संस्था की जमीन बेचने का खेल बेनकाब

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संस्था का प्रबंधक साजिश से बेच गया जमीनें
प्रशासन ने जमीनों के दाखिल खारिज किये रदद
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के अन्दर फर्जी तरीके से जमीनों को बेचने का एक बडा खेल लम्बे दशक से चलता आ रहा है और उसी के चलते यह बहस चलती आ रही है कि आखिरकार उत्तराखण्ड के अन्दर कब भूमाफियाओं की नाक मे नकेल डलेगी कि वह आवाम की जमीनों पर साजिश के तहत कब्जे करने का शातिराना खेल न खेल पायें। डीएवी संस्था कानपुर के प्रबंधक ने कुछ वर्ष पूर्व कूटरचना करके संस्था की जमीनों को साजिश के तहत एक दर्जन से अधिक लोगों को बिना संस्था की अनुमति के बेच दिया था और उसके बाद उन जमीनों की तहसील में दाखिल खारिज भी हो गई थी जिसका पता चलने के बाद संस्था ने इस फर्जीवाडे के खेल को बेनकाब करने के लिए अपनी पैरवी की और उसके बाद तहसील प्रशासन ने हर उस जमीन का दाखिला खारिज रद्द कर दी जो एक साजिश के तहत करा ली गई थी। अब संस्था ने सेलाकुई थाने मे संस्था के प्रबंधक और भूमाफियाओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। हैरानी वाली बात है कि भूमाफियाओं ने भूमि बेचने से पूर्व जिला न्यायाधीश की अनुमति भी नहीं ली जो कि एक खुला उल्लंघन है। अब बेशकीमती जमीन को साजिश के तहत बेचने वाले संस्था के प्रबंधक और भूमाफियाओं के खिलाफ पुलिस ने अपनी जांच शुरू कर दी है।
दयानंद शिक्षा संस्थान सिविल लाइंस कानपुर शहर में रहने वाले विजयंत कुमार सिंह ने सेलाकुई थाने में एक शिकायती पत्र दिया है जिसमें उन्होंने कहा है कि उनकी संस्था के प्रबंधक रहे प्रकाश नौटियाल ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर संस्था की जमीन को धोखाधडी, छल, गलत रूप से सम्पत्ति हड़पने और जालसाजी दस्तावेजों से उसे दर्जनों लोगों को साजिश के तहत बेच दिया था। उन्होंने कहा कि उनकी पंजीकृत संस्था है जिसका नाम दयानंद शिक्षा संस्थान सिविल लाइन कानपुर (पूर्व में डीएवी कॉलेज ट्रस्ट एंड मैनेजमेंट सोसायटी) है जो पूरे भारत में शिक्षा कार्य में एक प्रतिष्ठित संस्था है। शिकायत में कहा गया कि शिकायतकर्ता संस्था के स्वामित्व में 8.38 एकड भूमि है जो राजस्व अभिलेखों में खाता संख्या 278 के रूप में दर्ज है जो ग्राम हरिपुर (सेंट्रल होप टाऊन) सेलाकुई में स्थित है। शिकायत में कहा गया कि प्रकाश नौटियाल पहले संस्था का अधिकृत प्रतिनिधि था। वर्ष 2012 में संस्था ने उसे कुछ विशेष कार्यों के लिए अधिकृत किया था, किंतु भूमि बेचने, गिरवी रखने, किराये पर देने आदि का कोई अधिकार नहीं दिया था। प्रकाश नौटियाल ने तेरह सितम्बर 2012 को एक जाली स्पेशल पॉवर ऑफ एर्टोनी बनाकर उस पर जगेन्दर स्वरूप (तत्कालन महामंत्री, अब दिवंगत) के हस्ताक्षर जाली रूप से किये गये तथा उसने उस पर गवाह के रूप में 11,12 लोगों के हस्ताक्षर करवाये। भूमि उनके नाम गैरकानूनी रूप से बेच दी जबकि उक्त बिक्री विलेखों के आधार पर इन भूमाफियाओं ने संस्था को आर्थिक हानि पहुंचाई और स्वंय अनुचित लाभ लिया। शिकायत मे कहा गया कि संस्था को किसी भी समय कोई भुगतान प्राप्त नहीं हुआ, उक्त भूमि संस्था को शैक्षणिक कार्य हेतु दान स्वरूप दी गई थी जिसका विक्रय करना संस्था को भी अधिकृत नहीं था। शिकायत में कहा गया कि भूमि बेचने से पूर्व जिला न्यायधीश की अनुमति आवश्यक होती है जिसका अभियुक्तों ने उल्लंघन किया। दान में मिली सम्पत्ति को बेचने से पूर्व रजिस्ट्रार सोसाइटी की स्वीकृति आवश्यक होती है जो नहीं ली गई। शिकायत में कहा गया कि कुछ अभियुक्तों ने जमीन का दाखिला खारिज करने के लिए तहसील विकासनगर के समक्ष प्रार्थना पत्र दाखिल किये और बिना संस्था को पक्ष बनाये उनके नाम दाखिल खारिज हो गई जो कि दण्डनीय अपराध है। तहसील में जब इसके खिलाफ शिकायत की गई तो तहसील प्रशासन ने सभी दाखिल खाजिर रद्द कर दी और अब सेलाकुई पुलिस इस मामले की जांच कर रही है।

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