हरीराम नाई की भूमिका में चुगलखोर कलमवीर

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स्क्रीन शॉट अपने आकाओं को भेजते चापलूस
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में एक दशक से काफी कलमवीर कुछ राजनेताओं और अफसरों के हाथों की कठपुतली बनकर उनके इशारे पर कुछ भी कर गुजरने के लिए रात-दिन तैयार रहते हैं। नेता और अफसर का आदेश हुआ नहीं कि चापलूस कलमवीर अपने आकाओं की आंखों में खटकने वालों का शब्दबाणों से चीरहरण करने के लिए आगे निकल पडते हैं और वह शेखी बखारते हैं कि साहब देखो मैने आपके दुश्मन का बैंड बजा दिया है। उत्तराखण्ड की राजधानी में पिछले कुछ वर्षों से चुगलखोर कलमवीर की भूमिका निभाने वाले हरीराम नाई अब स्क्रीन शॉट का खेल खेलने में जुटे हुये हैं और उन कलमवीरों को वह कुछ राजनेताओं और अफसरों की आंखों में विलेन बनाने में जुटे हुये हैं जिनसे वह लेखनी में उनका सामना नहीं कर पाते।
हिन्दी फिल्म शोले में जेल के अन्दर जेलर के लिए मुखबरी करने वाले एक हरीराम नाई का किरदार आज भी बडे चस्के लेकर सुना और देखा जाता है। एक अर्से पूर्व आई इस हिन्दी फिल्म में जो किरदार हरीराम नाई ने फिल्म के अन्दर निभाया था उस किरदार को आज उत्तराखण्ड की राजधानी के एक दर्जन के करीब चुगलखोर कलमवीर खूब निभा रहे हैं और उन्हें हरीराम नाई के नाम से पहचाना जाने लगा है क्योंकि वह कुछ राजनेताओं और अफसरों के हाथो की कठपुतली बनकर उनके इशारे पर कुछ भी कर गुजरने के लिए तैयार रहते हैं। उत्तराखण्ड के अन्दर यह सवाल खडा होता रहा है कि जब-जब कुछ राजनेताओं और अफसरों ने अपने आंगन में हरीराम नाई जैसे चापलूस पाले उनकी चापलूसी का खामियाजा उन्हें अपना राजपाठ गवा कर भुगतना पडा था?
आज मीडिया के कुछ कलमवीर हरीराम नाई की भूमिका में कुछ राजनेताओं और अफसरों के लिए चुगलखोरी करने का अमृत पी रहे हैं और उनकी चुगलखोरी ने कुछ राजनेताओं और अफसरों को इस भ्रम में डाल दिया है कि वह उन्हें वो खबरें दे रहे हैं जो दीवारों के अन्दर कही गई होती हैं। हालांकि ऐसे नेताओं और अफसरों को इस बात का पता ही नहीं चलता कि हरीराम नाई की भूमिका में उनके पाले में मौजूद चुगलखोर कलमवीर उन्हें हवा में तैरती उन खबरों को परोसते हैं जिनका कोई सिर-पैर ही नहीं होता। देखने में आ रहा है कि सोशल मीडिया पर नजर रखने के लिए पुलिस और खुफिया एजेंसियां अलर्ट रहती हैं लेकिन इस दौर में कुछ चापलूस कलमवीर जो कि हरीराम नाई की भूमिका में अपनी अदाकारी दिखा रहे हैं वो अकसर किसी ग्रुप में ऐसी खबरों का स्क्रीन शॉट अपने आका और अफसरों के पास भेजते हैं जिसमें सिस्टम को कटघरे में खडा किया जा रहा हो। स्क्रीन शॉट का खेल खेलने वाले कुछ चुनिंदा ही हरीराम नाई राजधानी के अन्दर दिखाई दे रहे हैं और उनके चेहरे भी सबके सामने हैं इसलिए यह साफ है कि अब हरीराम नाई कान में जासूसी करने के बजाए स्क्रीन शॉट लेकर अपने नये एजेंडे पर अपने आकाओं को खुश करने में जुटा हुआ है लेकिन वह कब तक ऐसा खेल खेलता रहेगा यह उसे भी नहीं पता।

चापलूसों का अंजाम सबने देखा है…
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड का इतिहास गवाह है कि जब भी कुछ कलमवीरों ने कुछ राजनेताओं और अफसरों का दुलारा बनने के लिए उनके इशारे पर कठपुतली बनकर जब-जब नृत्य किया तो उसके बाद उनका अंजाम क्या हुआ यह किसी से छिपा नहीं है। चापलूसों का अंजाम उस समय और घातक हो जाता है जब उनके कुछ राजेनताओं और अफसरों का राजपाठ उनसे छिन जाता है।
उत्तराखण्ड में चौथे स्तम्भ का जो हश्र आज के दौर में हो रखा है उसे बताने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि आम जनमानस को इस बात का इल्म हो चुका है कि कुछ कलमवीर किस तरह से राज्य के कुछ दिग्गज नेताओं और अफसरों की चरण वंदना करते हुए उनके इशारे पर कुछ भी कर गुजरने को तैयार हैं और उन्होंने अपनी चापलूसी की सारी हदें पार कर रखी हैं। मीडिया जगत में तो हर उस चापलूस के चेहरे बेनकाब हो रखे हैं जो कुछ राजनेताओं और अफसरों के हाथों की कठपुतली बनकर उनके सामने वही नृत्य कर रहे हैं जो उन्हें करने के लिए कहा जा रहा है।

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