उत्तराखण्ड़ में मचने लगा राजनीतिक संग्राम

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कांग्रेस-भाजपा 2027 का चुनावी रण जीतने को बना रही योजना
देहरादून। 2027 में होने वाले चुनावी रण की जमीन तैयार करने के लिए कांग्रेस व भाजपा आगे आ गई है और दोनो राजनीतिक दलों ने चुनावी रण जीतने के लिए अपनी योजना बनाकर उसे धरातल पर उतारने के लिए आगे बढ़ चली है। चुनावी साल से पहले भाजपा के अन्दर कुछ नेताओं ने कटाक्ष रूप में अपनी ही सरकार को ललकारने का जो दौर शुरू कर रखा है उसकी गूंज कहीं न कहीं भाजपा के कानो मे भी गूंज चुकी है? नौ साल से सत्ता पर आसीन भाजपा सरकार मौजूदा दौर में चौतरफा चुनौतियों का सामना कर रही है जहां उसे अंदरूनी और बाहरी हमलों से बाहर निकलने की रणनीति बनानी पड रही है तो वहीं अंकिता हत्याकांड की जांच सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज से कराने को लेकर भाजपा सरकार की खुलकर घेराबंदी चल रही है जो सरकार के लिए शायद शुभ संकेत नहीं हैं?
फिलहाल भाजपा व कांग्रेस के नक्शे में बिखराव व एकजुटता की रेखाएं घनी होती जा रही है। चुनावी साल में कांग्रेस के नेता छत्तीस का आंकड़ा होने के बाद ऊपरी तौर पर एक नजर आ रहे हैं। जबकि चौतरफा चुनौतियों से घिरी भाजपा अंदरूनी और बाहरी हमलों से उबरने की कोशिश में जुटी हुई है। सीएम के लगातार प्रदेशव्यापी दौरों के बीच पार्टी की अंदरूनी गहमागहमी भी साफ दिखाई दे रही है। बीते हफ्ते भाजपा की कोर ग्रुप की बैठक में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने वरिष्ठ नेताओं को मूल मंत्र दिया। कोर ग्रुप की बैठक के बाद भाजपा के एल गुट ने प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट से अकेले बन्द कमरे में चर्चा की। यह वार्तालाप सत्ता के गलियारे में चर्चा का विषय बनी हुई है।
वहीं भाजपा विधायक अरविंद पांडे के बयानों के बाद बिगड़े हालातों के बीच भाजपा के एक गुट का लगातार किसी न किसी मुद्दे पर अंदरखाने जारी खेल से यह साफ हो गया है कि भाजपा में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है? उधर, मंत्रिमंडल विस्तार व दायित्वधारियों के मुद्दे पर पार्टी के कई विधायक व नेता सीएम धामी से भी लगातार मिल रहे हैं। कुछ नेता कैबिनेट में आने के लिए सीएम धामी परिक्रमा भी कर रहे हैं। इधर, कांग्रेस पार्टी बिगड़ी कानून व्यवस्था, भ्रष्टाचार समेत अन्य मुद्दों को लेकर आज लोकभवन, राजभवन का घेराव करने के लिए हजारों की संख्या में अपने कार्यकर्ताओं के साथ आगे बढ़कर सरकार को खुलकर ललकार गई और उनकी इस ललकार ने एक नई इबारत भी लिख दी कि अब कांग्रेसी नेता अपने ऊपर मित्र विपक्ष का दाग नहीं लगने देंगे?
प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल,प्रीतम सिंह व हरक सिंह रावत के कमान सम्भालने के बाद यह कांग्रेस का एक बड़ा राजनीतिक अभियान मान लिया गया और एक लम्बे दशक के बाद सभी कांग्रेस नेता हजारों कार्यकर्ताओं के साथ सरकार को ललकारने के लिए जब लोकभवन की ओर आगे बढे तो उसने कहीं न कहीं सरकार की नींद उडाकर रख दी? सबसे अहम बात यह है कि कांग्रेस के हालिया धरना-प्रदर्शन में यशपाल आर्य- गोदियाल ,हरीश-हरक-प्रीतम सिंह व करण माहरा कदमताल करते दिख रहे हैं। ये सभी वरिष्ठ नेता अपने-अपने हिसाब से भी मुद्दे उठाकर भाजपा को घेरने की कोशिश में जिस अंदाज के साथ आगे बढे़ हैं उससे साफ नजर आ रहा है कि कांग्रेसी नेताओं को राहुल गांधी का दिया गया मंत्र रास आ गया है।

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