कुख्यात की बेनामी सम्पत्तियों का कौन करेगा पर्दाफाश?

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राजनेता, सफेदपोश और किन अफसरों ने विक्रम के साथ बनाया था सिंडिकेट!
डॉन की कुंडली खंगालने से बच रही सरकार?
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। झारखंड में अपराध की दुनिया में अपने नाम का डंका बजाने वाले कुख्यात डॉन ने वहां से भागकर उत्तराखण्ड की राजधानी में एक लम्बे दशक तक अपना आशियाना बनाया और इस आशियाने की भनक कैसे पुलिस महकमे को नहीं लगी यह किसी के गले नहीं उतर रहा? कुख्यात ने उत्तराखण्ड के अन्दर पिस्टल का लाइसेंस लिया और उसके साथ ही उसने उधमसिंहनगर में स्टोन क्रशर का लाइसेंस कैसे और किसकी कृपा से लिया था यह राज्य के अन्दर भले ही एक बहस का विषय बना हो लेकिन सरकार उस कुख्यात डॉन की कुंडली खंगालने से बच रही है जो उत्तराखण्ड के अन्दर कुछ राजनेता, सफेदपोश और कुछ अफसरों के साथ गुप्त सिंडिकेट बनाकर अपने धंधे को एक नई ऊचाई पर ले जा रहा था? इस सिंडिकेट के पास कितनी बेनामी सम्पत्तियां और धंधे थे इसका राज तभी बेनकाब हो सकता है जब सरकार इस मामले में एक बडी जांच बिठाकर उसका पर्दाफाश कुछ समय के भीतर ही कर दिखाये जिससे आवाम के मन में यह विश्वास हो जाये कि चाहे कोई कितना बडा भी सिंडिकेट अपने धंधे के लिए बना ले वह सरकार की रडार से नहीं बच पायेगा?
सरकार के मुखिया ने उत्तराखण्ड के अन्दर सघन तरीके से सत्यापन अभियान चलाने के आदेश दिये थे और इस सत्यापन के दौरान काफी कालनेमी पकडे गये तो सरकार ने अपनी पीठ थपथपाई थी। वहीं कुछ समय पूर्व जब राजधानी के राजपुर रोड पर सिल्वर सिटी के जिम से बाहर निकलते हुए झारखंड के एक कुख्यात डॉन को बदमाशों ने सुबह ही गोलियों से भूनकर मौत की नींद सुलाया था तो खुलासा हुआ था कि वह तो एक लम्बे दशक से राजधानी में अपना आशियाना बनाकर रह रहा था और उसने उत्तराखण्ड के अन्दर अपना रूतबा इतना बुलंद कर रखा था जिसकी कल्पना कोई नहीं कर सकता और उसके बाहुबली होने का राज उस समय बेपर्दा हुआ जब पता चला कि कुख्यात के पास एक लाइसेंसी पिस्टल तो था ही साथ मे उसने उधमसिंहनगर में एक स्टोन क्रशर का लाइसेंस भी वर्षों से ले रखा था। सवाल खडे हुये कि आखिरकार वो कौन राजनेता और अफसर हैं जिन्होंने इस कुख्यात के साथ खामोश रहकर अपना याराना निभा रखा था और उसी के चलते उसे इनका साथ मिलने से वह कहीं न कहीं पुलिस महकमे की आंखों में नहीं चढ़ पााया था?
सवाल खडा हो रहा है कि झारखंड का एक बडा डॉन भले ही देहरादून में एक गैंगवार में मारा गया हो लेकिन सवाल यह है कि आखिरकार राजधानी में रहते हुए उसने अपना एक बडा साम्राज्य किन राजनेताओं और अफसरों के साथ गोपनीय तरीके से खडा किया था अगर इसकी जांच हो जाये तो कई चेहरे बेनकाब हो सकते हैं? चर्चाओं का बाजार गर्म है कि कुछ राजनेताओं, सफेदपोशों और अफसरों का उसे जरूर साथ मिला हुआ था जिसके चलते वह बेनामी सम्पत्तियों का साम्राज्य बडे गोपनीय तरीके से खडा करता चला गया और किसी को भनक तक नहीं लगी? हत्या के बाद एक न एक दिन तो हत्यारे पुलिस की पकड मे आ ही जायेंगे लेकिन वो राज भी आखिर खुलना चाहिए कि वो कौन राजनेता और अफसर हैं जिनके साथ डॉन ने गुप्त रूप से अपना सिंडिकेट बनाकर दौलत कमाने का जबरदस्त खेल खेल रखा था? सरकार के पाले मे गेंद हैं कि वह कुख्यात डॉन की उत्तराखण्ड में बेनामी सम्पत्तियों को खंगालने के लिए जरूर एक बडी जांच कराये जिससे कि यह साफ हो सके कि उसके काले धंधे में कौन-कौन राजनेता और अफसर उसके साथ बेनामी सम्पत्तियों का गुप्त साम्राज्य खडा करते चले गये थे?

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