सीबीआई जांच कराने से क्यों डर रही सरकार
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में अंकिता भंडारी हत्याकांड में सीबीआई जांच को लेकर अब कांग्रेस व भाजपा आमने-सामने आते हुये दिखाई दे रही है। कांग्रेस लगातार इस मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग को लेकर दिल्ली से लेकर उत्तराखण्ड तक आंदोलन, प्रदर्शन और मीडिया से रूबरू हो रही है। वहीं कांग्रेस मंत्री सुबोध के बयान पर पलटवार करते हुए हरक ने कहा कि सबूत अगर किसी के पास हों तो फिर जांच की जरूरत ही क्या है इसलिए सीबीआई ही तो इस मामले में सबूत जुटायेगी और जांच से ही यह बात साफ होगी कि उर्मिला के आरोप में कोई सच्चाई थी या नहीं।
भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौर की पत्नी उर्मिला सनावर ने सोशल मीडिया में आकर अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी के नाम का खुलासा करके उत्तराखण्ड से लेकर दिल्ली तक में एक बडा भूचाल मचाकर रख दिया है। कांग्रेस और विपक्षी दल के नेता सरकार से इस मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग को लेकर अपनी दहाड़ लगा रहे हैं। कांग्रेस के दिग्गज नेता इस मामले की सीबीआई जांच कराने के लिए सड़कों पर उतरे हुये हैं। सरकार के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने अंकिता भंडारी हत्याकांड में सीबीआई जांच को लेकर अपनी बात कहते हुए कहा कि एसआईटी की जांच से ही पांच हत्यारों को आजीवन कारावास की सजा हुई है और सुप्रीम कोर्ट ने भी एसआईटी की जांच को सही माना था। उन्होंने कहा कि अगर इस मामले में किसी के पास सबूत हैं तो सरकार मामले की जांच सीबीआई के सुपुर्द कर देगी। वहीं कांग्रेस के कद्दावर नेता हरक सिंह रावत ने बातचीत में कहा कि कांग्रेस अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच सीबीआई से कराने की मांग कर रही है क्योंकि इस मामले में आम जनमानस के मन में वीआईपी को लेकर शंकाओं का दौर है और सरकार को जनता का विश्वास जीतने के लिए मामले की जांच सीबीआई से करानी चाहिए।
हरक सिंह रावत ने कहा कि अगर किसी के पास इस मामले के सबूत हैं तो फिर जांच की जरूरत ही क्या है? उन्होंने कहा कि सबूत जुटाने का काम तो सीबीआई ही करेगी और वह इस मामले में उन दोनो भाजपा नेताओं के मोबाइल फोन की लोकेशन और सीडीआर खंगालेगी जिन पर वीआईपी होने का दाग लग रहा है। हरक सिंह रावत ने कहा कि सीबीआई जांच हुई तो वह पुलकित आर्य और दोनो नेताओं के मोबाइल फोनों की जांच करेगी कि वारदात से पहले उनके बीच या उनके किसी स्टाफ के साथ बातचीत तो नहीं हुई। उन्होंने कहा कि जब राज्य और केन्द्र में दोनो जगह भाजपा की सरकार है तो फिर उसे इस मामले में सीबीआई जांच कराने से क्यों डर लग रहा है। उन्होंने कहा कि राजनेताओं में नैतिकता होनी चाहिए और जब इतने गंभीर आरोप किसी पर लगते हैं तो उसे आगे आकर अपना इस्तीफा यह कहकर दे देना चाहिए कि जब तक इस मामले मे वह निर्दोष साबित नहीं होगें तब तक किसी पद पर नहीं रहेंगे। उन्होंने कहा कि आज भाजपा के दो नेता आम जनता के निशाने पर हैं और सड़कों पर उतरकर वह धरना-प्रदर्शन करके मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग कर रहे हैं तो सरकार को भी इस मामले में सीबीआई जांच कराने से क्यों संकोच हो रहा है यह कई शंकाओं को जन्म दे रहा है।
हरक सिंह रावत ने कहा कि राम के नाम पर राजनीति करने वाली भाजपा को इस बात का भी इल्म होगा कि जब भगवान राम की पत्नी माता सीता पर एक उंगली उठी तो उन्हें अग्निपरीक्षा से गुजरना पडा था जबकि भगवान राम को भी पता था कि सीता माता गंगाजल की तरह पवित्र हैं। उन्होंने कहा कि भगवान राम को मानने वाली पार्टी की सरकार के जब दो भाजपा नेताओं पर आरोप लग रहे हैं तो उन्हें भी नैतिकता के आधार पर अग्निपरीक्षा देनी चाहिए। हरक सिंह रावत ने दो टूक कहा कि जब तक अंकिता भंडारी हत्याकांड में सरकार सीबीआई जांच के आदेश नहीं करेगी तब तक कांग्रेस सड़कों पर यह लडाई लड़ती रहेगी।
