कुमांऊ की वादियों में गूंजता अंकिता हत्याकांड हजारों महिलाओं ने सरकार को ललकारा

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सल्ट में वीआईपी और सबूत मिटाने वालों पर एक्शन की लगाई दहाड़
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड सरकार अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी का नाम आने के बाद आवाम से विश्वसनीय सबूत लाने का दम भर रही है तो वहीं पुलिस के एक अधिकारी ने मीडिया के सामने दावा किया कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में कोई वीआईपी नहीं था। वहीं उत्तराखण्ड के गढवाल व कुमांऊ में आवाम और कांग्रेस सरकार के इस दावे को एक सिरे से खारिज कर रही है और अब यह मामला जिस उफान पर आ चुका है वह उन आंदोलनों की याद ताजा कर रहा है जो राज्य पाने के लिए आवाम ने सड़कों पर किये थे। कुमांऊ की वादियों में भी अंकिता भंडारी हत्याकांड खूब गूंज रहा है और कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने तो इस मामले की जांच सीबीआई से कराने और सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज से कराने के लिए ताल ठोक रखी है। अल्मोडा के सल्ट में हजारों महिलाओं ने सड़कों पर उतरकर सरकार को ललकारते हुए अंकिता भंडारी हत्याकांड में वीआईपी और सबूत मिटाने वालों के खिलाफ एक्शन लेने की ललकार लगाई है और दो टूक कहा है कि अपराध करने वाला जितना अपराधी होता है उतना ही अपराधी सबूत मिटाने वाला भी होता है।
आज अल्मोडा के सल्ट में कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व एआईसीसी के सदस्य करन माहरा ने ब्लाक प्रमुख कंचन रावत, पूर्व ज्येष्ठ प्रमुख विक्रम रावत, पार्टी के सभी मंडलों के प्रभारी के साथ अंकिता भंडारी हत्याकांड में वीआईपी का नाम सामने आने पर उस पर कार्यवाही करने व सीबीआई जांच की मांग को लेकर हजारों महिलाओं के साथ जालीखान से लेकर तहसील तक एक बडी रैली निकाली। सड़कों पर महिलाओं का आक्रोश सरकार के खिलाफ देखते ही बनता था। महिलाओं के मन में आक्रोश था कि आखिरकार सरकार अंकिता भंडारी हत्याकांड में वीआईपी का नाम सामने आने के बावजूद भी इस प्रकरण की जांच सीबीआई से कराने मंे क्यों हिचक रही है। महिलायें हाथों में तख्तियां लेकर चल रही थी जिस पर अंकिता की फोटो थी और उस पर साफ लिखा था कि अंकिता हम शर्मिंदा हैं, तेरे कातिल जिंदा हैं। महिलाओं का आक्रोश सरकार के खिलाफ पनपता हुआ दिखाई दिया और सड़कों पर जिस तरह से महिलाओं का जनसैलाब उमड़ा हुआ था उसे देखकर साफ नजर आ रहा था कि उनके मन में कथित वीआईपी को लेकर कितनी बडी नाराजगी है। करन माहरा रैली के आगे चल रहे थे और उनके हाथों में भी तख्ती थी जिस पर अंकिता भंडारी की फोटो थी। अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी की गिरफ्तारी और सबूत मिटाने वालों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की देखरेख में सीबीआई जांच कराने के लिए महिलाओं का गुस्सा देखते ही बन रहा था।
रविवार के दिन हजारों महिलाओं का सड़कों पर उतरकर कथित वीआईपी को लेकर प्रदर्शन करना यह बता रहा है कि उनके मन मंे कितना बडा आक्रोश है कि इस हत्याकांड का कथित गुनाहगार वीआईपी अभी भी खुली हवा में सांस ले रहा है। महिलाओं का हुजूम देखकर यह बात तो साफ हो गई कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी को लेकर अब आवाम के मन में आक्रोश की ज्वाला जल उठी है। अंकिता भंडारी हत्याकांड में निष्पक्ष, स्वतंत्र एवं विश्वसनीय जांच सीबीआई से कराये जाने के लिए सल्ट के उपजिलाधिकारी के नाम प्रदर्शनकारियों ने एक ज्ञापन भी दिया है।

सीएम अंकिता हत्याकांड की जांच सीबीआई को सौंपे
उत्तराखण्ड कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने आज हजारों महिलाओं के साथ सड़कों पर अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच सीबीआई से कराये जाने की मांग को लेकर महारैली निकाली। ‘क्राईम स्टोरी’ से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को सम्बोधित पत्र उपजिलाधिकारी के माध्यम से दिया गया है। उन्होंने कहा कि बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में उत्तराखण्ड राज्य की अपराधिक न्याय प्रणाली, पुलिस विवेचना तथा प्रशासनिक निष्पक्षता पर गहरे प्रश्नचिन्ह खडे कर दिये हैं। यह प्रकरण अब केवल एक अपराधिक घटना न रहकर संवैधानिक मूल्यों, विधि के शासन एवं राज्य की नैतिक जिम्मेदारी से प्रत्यक्ष रूप से जुड गया है। उन्होंने कहा कि घटना से सम्बन्धित मुख्य स्थल को विवेचनापूर्ण होने से पूर्व ही ध्वस्त कर दिया गया, जिससे महत्वपूर्ण भौतिक साक्ष्यों के नष्ट होने के प्रबल आशंका उत्पन्न हुई। प्रकरण में प्रभावशाली व्यक्तियों की संलिप्ता के आरोप प्रारंभ से ही सामने आते रहे हैं, जिससे राज्य पुलिस द्वारा की जा रही जांच की निष्पक्षता पर संदेह उत्पन्न हुआ। पीडिता के परिजनों एवं आम नागरिकों का पुलिस एवं राज्य सरकार की जांच प्रक्रिया से विश्वास लगभग समाप्त हो चुका है। करन माहरा ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा समय-समय पर यह प्रतिपादित किया गया है कि जब किसी अपराधिक मामले में जांच एजेंसी की निष्पक्षता संदेह के घेरे मे हो, साक्ष्य प्रभावित किये जाने की आशंका हो, अथवा जन विश्वास पूर्णता डगमगा गया हो तो ऐसे मामलों में सीबीआई जांच ही न्याय के हित में उपयुक्त मानी जाती है। उन्होंने कहा कि अंकिता भंडारी को न्याय दिलाना न केवल राज्य का दायित्व है, बल्कि उत्तराखण्ड की प्रत्येक बेटी की सुरक्षा का प्रतीकात्मक प्रश्न भी है इसलिए मुख्यमंत्री अंकिता भंडारी की सम्पूर्ण जांच अविलम्ब सीबीआई से करायें और जांच की निगरानी सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीश की देखरेख मे हो।

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