क्या सरकार स्टोन क्रेशर देने वाले अफसरों को करेगी बेनकाब
स्टोन क्रेशर का लाइसेंस देने वाले कब आयेंगे रडार पर!
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में कुछ अफसरों का खनन प्रेम किसी से छुपा नहीं है और सवाल उठते रहे हैं कि राज्य बनने के बाद कुछ अफसर ऐसे रहे जिन्हांेने खनन के पट्टे और स्टोन क्रेशरों के लाइसेंस देने के लिए वो खेल खेला जिसकी किसी ने कोई कल्पना भी नहीं की होगी? झारखंड के कुख्यात गैंगेस्टर का उत्तराखण्ड के अन्दर इतना बडा भोकाल था कि वह वर्षों से यहां रहकर स्टोन क्रेशर और प्रोेपर्टी डीलिंग करकेे अपने धंधे को उफान पर ले जा रहा था लेकिन अब उसकी हत्या के बाद यह बहस छिड गई है कि आखिरकार जिस गैंगेस्टर पर पचास से ज्यादा सनसनीखेज अपराध कायम हैं उसे आखिर किसने स्टोन क्रेशर दिलाने में अपनी खुलकर दरियादिली दिखाते हुए उस पर मेहरबानी की थी? अब सरकार की भी अग्निपरीक्षा है कि वह क्या उन अफसरों का इतिहास खंगालेंगे जिन्होंने झारखंड के कुख्यात हिस्ट्रीशीटर को उधमसिंहनगर में स्टोन क्रेशर का लाइसेंस देने के लिए अपनी कलम चलाई थी। अगर राज्य के अन्दर एक कुख्यात हिस्ट्रीशीटर को स्टोन क्रेशर का लाइसेंस मिला रहा तो उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि राज्य के कुछ अफसर अपनी सरकार को किस तरह से गुमराह करके अपना खेल खेलने में सफल हो गये थे?
कल दिन दहाडे झारखंड के कुख्यात बदमाश विक्रम शर्मा की राजपुर में सिल्वर सिटी में स्थित जीम से बाहर निकलते समय दो बदमाशों ने उसे गोलियों से भूनकर मौत की नींद सुला दिया था। हैरानी वाली बात है कि जब यह बात सामने आई कि कुख्यात बदमाश एक दशक से अपनी पहचान छुपाकर देहरादून में प्रोपर्टी डीलिंग कर रहा था तो उसने पुलिस महकमे को ही कटघरे मे लाकर खडा कर दिया। हैरानी वाली बात है कि एक ओर तो अपराधियों और माफियाओं नेस्तनाबूत करने का सरकारें संकल्प लेती रही लेकिन पूर्व सरकार में कुछ अफसरों ने इस कुख्यात गैंगेस्टर के साथ अपना याराना दिखाते हुए उसे स्टोन क्रेशर का लाइसेंस दे दिया था? सवाल खडे हो रहे हैं कि जिस गैंगेस्टर के खिलाफ पचास से ज्यादा अपराधिक मामले दर्ज हों और झारखंड जैसे राज्य में उसका बडा रूतबा चलता हो उसके साथ आखिरकार वो कौन अफसर याराना निभा रहे थे जिन्हांेने सरकार को गुमराह करके कुख्यात को स्टोन क्रेशर का लाइसेंस देने में अपनी खुलकर दरियादिली दिखाई थी। अब उत्तराखण्ड के अन्दर एक बहस चल उठी है कि आखिरकार एक गैंगेस्टर जो कि राजधानी में गुमनाम अंदाज में रह रहा था उसने आखिर राज्य के वो कौन से अफसर हैं जिनसे अपनी नजदीकियां बनाकर अपने धंधे में चार चांद लगाने का दौर शुरू कर रखा था।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के पाले में अब गेंद है कि वह उन अफसरों की भी कुंडली खंगाले जिन्होंने कुख्यात बदमाश को स्टोन क्रेशर का लाइसेंस देने के लिए अपनी कलम को खूबसूरती के साथ चलाकर गैंगेस्टर को एक बडा गिफ्ट दे दिया था?
