‘आकाश या पाताल’…कहां गए विक्रम के ‘बेताल’

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हां! संदिग्ध शूटर के पिता को जरूर ट्रांजिट रिमांड में लेकर पहुंच रही दून पुलिस
देहरादून। दावे-दर-दावे, दबिश पर दबिश… और फिर भी आज दस दिन बाद भी झारखंड के कुख्यात हिस्ट्रीशीटर और राजधानी में स्टोर क्रशर के मालिक विक्रम शर्मा के हत्यारों तक राजधानी पुलिस के हाथ क्यों नहीं पहुंच पा रहे, यह अहम सवाल जहां पुलिस की कार्यप्रणालियों की कलई खोल रही है, वहीं… राजधानी दून की पुलिसिंग व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं। सवाल यह भी उठ खड़ा हुआ है कि कहीं इस चर्चित हत्याकांड में कोई बड़ा ‘राजदार सफेदपोश’ तो नहीं परदे के पीछे पुलिस-प्रशासन पर अपनी गोटियां बैठा रहा हो? चलो, कुछ भी हो, लेकिन अभी तक इस हत्याकांड में अपने को सूबे के तेजतर्रार ‘वर्दीधारी’ बताने वाले आखिर क्यों अब तक हाथ ही मल रहे हैं। अब झारखंड के जमशेदपुर से ट्रांजिट रिमांड पर राजधानी ला रही दून पुलिस आखिर एक संदिग्ध शूटर के पिता राजकुमार सिंह से क्या हासिल कर पाएगी।
हिस्ट्रीशीटर और स्टोन क्रशर मालिक विक्रम शर्मा की हत्या के मामले में शूटरों द्वारा हरिद्वार से किराये पर ली गई स्कूटी में जिस नंबर के यूपीआई का इस्तेमाल हुआ था, उसमें झारखंड के जमशेदपुर के बागबेड़ा थाना क्षेत्र के गाड़ाबासा के रहने वाले एक संदिग्ध शूटर के पिता और एक पुलिस अफसर का भाई बताया जा रहा राजकुमार सिंह को उत्तराखंड एसटीएफ ने गिरफ्तार कर ट्रांजिट रिमांड पर लेकर दून पहुंच रही है। इसी के साथ पुलिस अब यह भी दावा करने लगी है कि इस गिरफ्तारी के बाद हत्याकांड की कड़ियों को जोड़ दिया जाएगा। हालांकि, मुख्य शूटर अभी भी राजधानी की पुलिस गिरफ्त से काफी दूर हैं और इनकी गिरफ्तारी शहर की पुलिस के लिए चुनौती बनी हुई है। राजकुमार का बेटा यशराज विक्रम हत्याकांड में एक संदिग्ध शूटर भी बताया जा रहा है। अब इसी एक गिरफ्तारी को लेकर राजधानी पुलिस को गुमान हो गया है कि आगे वह अन्य बदमाशों को गिरफ्तार कर लेगी। यही वजह है कि लगातार पूछताछ कर पुलिस जानकारियां जुटाने में जुटी है। ज्ञात हो कि जमशेदपुर की कोर्ट में पेश करने के बाद ट्रांजिट रिमांड उत्तराखंड एसटीएफ को मिल गया है।
उत्तराखंड पुलिस का दावा है कि राजकुमार सिंह के बेटे यशराज ने ही शूटरों को हथियार उपलब्ध कराए थे। हालांकि, इसकी अभी तक पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन फिर भी दावों की कलई फिलहाल मामले में शामिल मुख्य शूटरों की गिरफ्तारी न होने से खुलने लगी है कि यहां की पुलिस किस रफ्तार से भाग रही है।

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पुलिस के दावों को पलीता लग रहे फरार शूटर
राजकुमार सिंह का बेटा यशराज इस घटना के बाद से फरार है। इस बाबत पुलिस अफसरों का कहना है कि ट्रांजिट रिमांड में लेकर राजकुमार सिंह को राजधानी लाया जा रहा और पुलिस के हाथ कई अहम सुराग भी लगे हैं, जिससे उम्मीद है कि गैंगस्टर विक्रम शर्मा हत्याकांड का शीघ्र खुलासा कर दिया जाएगा। बताया, राजकुमार को गिरफ्तार करने के साथ ही पुलिस अन्य जगह भी दबिश देकर शूटरों की तलाश कर रही है, लेकिन बड़े पुलिस अफसर के दावों का भांडा अभी तक दस दिन होने के बावजूद किसी अहम बदमाश की गिरफ्तारी न होने से खुल रही है।

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ढूंढों-ढूंढों के खेल में उलझती जा रही दून पुलिस
विक्रम शर्मा कोई छोटा-मोटा अपराधी या गैंगस्टर नहीं था, बल्कि एक नामी हिस्ट्रीशीटर भी था। उस पर हत्या के जहां बीस मामले दर्ज बताए जा रहे हैं, वहीं कुल 55 केसों की फेहरिस्त पुलिस के पास है। इसके साथ ही झारखंड के गैंगवार से जोड़कर पुलिस इस मामले की जांच कर रही है। इसके अलावा शूटरों को ढूंढने की चुनौती के बीच पुलिस झारखंड और बिहार समेत कई अन्य राज्यों की भी खाक छान रही है, लेकिन अब तक कुछ ऐसा नहीं पुलिस खोज सकी, जिससे यह कहा जाए कि अब बस, आज या कल, मामले का राजफाश हो सकता है। केवल दबिश-दर-दबिश का ही राजधानी पुलिस खेल रही है।

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ये था मामला
बीते तेरह फरवरी को राजधानी के राजपुर रोड स्थित एक मॉल के जिम से लौटने के दौरान सुबह दस बजे के आसपास हिस्ट्रीशीटर और स्टोन क्रशर मालिक विक्रम शर्मा की मॉल की सीढ़ियों से उतरते समय तीन गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड को खोलने के लिए उत्तराखंड एसटीएफ के अलावा एसओजी और राजधानी पुलिस की कई टीमें बिहार, झारखंड सहित अन्य राज्यों में शूटरों की तलाश में दबिश दे रही हैं। यह भी बताया जाता है कि वारदात करने से पहले संदिग्ध बदमाश हरिद्वार से स्कूटी और बाइक का इस्तेमाल कर राजधानी पहुंचे थे। इतना ही नहीं विक्रम शर्मा की हत्या करने के बाद भागने के लिए अलग-अलग रास्तों का सहारा भी संदिग्ध शूटरों ने लिया था। इस दौरान राजधानी पुलिस सीसीटीवी कैमरों की मदद से तीन संदिग्ध शूटरों विशाल, आकाश और आशुतोष की पहचान की थी। इस मामले में विक्रम शर्मा की पत्नी ने विक्रम के भाई अरविंद शर्मा पर हत्या करने का संदेह जताया था। इसके बाद पुलिस ने अरविंद से पूछताछ की थी। इस हत्याकांड को संपत्ति विवाद और गैंगवार से जोड़ा गया है। विक्रम शर्मा की हत्या के मामले में पत्नी की तहरीर के बाद दून के डालनवाला कोतवाली में अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज किया गया था।

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