भ्रष्ट अफसरों की कुंडली सरकारों पर रही घातक?

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हुजूर भ्रष्ट अफसरों का मोह सिर्फ दौलत!
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड को कुछ पूर्व मुख्यमंत्री ऐसे मिले जिन्होंने सत्य की राह पर चलकर भ्रष्टों की जडों को कुचलने का संकल्प लिया और इस संकल्प को पूरा करने के लिए वह आगे बढे तो राज्य की जनता ने उन्हें सिर माथे पर बिठाया लेकिन कुछ पूर्व मुख्यमंत्रियों के लिए अपनी टीम में चंद भ्रष्ट अफसरों को रखना उनके लिए घातक हुआ और भ्रष्ट अफसरों की कुंडली ने राज्य में चंद ऐसे पूर्व मुख्यमंत्रियों को कुर्सी से महरूम करा दिया जिन्हें राज्य की जनता बेहतर सीएम मानती थी लेकिन उनकी कुंडली में कुछ भ्रष्ट अफसर ऐसे बैठ गये कि उन्होंने अपने राजनेता का फायदा उठाते हुए सिर्फ दौलत कमाने का एजेंडा अपनाया और उन्होंने अपना खजाना तो भर लिया लेकिन उन पर अटूट विश्वास करने वाले चंद पूर्व मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड से लेकर दिल्ली तक में इन भ्रष्ट अफसरों के कारण दागदार होते चले गये और इसी के चलते उन्हें किस्मत से मिली मुख्यमंत्री की कुर्सी हमेशा के लिए चली गई थी? अब उत्तराखण्ड में नये निजाम पारदर्शिता और स्वच्छता के साथ सरकार चलाने के लिए आगे आ रखे हैं लेकिन कुछ भ्रष्ट अफसर और कुछ भ्रष्ट चेहरे सरकार की छवि को दागदार करने में लगे हुये हैं ऐसी चर्चाएं राज्य के गलियारांे में इन दिनों आम हो रखी हैं और यह बहस भी चल रही है कि कुछ भ्रष्ट अफसरों को अगर सरकार ने अपने से दूर करने का साहस नहीं दिखाया तो यह हुजूर के लिए शुभ नहीं होगा? उत्तराखण्ड के कुछ भ्रष्ट अफसरों की नजरों में मुख्यमंत्री को अभेद बनाये रखने का इरादा रखने वाले कुछ अफसरों को जिस तरह से निशाने पर लेने का कुचक्र रचा जा रहा है उस कुचक्र को पहचानना सरकार के मुखिया के लिए मौजूदा दौर में बेहद जरूरी हो गया है क्योंकि उत्तराखण्ड के कुछ भ्रष्ट अफसर और कुछ सफेदपोशों की नजरों में राज्य के युवा मुख्यमंत्री काफी खटक रहे हैं ऐसे में सरकार के मुखिया को कुछ पूर्व मुख्यमंत्रियों का इतिहास खंगाल कर यह परखना होगा कि उनके लिए कौन अफसर उनकी कुंडली में ग्रहण है और कौन अफसर उनकी कुंडली को मजबूती दे रहा है?
उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अटूट विश्वास दिखाकर दिग्गज नेताओं में से उनका चयन कर उन्हें सत्ता की बागडोर सौपी थी और उन्हें उत्तराखण्ड को भ्रष्टाचारमुक्त बनाकर राज्य को आदर्श राज्य बनाने का विजन दिया था। इस विजन पर मुख्यमंत्री अपने पहले कार्यकाल के छह माह खरे उतरे और उन्होंने अपनी पारदर्शी रणनीति से उत्तराखण्ड में एक बार फिर भाजपा की सरकार बना दी थी। पुष्कर ंिसह धामी अपने कुछ राजनेताओं की आंखों में किस कदर खटक रहे थे यह विधानसभा चुनाव मंे भी देखने को मिल गया था कि किस तरह से उन्हें एक साजिश के तहत खटीमा में विधानसभा चुनाव हरवाकर उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी से दूर रखने का पासा फेंका गया था। हालांकि राज्य में भाजपा को सत्ता दिलाने वाले पुष्कर सिंह धामी की हार होने के बावजूद भाजपा हाईकमान ने पुष्कर सिंह धामी को ही राज्य का दुबारा मुख्यमंत्री बनाकर उन सभी साजिशकर्ताओं के अरमानों पर पानी फेर दिया था जो उन्हें दुबारा मुख्यमंत्री न बनने देने के लिए साजिश का खेल खेल चुके थे? उत्तराखण्ड में दूसरी बार मुख्यमंत्री की कमान संभालने वाले पुष्कर सिंह धामी राज्य को भ्रष्टाचार और घोटालेमुक्त बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढने लगे तो राज्य में कुछ भ्रष्ट अफसरों की आंखों में वो चंद ईमानदार अफसर खटकने लग गये जो राज्य के मुख्यमंत्री को सही दिशा में सरकार चलाने के लिए उनके साथ अभेद होकर खडे हुये हैं। उत्तराखण्ड को 2025 तक भ्रष्टाचारमुक्त बनाने का मुख्यमंत्री का संकल्प कुछ भ्रष्ट अफसरों को रास नहीं आया और यही कारण है कि वह यह चक्रव्यूह रचने में जुटे हुये हैं कि किस तरह से मुख्यमंत्री को सही दिशा में सरकार चलाने का ज्ञान देने वाले कुछ ईमानदार अफसरों को किस तरह से उनसे दूर किया जाये?
बता दें कि उत्तराखण्ड का इतिहास रहा है कि कुछ पूर्व मुख्यमंत्री खुद तो ईमानदारी के साथ सत्ता चलाने के लिए आगे आये थे और उन्होंने भ्रष्टाचार और घोटालेबाजों पर नकेल लगाने का संकल्प लेकर अपनी सत्ता को सही दिशा में ले जाने का साहस दिखाया था लेकिन चंद पूर्व मुख्यमंत्रियों की कुंडली में कुछ भ्रष्ट अफसर इस कदर आ गये कि उन्होंने सही दिशा में सत्ता चला रहे चंद पूर्व मुख्यमंत्रियों का मस्तिष्क भ्रमजाल में फंसा दिया और वह इस कदर चंद भ्रष्ट अफसरों के भ्रमजाल मंे फंस गये कि वह सही सत्ता चलाते चलाते ऐसे दौर में प्रवेश कर गये थे कि जहां से उनकी सत्ता उनके हाथों से कब फिसल गई उन्हें इस बात का इल्म ही नहीं हो पाया था? अब उत्तराखण्ड के युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को एक बडी रणनीति के तहत यह मंथन और चिंतन करना चाहिए कि उन्हें किस राह पर अपनी सत्ता को ले जाना है? सरकार के हुजूर को ऐसे भ्रष्ट अफसरों को भी परखना पडेगा जो उनकी कुंडली में घातक हो सकते हैं और ऐसे ईमानदार अफसरों को भी उन्हें अपने साथ रखना पडेगा जो उन्हें आदर्श राज्य बनाने के लिए सही दिशा दिखाने का काम कर रहे हैं?

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