राज्य की तस्वीर बदलता कर्मयोगी सीएम

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। हिन्दी सिनेमा में 1972 में आई मनोज कुमार की फिल्म शोर का वह गीत आवाम को याद आ रहा है जिसमें मनोज कुमार गाते हैं कि ‘‘ जीवन चलने का नाम, चलते रहो सुबह-ओ-शाम, के रस्ता कट जाएगा मितरा, के बादल छट जाएगा मितरा, के दुःख से झुकना ना मितरा, के एक पल रूकना ना मितरा’’। उस गीत को उत्तराखण्ड के अन्दर युवा मुख्यमंत्री चार साल से चरितार्थ करते आ रहे हैं। मुख्यमंत्री राजनीतिक पिच पर जिस तरह से ऑल रॉउण्डर खिलाडी बनकर राज्य में पहले पायदान पर पहंुच चुके हैं वह राज्य की जनता के लिए शुभ संकेत हैं क्योंकि जहां वह सुपर राजनीतिक पारी खेल रहे हैं वहीं राज्य की जनता के दिलों को भी जीतने का उन्होंने जो काम किया है उससे उत्तराखण्ड के अन्दर उनकी टीआरपी तक राज्य का कोई भी धुरंदर राजनेता वर्षों तक नहीं पहुंच पायेगा ऐसा राज्य की जनता को भी अब साफ नजर आने लगा है।
उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मात्र चार साल के भीतर ही राज्य की जनता के मन में कर्मयोगी पुष्कर बन चुके हैं और राज्य की जनता ने उन पर जो आस्था दिखाई है उसका सीधा संदेश दिल्ली मंे बैठे भाजपा हाईकमान को भी मिलने लगा है और यह बात भी उठने लगी है कि अगर राज्य के मुख्यमंत्री अपने कर्म को अपना धर्म मान लें तो उस राज्य के मुख्यमंत्री को कोई हिला नहीं सकता। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को नजदीक से पहचानने वाले लोगों का कहना है कि चार साल के कार्यकाल मंे उन्होंने जिस तरह से तिनकाभर भी अहंकार नहीं पाला और अगर वह इसी राह पर अपनी राजनीति करते हुए आगे बढे तो उत्तराखण्ड में वह एक लम्बे युग तक सत्ता पर राज करेंगे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखण्ड को आदर्श राज्य बनाने के लिए संकल्प लिया हुआ है उसको देखते हुए पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखण्ड की तस्वीर बदलने के लिए जिस तरह से अपने आपको कर्मयोगी के रूप में अपने आपको राज्य की जनता के सामने पेश किया है उससे देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी उत्तराखण्ड के इस कर्मवीर पुष्कर की स्वच्छ सरकार चलाने की शैली से प्रसन्न नजर आ रहे हैं और यही कारण है कि वह इस सखा को प्रसिद्धि के उस पायदान पर लाकर खडा करना चाहते हैं जहां तक पहुंचने में बडे-बडे राजनेताओं को एक अरसा बीत जाता है।
पुष्कर सिंह धामी ने जो संकल्प लिया था और राज्य की जनता से वायदा किया था कि सरकार आने के बाद वह क्या-क्या विकास करेंगेे उस विकास को वह एक-एक कर चार साल में ही धरातल पर उतारने के लिए आगे बढते जा रहे हैं। हैरानी वाली बात है कि इक्कीस सालों में राज्य के अधिकांश अफसरशाही और दर्जनों मंत्री, विधायक व नेता उत्तराखण्ड के विकास का एक नया मॉडल तैयार करने के लिए विदेशों में सरकार का खजाना लुटाकर पिकनिक मनाकर आते रहे और विकास के नाम पर शून्य से ज्यादा राज्य को कुछ नहीं मिला वह किसी से छुपा नहीं है? वहीं राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किसी देश में अपने अफसरों व राजनेताओं को वहां का मॉडल लाने के लिए राज्य का पैसा नहीं बहाया और देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मंथन कर उत्तराखण्ड को एक आदर्श राज्य बनाने के लिए खुद ही आगे बढने का हौसला जिस तरह से दिखाया है उससे पुष्कर सिंह धामी उत्तराखण्ड के कर्मवीर कहलाने लगे हैं।
गौरतलब है कि उत्तराखण्ड में इक्कीस सालों से राज्य की जनता अधिकांश पूर्व मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में उनका अहंकार और तानाशाही का रूप देखते आ रही है जिसके चलते उनके मन में एक धारणा पैदा हो गई थी कि अब इस राज्य का गर्त मंे जाना तय है क्योंकि अधिकांश सरकारों के कार्यकाल में विकास का पहिया सिर्फ छुक्क-छुक्क करता रहा और उसने कभी भी पटरी पर दौडने का साहस नहीं दिखाया। उत्तराखण्ड का भविष्य उज्जवल करने के लिए देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राज्य की जनता को वचन दिया था कि वह उत्तराखण्ड को इतनी ऊंचाईयों पर पहुंचा देंगे कि राज्य को सौ साल तक केन्द्र की ओर ताकना नहीं पडेगा लेकिन पिछली सरकार में भाजपा के दो पूर्व मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी के सपनों को धरातल पर नहीं उतार पाये और जब पुष्कर सिंह धामी को राज्य की सत्ता मात्र चंद माह के लिए सौंपी गई तो पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री के विजन को उत्तराखण्ड के अन्दर जब साकार करना शुरू किया तो उससे राज्य की जनता ने तो उन्हें अपना महानायक मान लिया और उनकी चम्पावत में एतिहासिक जीत उत्तराखण्ड में एक नया अध्याय लिखने की ओर आगे बढ चुकी है। सरकार बनने के बाद से मुख्य सेवक पुष्कर सिंह धामी ने मात्र चंद महीनों में ही जिस तरह से उत्तराखण्ड की तस्वीर बदलनी शुरू कर दी है उससे आवाम यह कहने से नहीं चूक रहा कि पुष्कर सिंह धामी कर्मयोगी हैं और वह अपना कर्म जिस स्वच्छता के साथ कर रहे हैं वह आने वाले समय में उत्तराखण्ड को एक नई पहचान दिलाते हुए दिखाई दे रहा है।

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