मोर्चे का सवालः पेपर लीक फंडिंग मामले में कोचिंग सेंटर संचालकों की कब होगी जांच

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हाकम के साथ अफसरों की तस्वीरों का नहीं खुला आज तक राज!
विकासनगर(संवाददाता)। एक लम्बे समय बाद फिर जिस तरह से पेपर लीक को लेकर राज्य के अन्दर एक नया भूचाल मचा है उससे आशंकाओं का दौर शुरू हो रखा है। जहां सिस्टम के अफसर पेपर लीक मामले में अपनी कहानी बयां कर रहे हैं तो वहीं बेरोजगार संघ आरोप की बौछार कर रहा है कि इस मामले में जिस तरह से पेपर लीक की आशंकायें सामने आई हैं उसके चलते सरकार को चाहिए कि वह मामले की जांच सीबीआई से कराई जायें जिससे कि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। सबसे अहम बात यह है कि आखिरकार जिस हाकम सिंह पर बडा शिकंजा कसने का सिस्टम ने एक दशक पूर्व दम भरा था आखिरकार उसे ऐसा कौन सा और किसका साथ मिला जिसके चलते उसने फिर नकल माफिया का चोला पहनकर सरकार और सिस्टम को चुनौती देने के लिए अपने आपको आगे कर दिया? हाकम सिंह की गिरफ्तारी ने कई सवालों को जन्म दे दिया है और यह बहस शुरू हो गई है कि आखिरकार अगर हाकम और उसके हाकिमों का सच सामने लाना है तो इसकी जांच पुलिस की एसआईटी से नहीं बल्कि सीबीआई से करानी चाहिए जो इस मामले की हर उस परत को खोलकर रख देगी जो परतें आज भी अधूरी हैं? काफी भाजपा नेताओं और चंद अफसरों के साथ उसकी पूर्व में खिलखिलाती तस्वीरें उसकी गिरफ्तारी के बाद से ही एक सवाल पैदा कर चुकी थी कि आखिर इन सबके बीच में ऐसा कौन सा रिश्ता था जिसे जांच करने वाली एसआईटी बेनकाब नहीं कर पाई थी?
जन संघर्ष मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा कि कल हुए यूकेएसएसएससी पेपर लीक मामले में इतनी सुरक्षा के बावजूद पेपर लीक होना कहीं न कहीं किसी ग्रुप सेंटर्स की मिलीभगत सांठगांठ की ओर इशारा करता है। नेगी ने कहा कि पूर्व में जनपद देहरादून के तत्कालीन एसएसपी दिलीप कुंवर भी बेरोजगार आंदोलन में हुई पत्थर बाजी व आंदोलन में हुई फंडिंग की बात स्वीकार चुके हैं, हो सकता है कि किसी कोचिंग सेंटर्स द्वारा ये हरकत की गई हो आखिर इन कोचिंग सेंटर्स का बेरोजगारों के आंदोलन आदि तमाम मामलों से क्या लेना देना। क्यों इनका नाम सामने आया , फंडिंग करने के पीछे इन कोचिंग सेंटर्स की क्या मंशा थी? मोर्चा लगातार सरकार, पुलिस महानिदेशक से बेरोजगार आंदोलन में हुई फंडिंग मामले में कोचिंग सेंटर्स व फंडिंग बाजों की भूमिका की जांच की मांग कर चुका है, लेकिन इस महत्वपूर्ण मामले में कोई दिलचस्पी लेने को तैयार नहीं। पूर्व में पेपर लीक मामले में कई जालसाज जेल जा चुके हैं, ऐसे में हो सकता है कि कहीं न कहीं गड़बड़ झाला हो, जिसकी गहन जांच होनी आवश्यक है। आखिर दिन- रात पढ़-पढ़ कर अपनी आंखें खत्म करने वाले युवा कब तक छले जाते रहेंगे। नेगी ने सरकार को आगाह किया कि अगर इसी प्रकार फंडिंग होती रही तो प्रदेश में अराजकता आने में देर नहीं लगेगी। किसी खास मकसद के लिए की गई फंडिंग व दान- चंदा, किसी भी राज्य को बर्बाद करने के लिए काफी है इसलिए समय रहते सचेत होने की आवश्यकता है। मोर्चा सरकार से फिर मांग करता है कि पेपर लीक मामले में और पूर्व में हुए बेरोजगार फंडिंग मामले में कोचिंग सेंटर्स की भूमिका की भी जांच कराए। पत्रकार वार्ता में मोर्चा महासचिव आकाश पंवार व दिलबाग सिंह सिंह मौजूद थे।

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