प्राइवेट अस्पतालों की लूट पर आक्रोश

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स्वास्थ्य मंत्री की खामोशी से आवाम ‘हैरान’
लूट के खेल को रोकने को सरकार क्यों खामोश?

उत्तराखण्ड सरकार आम जनमानस को संदेश दे रही है कि वह धाकड़ रूप में सरकार चला रही है लेकिन जिस तरह से अस्थाई राजधानी में कुछ प्राइवेट अस्पताल मरीजों से इलाज के नाम पर खुलकर लूट कर रहे हैं और उनकी इस लूट पर कभी भी सरकार की कोई रडार लगी हो ऐसा देखने को नहीं मिल रहा जिससे आम जन मानस को ऐसे अस्पतालों की लूट का शिकार होना पड़ रहा है। सबसे हैरान करने वाली बात तो यह है कि कुछ प्राइवेट अस्पताल इतने हैवान बन चुके हैं कि वह वैल्टीनेटर पर मर चुके मरीज को कई-कई दिन जिंदा बताकर उनके परिजनों से खुल्मखुल्ला लूट करने में जुटे हुये हैं और इसको लेकर अकसर कई परिवार अस्पतालों के खिलाफ अपना आक्रोश प्रकट करते हुए वहां बवाल भी कर चुके हैं लेकिन कहीं न कहीं उन्हें सुरक्षा का भाव देने के लिए पुलिस आगे आकर खडी हो जाती है इसके चलते मृत मरीजों के परिजनों को मजबूरी में खामोश हो जाना पडता है। एक ओर तो राज्य में बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सेवायें देने का दावा किया जा रहा है वहीं सरकार के मंत्री उन अस्पतालों पर अपनी नजर दौडा ही नहीं रहे जहां मृत मरीजों के परिजनों से भी लूट का तांडव किया जा रहा है।

विकासनगर(संवाददाता)। उत्तराखण्ड में प्राइवेट अस्पतालों द्वारा मरीजों से की जा रही लूट ने आवाम के मन में एक आक्रोश की ज्वाला जला रखी है और हर तरफ यही आवाज उठ रही है कि आखिरकार सरकार क्यों प्राइवेट अस्पतालों की लूट को रोकने के लिए घृतराष्ट्र बनी हुई है? राजधानी के कुछ प्राइवेट अस्पतालों में मृत मरीजों के नाम पर हो रही लूट का खूब हल्ला मच रहा है और यह बहस चल रही है कि आखिरकार जिन डाक्टरों को मरीज के परिवार भगवान मानते हैं वह किस तरह से शैतान रूप में आकर मृत मरीज को भी अस्पताल में भर्ती रखकर ढोल पीट रहे हैं कि अभी इलाज चल रहा है। ऐसे अस्पतालों पर सरकार की खामोशी ने आम जनमानस के मन में एक बडी नाराजगी पैदा कर दी है और सबसे अहम बात यह है कि मृत मरीजों के इलाज के नाम पर हो रही खुली लूट से स्वास्थ्य मंत्री बेखबर हैं और वह कभी भी इन अस्पतालों पर एक्शन लेने के लिए आगे नहीं आ रहे जो मृत मरीजों को भी जिंदा बताकर उनके परिजनों से पैसा लूटने के मिशन में आगे बढे हुये हैं? उत्तराखण्ड जैसे छोटे राज्य में भी यह सबकुछ चल रहा है तो यह सरकार पर एक बडा ग्रहण लगा रहा है कि आखिरकार उसके सामने वो कौन सी मजबूरियां हैं जिसके चलते वह ऐसे अस्पतालों पर सख्त एक्शन लेने से अपने आपको दूर रखे हुये है। अब जन संघर्ष मोर्चा ने दो टूक चेतावनी दी है कि ऐसा करने वाले प्राइवेट अस्पतालों के खिलाफ वह आंदोलन करेगे।
जन संघर्ष मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएनवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा कि स्वास्थ्य मंत्री के गैर जिम्मेदाराना रवैये, अनुभवहीनता एवं अधिकारियों पर नियंत्रण न होने के कारण अधिकांश नामी प्राइवेट अस्पतालों द्वारा मरीजों से की जा रही लूट-खसोट, इलाज में लापरवाही व मृत मरीजों से इलाज के नाम पर लूट- खसोट आम बात हो गई है, जिस पर अंकुश लगाना बहुत जरूरी हो गया है। सरकार को इस संबंध में पुलिस अधिकारियों व चिकित्सकों का संयुक्त विजिलेंस सेल गठन करना चाहिए जो सिर्फ आईसीयू/वेंटीलेटर में भर्ती मरीजों व अन्य आपात स्थिति में मरीजों की पड़ताल कर सके व मरीजों की वास्तविक स्थिति का आकलन कर सके। इससे न सिर्फ मरीजों को राहत मिलेगी बल्कि आयुष्मान, गोल्डन कार्ड इत्यादि के नाम पर हो रही लूट पर भी अंकुश लगेगा और नगद इलाज करने वाले मरीजों को भी राहत मिलेगी। इसके साथ-साथ जिस तरह से सरकारी अस्पताल सिर्फ और सिर्फ रेफरल सेंटर बनकर रह गए हैं, उस हेतु अस्पताल खोलने के मानकों में आमूल चूल परिवर्तन एवं अस्पतालों को अत्यधिक चाक-चौबंद करने की जरूरत है।
नेगी ने आश्चर्य जताया कि स्वास्थ्य मंत्री को इन सब बातों में क्यों कोई दिलचस्पी नहीं है और क्यों मरीजों के जीवन से खिलवाड़ करने की खुली छूट दी गई है। मोर्चा मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करने एवं प्राइवेट अस्पतालों द्वारा मरीजों से की जा रही लूट के संबंध में आंदोलन करेगा एवं मामला सरकार के समक्ष रखेगा। पत्रकार वार्ता में विजयराम शर्मा व अध्यक्ष अमित जैन मौजूद थे।

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