राजधानी में ‘तमाशा ही तमाशा’

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सीएम साहब तमाशे का करेंगे अंत
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री चार साल से बेदाग होकर सत्ता चला रहे हैं और उन्होंने अपने दामन पर आज तक कोई दाग नहीं लगने दिया तो वहीं वह अपने मंत्रियों और अफसरों को राज्यहित में काम करने का हमेशा संदेश देते आ रहे हैं जिससे कि उत्तराखण्डवासियों को डबल इंजन सरकार का फायदा मिलता रहे। उत्तराखण्ड में पिछले कुछ समय से ऐसा माहौल तैयार किया जा रहा है जिससे कि सरकार के मुखिया को कटघरे में खडा किया जा सके? कभी मुख्यमंत्री बदलने का भोपू बज जाता है तो कभी मंत्रिमण्डल बनाये जाने का शोर तेजी से उठने लगता है। मुख्यमंत्री के विजन को धरातल पर उतारने के लिए अफसर भी आगे बढे हुये हैं लेकिन जहां कुछ अफसर अपनी ही शैली से काम करने पर उतारू हैं तो वहीं राज्य के एक कैबिनेट मंत्री भी सोशल मीडिया पर अपना भोकाल दिखाने के लिए अफसर के साथ जिस तरह से भिडते हुए नजर आये उसका शोर सोशल मीडिया पर खूब मचा हुआ है। उत्तराखण्ड के इतिहास में पहली बार ऐसा देखने को मिला जब राज्य के एक कुख्यात गैंग को पुलिस का एक अफसर ही अपनी शरण दिये हुये है और इस गैंग से गठबंधन करने वाले दो पुलिसकर्मियों को एसटीएफ ने जेल की सलाखों के पीछे डाला तो उससे उत्तराखण्डवासियों के मन में अब एक शंका उठ रही है कि आखिरकार राजधानी में कब तक ‘तमाशा ही तमाशा’ चलेगा जिसके चलते आवाम अपने आपको डरा और सहमा हुआ महसूस करता रहेगा। आवाम को यह भी विश्वास है कि आज नहीं तो कल राजधानी में चल रहे इस तमाशे का अंत भी मुख्यमंत्री खुद करेंगे।
उत्तराखण्ड की अस्थाई राजधानी पिछले कुछ समय से तमाशा बनी हुई है और इसका आईना उस समय देखने को मिला जब राजपुर में भाजपा के एक नेता के घर पर चल रही पार्टी में एक पुलिस अफसर अपनी टीम के साथ वहां पहुंच गया और उसने वहां जो तांडव मचाया उसको लेकर पार्टी के अन्दर काफी बवाल मचा और यह सवाल उठे कि आखिरकार पुलिस अफसर को आखिरकार ऐसी कौन सी खुफिया जानकारी मिली थी जिसके चलते वह पार्टी में अपनी धमक दिखाने के लिए वहां पहुंचे और उन पर भाजपा नेता ने ही खूब आरोप लगाये कि पुलिस अफसर ने पार्टी के अन्दर जिस तरह से तांडव मचाया वह उनकी छवि खराब करने जैसा ही है क्योंकि पार्टी के अन्दर ऐसा कोई अनैतिक काम नहीं हो रहा था जिसके चलते पुलिस अफसर बिना बात के उग्र होकर वहां अपनी वर्दी का रौब गालिब कर पार्टी में आये लोगों को ही अपने निशाने पर लेने से पीछे नहीं हट रहा था? राजधानी के अन्दर भाजपा नेता के यहां हो रही पार्टी में पुलिस अफसर की सिंघम अंदाज में हुई एंट्री ने कई सवाल खडे कर रखे हैं और इस मामले को लेकर भाजपा के कुछ नेता भी पुलिस अफसर की दबंगई को लेकर अपनी बडी नाराजगी दिखाते हुए नजर आ रहे हैं लेकिन अभी तक उनकी नाराजगी का कोई असर सिस्टम पर होता हुआ नजर नहीं आ रहा है?
