प्रमुख संवाददाता
देहरादून। सरकार सरकारी जमीनों पर हो रखे अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने के लिए तेजी के साथ आगे आ रखी है और उसका दो टूक कहना है कि सरकारी जमीनों पर हो रखे कब्जे किसी भी कीमत पर छुडवाये जायेंगे। वहीं राजधानी में पदमश्री व अन्यों को 2011 में दिये गये पट्टों को रद्द करने के लिए एक एक्टिविस्ट ने सरकार के पाले में गंेंद डालते हुए मांग की है कि वह गलत तरीके से किये गये पट्टों का आवंटन रद्द करें। पर्यावरणविद को इस्ट होप टाउन क्षेत्र स्थित वन भूमि के आवंटन किये जाने का आरोप है और इस भूमि पर वर्तमान में हैस्को एनजीओ का भवन निर्मित है जो कि अवैध है इसे संवैधानिक, वैधानिक और न्यायिक प्राविधानों का खुला उल्लंघन करार दिया है और मुख्य सचिव से लेकर डीएम तक को कानूनी तथ्यों से युक्त प्रतिवेदन भेजा है जिससे अब शासन के पाले में यह मामला है कि वह इस आवंटन को रद्द करेगा या नहीं?
उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के अन्दर साफ संदेश दिया हुआ है कि अगर किसी ने भी सरकारी जमीन पर कब्जा किया हुआ है तो उस कब्जे को सख्ती के साथ ध्वस्त कर दिया जायेगा और सरकार उस अतिक्रमण को ध्वस्त करके अपने कब्जे में ले लिया जायेगा। मुख्यमंत्री के आदेश पर राज्य के अन्दर सरकारी जमीनों पर हो रखे अतिक्रमणों को ध्वस्त करने का ऑपरेशन चलाया जा रहा है जिससे अतिक्रमण करने वाले माफियाओं में खलबली मची हुई है। वहीं कुछ दिन पूर्व आरटीआई एक्टिविस्ट विकेश नेगी ने बडा खुलासा किया था कि पर्यावरण संरक्षण की आड़ में साल के जंगल पर कब्जा, पदमश्री अनिल जोशी सहित अन्य को 2011 में दिये गये पट्टों को रद्द करने की मांग करके एक बडी हलचल मचा दी थी। विकेश नेगी ने यह भी आरोप लगाया था कि प्रशासन और सरकार द्वारा गलत तरीके से पट्टों का आवंटन किया गया था। विकेश नेगी ने इसको लेकर अपनी शिकायत मुख्य सचिव, राजस्व सचिव और डीएम देहरादून से की थी। विकेश नेगी ने इसको लेकर न सिर्फ प्रशासनिक कार्य प्रणाली पर गंभीर सवाल खडे किये थे बल्कि पर्यावरण संरक्षण के नाम पर किये गये दुरूपयोग को भी बेनकाब कर दिया था? इस बार खुलासे के केन्द्र में पदमभूषण सम्मान से अलंकृत डा0 अनिल प्रकाश जोशी जिनके नाम पर वर्ष 2011 में देहरादून के इस्ट होप टॉउन स्थित ‘साल जंगल’ (वनभूमि) का आवंटन किये जाने का आरोप है। विकेश नेगी का कहना है कि वर्तमान में हैस्को एनजीओ का भवन वहां निर्मित है जिसे उन्होंने अवैध बताते हुए इसे संवैधानिक, वैधानिक और न्यायिक प्राविधानों का खुला उल्लंघन बताया है। विकेश नेगी के दिये प्रतिवेदन के अनुसार जिस भूमि को सरकारी रिकार्ड में स्पष्ट रूप से साल जंगल, वनभूमि के रूप में दर्ज किया गया है, उसी भूमि में वर्तमान में हैस्को एनजीओ का पक्का भवन खडा है। आरोप है कि पर्यावरण संरक्षण के नाम पर वनभूमि का उपयोग गैर-वन उद्देश्य के लिए किया गया। विकेश का आरोप है कि यह मामला केवल एक निर्माण या आवंटन तक सीमित नहीं है बल्कि इसे प्राकृतिक संसाधनों के दुरूपयोग, प्रशासनिक मिलीभगत और कानून की अनदेखी का प्रतीक बताया है। विकेश नेगी का साफ कहना है कि अपने प्रतिवेदन में सर्वोच्च न्यायालय और विभिन्न उच्च न्यायालयों के उन फैसलों का उल्लेख किया है जिनमें स्पष्ट किया गया है कि आठ अगस्त 1946 के बाद सरकार को भी वनभूमि पर पट्टा देने का कोई अधिकार नहीं है। इस तिथि के बाद जंगल, वन, झाडी, नदी, नाला, खतिहान जैसी श्रेणी की भूमि पर दिया गया पट्टा प्रारंभ से ही शून्य माना जाता है। इस आधार पर वर्ष 2011 में किया गया आवंटन कानूनी रूप से अस्तित्वहीन बताया गया है। विकेश नेगी ने पट्टा रद्द करने को लेकर जिस तरह से शासन के पाले में अपनी गेंद सरकायी है उसको लेकर सबकी नजरें इस बात पर टिकी है कि क्या शासन पदमश्री को आवंटित किये गये पट्टे को रद्द करने के लिए आगे आयेगी?
