से लूट की जा रही है और इस बात से भी रूबरू कराया कि मृत मरीजों से इलाज के नाम पर लाखों के बिल बनाने का जो तांडव किया जा रहा है उसने आम जनमानस को एक संकट में डाल दिया है इसलिए शासन ऐसे अस्पतालों पर नकेल लगाने के लिए चिकित्सकों एवं पुलिस अधिकारियों की देखरेख में विजिलेंस सेल का गठन करें और वह उन अस्पतालों पर एक्शन लें जहां मृत मरीजों को जिंदा बताकर उनके परिजनों से लाखों रूपये के बिल वसूलने का खुला धंधा कर रहे हैं।
जन संघर्ष मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएनवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने मुख्य सचिव आनंद बर्धन से मुलाकात कर अधिकांश नामी प्राइवेट अस्पतालों द्वारा मरीजों से की जा रही लूट-खसोट, इलाज में लापरवाही व मृत मरीजों से इलाज के नाम पर लाखों के बिल बनाने एवं अन्य लूट पर अंकुश लगाने को चिकित्सकों एवं पुलिस अधिकारियों की देखरेख में विजिलेंस सेल गठित करने की मांग रखी एवं नये अस्पताल खोलने के मानकों में भी आमूल चूल परिवर्तन किए जाने को लेकर मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा,जिस पर मुख्य सचिव ने गंभीरता दिखाते हुए कार्यवाही का भरोसा दिलाया।
नेगी ने कहा कि पुलिस अधिकारियों व चिकित्सकों का संयुक्त विजिलेंस सेल गठन होने से न सिर्फ आईसीयू/वेंटीलेटर में भर्ती व मृत मरीजों व अन्य आपात स्थिति में मरीजों की पड़ताल हो सकेगी बल्कि मरीजों की वास्तविक स्थिति का आकलन भी हो सकेगा। इससे न सिर्फ मरीजों को राहत मिलेगी बल्कि आयुष्मान, गोल्डन कार्ड इत्यादि के नाम पर हो रही लूट पर भी अंकुश लगेगा और नगद इलाज करने वाले मरीजों को भी राहत मिलेगी। इसके साथ-साथ जिस तरह से सरकारी अस्पताल सिर्फ और सिर्फ रेफरल सेंटर बनकर रह गए हैं, उस हेतु अस्पताल खोलने के मानकों में आमूल चूल परिवर्तन एवं अस्पतालों को अत्यधिक चाक-चौबंद करने की जरूरत है। मोर्चा मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करने एवं प्राइवेट अस्पतालों द्वारा मरीजों से की जा रही लूट को बंद कराकर ही दम लेगा। प्रतिनिधि मंडल में भीम सिंह बिष्ट व अंकुर वर्मा मौजूद थे।
