सांप-नेवले की दोस्ती, राजनीतिक डंक किसे लगेगा?
पुरोला विधायक के बड़े बोल, चपरासी कांड की आंच पहुंची दिल्ली तक
पुरोला/उत्तरकाशी। पुरोला सुरक्षित विधानसभा सीट पर 2027 का चुनाव के लिए अभी करीब दस माह का समय है, लेकिन भाजपा के भीतर रणभेरी समय से पहले बज चुकी है। इस सीट पर भाजपा को बाहरी विरोधियों से ज्यादा खतरा अपनी पार्टी के नेताओं से दिखाई दे रहा है। वर्तमान समय में भीतरखाने चल रही गुटबाजी अब खुले मैदान में उतर आई है और हर खेमे की नजर “अभिमन्यु” पर टिकी हुई बताई जा रही है।
नजर भी क्यों नहीं होगी जब राजनीति के वही पुराने धुर-विरोधीकृजिन पर अभिमन्यु ने “सांप और नेवला” कह दिया। पूर्व विधायक मालचंद और पूर्व विधायक एवं दायित्वधारी उपाध्यक्ष बागवानी विकास परिषद् राजकुमार अब एक ही सूर ताल में नजर आ रहे हैं? यही दृश्य इन दिनों राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ा चर्चा का बिषय बन गया है। सवाल बस इतना है कि 2027 के रण में यह नई-नवेली दोस्ती आखिर किसे राजनीतिक डंक मारेगी? याद दिलाना जरूरी है कि 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का रण छोड़कर भाजपा प्रत्याशी दुर्गेश्वर लाल के समर्थन में पूर्व विधायक राजकुमार पूरे लाव-लश्कर के साथ मैदान में उतरे थे। जीत के बाद इन्हें पार्टी ने इनाम भी दिया राज्यमंत्री उपाध्यक्ष बागवानी विकास परिषद् के उपाध्यक्ष पद का। वही राजकुमार, अपने कभी के श्धुर विरोधी मालचंद के साथ खड़े दिख रहे हैं। राजनीतिक पंडित इसे सामान्य संवाद नहीं, बल्कि टिकट के पहले का ट्रेलर मान रहे हैं।
इधर मौजूदा विधायक दुर्गेश लाल भी अपने अंदाज में लगातार सुर्खियां बटोर रहे हैं। कभी अपने ही मंत्रियों और पूर्व विधायकों पर तीखे वार, तो कभी अगले ही दिन “पितातुल्य” का प्रमाणपत्र। हाल ही में जब प्रदेश के कृषि एवं बागवानी मंत्री गणेश जोशी ने पूर्व विधायक मालचंद को उत्तरकाशी जनपद का प्रतिनिधि घोषित किया, तो विधायक ने इसे सीधे-सीधे “चपरासी” की संज्ञा देकर ठंड के मौसम में राजनीतिक पारा और बढ़ा दिया। पूर्व विधायक ने भी पलटवार करते हुए में व्यंग्यात्मक लहजे में विधायक को धन्यवाद देते हुए कहा कि जब प्रधानमंत्री चौकीदार और मुख्यमंत्री मुख्य सेवक हैं, तो उन्हें चपरासी बना दिया गयाकृइसके लिए वे आभारी हैं। साथ ही यह तंज भी कस दिये कि जो व्यक्ति प्रदेश के कद्दावर मंत्रियों के आवास पर अपनी ही सरकार के खिलाफ धरना देता हो, उसकी राजशाही कितने दिन चलेगी, ये तो वक्त बताएगा। इस “चपरासी कांड” पर राज्यमंत्री उपाध्यक्ष बागवानी विकास परिषद् परिषद के सदस्य संजय थपलियाल समेत कई नेताओं ने खुलकर आपत्ति दर्ज कराई और विधायक के बड़े बोल को पार्टी के लिए आत्मघाती करार दिया। राजनीतिक गलियारों में अब चर्चा है कि जो अपने ही वरिष्ठ मंत्रियों और पुराने सहयोगियों को नहीं बख्श रहा, वह चुनावी समय में किसे साथ लेकर चलेगाकृयह सबसे बड़ा सवाल होगा?
सूत्रों की मानें तो विधायक के चपरासी बयान पर पार्टी संगठन तक वायरल वीडियो जंगल की आग की तरह पार्टी आलाकमान तक फैल गई है। अब देखने वाली बात होगी कि अनुशासन का पाठ पढ़ाने वाली भाजपा में संगठन इस पर कठोर कदम उठायेंगी या नहीं। यूं तो पुरोला की राजनीतिक हालात कुछ ऐसे बन गए हैं कि भाजपा में रहते हुए भी हर खेमा खुद को अलग पार्टी मानकर चल रहा है। कहीं पुराने दिग्गजों की अनदेखी का दर्द है, तो कहीं नए नेतृत्व की शैली से उपजा असंतोष। राजनीतिक विश्लेषकों की नजर में 2027 के रण में पुरोला में भाजपा के लिए असली लड़ाई विपक्ष से नहीं, बल्कि अपने भीतर से होगी। गुटबाजी, भीतरघात और टिकट की होड़कृतीनों मिलकर पुरोला में उस चक्रव्यूह की रचना कर रहे हैं, जिसमें यह तय होना बाकी है कि अभिमन्यु कौन होगा३ और महाभारत का धनुर्धारी अर्जुन किस खेमे में बैठे होंगे। फिलहाल महाभारत तो द्वापर युग में था। ये कलयुग है सहाब जहां सांप और नेवला एक ही बिल में बैठते हैं। अब देखना बाकी है कि 2027 के रण में पुरोला विधानसभा में राजनीतिक डंक किसे लगता है३ और जहर किसके हिस्से आता है?