वहीं कुछ दिन पूर्व जब रायपुर इलाके मे बादल फटा तो उसके बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अफसरों की टीम को मैदान में उतारकर उन्हें आपदा पीडितों के साथ खडे होने का आदेश दिया और उसके बाद अफसरों ने बचाव व राहत कार्य के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया तो वहां कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने जिस तरह से राजधानी के डीएम को अपना भौकाल दिखाने के लिए उन्हें अपने निशाने पर लेने का काम किया उसका शोर सोशल मीडिया पर खूब मच रहा है और मंत्री को सोशल मीडिया पर खूब ट्रोल किया जा रहा है कि वह आखिरकार किस एजेंडे के तहत कैमरे पर डीएम को अपना भौकाल दिखाने के लिए वहां राजनीति ड्रामा कर रहे थे? मंत्री ने जिस अंदाज में वहां डीएम के सामने अपना राजनीतिक इकबाल कैमरे पर दिखाने की कोशिश की उससे वह आवाम के निशाने पर आ गये और यह बहस छिड गई कि आखिर मंत्री ने आपदा के इस दौर में सडक पर उस समय तमाशा क्यों किया जब डीएम और पुलिस कप्तान मुख्यमंत्री के आदेश पर बचाव व राहत कार्य मिशन में आगे बढे हुये थे। वहीं कुख्यात गैंग से एक पुलिस अफसर की यारी के शोर ने उत्तराखण्ड के अन्दर एक बडा शोर मचा रखा है कि जब पुलिस अफसर बदमाशों के गैंग से यारी निभा रहा है तो यह तमाशा नहीं तो और क्या है? वहीं दो पुलिसकर्मियों का कुख्यात गैंग के साथ गठबंधन और उनकी गिरफ्तारी ने उत्तराखण्ड के अन्दर एक बडी हलचल मचा रखी है।
उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पिछले कुछ समय से कुछ ऐसे लोगों की रडार पर हैं जो उनकी बेदाग और स्वच्छ राजनीति का पैमाना देखकर डरे और सहमें हुये हैं और उसी के चलते वह उन्हें अपने निशाने पर लेने से बाज नहीं आ रहे हैं। अकसर जब मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी दिल्ली जाते हैं तो उत्तराखण्ड के अन्दर एक बडा भोपू सोशल मीडिया पर बजा दिया जाता है कि उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री अब बदलने वाले हैं। सोशल मीडिया पर चलने वाला यह भोपू किसके हाथों में रहता है यह हमेशा एक जांच का विषय बना रहता है लेकिन राजधानी के पुलिस कप्तान अजय सिंह ने कई बार उन लोगों के चेहरे से मुखौटा उतारा है जो मुख्यमंत्री बदलने का शोर सोशल मीडिया पर एक साजिश के तहत मचाने के लिए आगे बढे थे। मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी की स्वच्छ राजनीति से जहां देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह गदगद नजर आ रहे हैं तो वहीं राज्य की जनता भी मुख्यमंत्री की मुरीद है कि वह बेदाग होकर सरकार चला रहे हैं और उसी के चलते आज उत्तराखण्ड हर तरफ गुलजार होता हुआ नजर आ रहा है। हैरानी वाली बात है कि मुख्यमंत्री की दबंग शैली और पारदर्शिता के साथ सरकार चलाने का अंदाज भाजपा के ही कुछ राजनेताओं को रास नहीं आ रहा है और वह हमेशा पर्दे के पीछे रहकर मुख्यमंत्री को अपनी रडार पर लेने से पीछे नहीं हट रहे हैं तो यह सब देखकर अब उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी भी मुख्यमंत्री के सारथी बनकर उनके साथ आकर खडे हो गये हैं जिससे समझा जा सकता है कि वह मुख्यमंत्री को हर उस साजिशकर्ता से बचाने के मिशन पर हैं जो इन दिनों उत्तराखण्ड की वादियों में इधर उधर उछल कूद कर रहे हैं।

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