पुलिस में भ्रष्टाचार कैसे रोकोगे डीजीपी साहब?
भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस नीति अभी तक एक ख्वाब!
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड बनने के बाद से ही राज्य के अन्दर पुलिस के काफी अफसर और दरोगाओं पर भ्रष्टाचार से अकूत दौलत कमाने का खुला दाग लगता रहा। हैरानी वाली बात तो यह रही कि पुलिस के कुछ आला अफसर भी जमीनों के धंधों में खूब पींगे बढाते रहे और उन्होंने पर्दे के पीछे से जमीनों पर कब्जे कराने के जिस एजेंडे पर एक बडा खेल खेलने मे महारथ हासिल की थी वह राज्य के गलियारों में काफी चर्चा का विषय बना था? हैरानी वाली बात तो यह है कि दो एक्स डीजीपी के कार्यकाल में खाकी के अन्दर जो भ्रष्टाचार का तांडव हुआ था वह किसी से छिपा नहीं था और एक पूर्व डीजीपी पर तो जमीन कब्जाने का मुकदमा तक कायम हुआ और उसमें चार्जशीट भी दाखिल हुई यह भी एक सच है। अब राज्य के डीजीपी ने ऐलान किया है कि पुलिसकर्मियों के भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत विजिलेंस सख्त कार्यवाही करे लेकिन सवाल यह भी उठता है कि क्या खाकी मे भ्रष्टाचार करने वाले सिर्फ कुछ छोटे कर्मचारी ही हैं या फिर उन बडों पर शिकंजा कसने के लिए कोई पैमाना नहीं रहेगा जिन पर अकसर दौलत कमाने के आरोपों की बारिश होती रहती है? पुलिस में भ्रष्टाचार डीजीपी साहब कैसे रोकेंगे यह एक बडा सवाल अब राज्य के अन्दर खडा हो गया है क्योंकि राज्य बनने के बाद से आज तक भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस नीति एक ख्वाब से ज्यादा कुछ नहीं दिखी?
उत्तराखण्ड में पुलिस के कुछ बडे-बडे अफसरों पर भ्रष्टाचार से अकूत दौलत कमाने के खुले आरोप लगते रहे लेकिन इनके खिलाफ कभी भी सिस्टम के आला अफसरों ने बडी कार्यवाही करने का मन नहीं बनाया जिसके चलते खाकी के कुछ बडे अफसर भी जमीनों के बडे-बडे मामलों में अपनी घुसपैठ करके दौलत कमाने के एजेंडे पर आगे बढते रहे थे यह भी एक बडा सच है? उत्तराखण्ड के अन्दर कभी भी पुलिस महकमे मे फैले भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने का मिशन सफल नहीं हो पाया? उत्तराखण्ड में काफी अफसर और दरोगा ऐसे हैं जिन्हांेने महकमे के अन्दर अपने आपको बलशाली माना और उन्होंने जो चाहा वो किया लेकिन उनकी कुछ राजनेताओं और अफसरों से बडी पैठ होने के चलते उन पर कोई शिकंजा कसा गया हो ऐसा देखने को नहीं मिल पाया?
उत्तराखण्ड के दो एक्स डीजीपी तो ऐसे भी देखने को मिले जिन्हें दौलत कमान की बडी हवस हुआ करती थी और उन्हांेने जिस रूप में भ्रष्टाचार का खुला खेल खेला था वह अकसर राज्य के गलियारों में चर्चा का विषय बना रहता था। दो एक्स डीजीपी अपने शासनकाल में आवाम और महकमे के अन्दर खूब बदनाम थे लेकिन उन्होंने कुछ राजनेताओं को अपने वश मे कर रखा था जिसके चलते वह जमीनों के धंधों में पर्दे के पीछे रहकर अपने कुछ चहेतों के जरिए दौलत कमाने का वो हुनर सीख गये थे जो सिर्फ फिल्मों मे ही अकसर दिखाई देता था? एक एक्स डीजीपी तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एक कुख्यात पर भी खूब मेहरबान रहता था और उसी के बल पर उसने विवादित जमीनों पर कब्जे कराकर भ्रष्टाचार का जो खुलकर तांडव किया था वह आज भी राज्य के गलियारों में चर्चा का विषय बना रहता है? सवाल है कि अब राज्य के डीजीपी दीपम सेठ ने ऐलान किया है कि पुलिस कर्मियों के भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जायेगी। हालांकि सवाल उठता है कि डीजीपी के पास ऐसा कौन सा पैमाना है जिससे कि उन भ्रष्ट पुलिसकर्मियों के चेहरे स्कैन हो सकंे जो महकमे के अन्दर रहकर भ्रष्टाचार का खेल खेल रहे हैं? यह भी एक बडा सच है कि राज्य बनने के पच्चीस साल मे भी पुलिस के काफी लोग भ्रष्टाचार करते हुए तिनकाभर भी डर महसूस नहीं करते जिससे कि भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति एक ख्वाब जैसी ही नजर आती है?
