बादल फटने से तबाही

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आपदा का दर्द सैकडों परिवारों के सीने में उमड़ा
तबाही का मंजर आवाम को डरा गया
संवाददाता
देहरादून। प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि देर रात्रि से चमोली जनपद के नंदानगर घाट में चार स्थानों पर अलग अलग कंुतरा लगा फाली, कुंतरा लगा सरपाणी, सेरा, धुरमा में लगभग 33 मकान बादल फटने से भारी मात्रा में मलवा आने से पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गये है। उन्होंने कहा कि काफी सारे दुकानों मकानों व गौशालाओं को नुकसान हुआ है और 20 लोग घायल हुए है और 14 लापता है और 200 से ज्यादा लोग आपदा से प्रभावित हुए है और वहां पर सभी बचाव करने वाले दल पहंुच गये है और डीएम एसएसपी प्रातः काल ही वहां के लिए चल दिये थे। उन्होंने कहा कि जो घायल है उन्हें अस्पतालों में भर्ती कराया गया है और गंभीर रूप से घायल है उन्हें तत्काल एम्स ऋषिकेश के लिए शिफ्ट किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि अभी मौसम का इंतजार कर रहे थे और एक बच्चा भी है जिसके सिर पर चोट लगी है और कुल लोग जो घरों में फंसे लोगों को निकालने की कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, आईटीबीपी, पुलिस के लोग पर्याप्त संख्या में वहां पहंुच गये और विधायक गोपाल राम टम्टा व अन्य लोग बचाव कार्य में लगे है और डीएम एसएसपी से संपर्क में है और सभी को सुरक्षित स्थानों तक पहंुचा जा रहे और देहरादून के आसपास के क्षेत्रों में आपदा आई थी वहां बिजली, पानी व मार्ग अवरूद्ध हुए है उन्हें ठीक कराये जा रहे है। उन्होंने कहा कि जल्दी से जल्दी स्थिति को सामान्य किया जाएगा, जो शिविरों में है उनकी हर प्रकार से देखभाल की जा रही है। उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास है कि सभी को सुरक्षित पहंुचाया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सितम्बर माह में पूरे समय तक मानसून जब तक थम नहीं जाता है और सभी जिलों को सभी एजेसियों को अलर्ट मोड पर रहने के लिए कहा गया है और सभी को अलर्ट मोड पर रखा गया है और नदी नालों के किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थान पर ले जाने का काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मौसम विभाग से लगातार संपर्क किया जा रहा है।
नदी नालों के किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहंुचाये जा रहे है। उन्होंने कहा कि चार धाम की यात्रा सुचारू रूप से चल रही है और बद्रीनाथ, केदारनाथ, यात्रियों को सलाह दी है कि मौसम विभाग की चेतावनी, भविष्यवाणी व अनुमान के आधार पर यात्री नियोजन करें और जिससे उन्हें किसी भी प्रकार कोई परेशानी न हो और चार पांच दिन बाद ही यात्रा करें और पहले चरण में कई यात्री आये है और सुरक्षित अपने गंतव्य को गये है और यह दूसरे चरण की यात्रा है और हर एक यात्री की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि सभी के साथ समन्वय बनाकर कार्य करेंगें और जन प्रतिनिधियों के साथ समन्वय बनाकर काम करेंगें और सभी अधिकारी काम कर रहे है और आपदा किसी का विषय नहीं हम सभी का विषय है और आपदा का सामना करेंगें और इस चुनौती से आगे निकलेंगें और उन्होंने कहा कि राज्य के अधिकारी, एजेंसियों व उत्तराखंड के लोग टीम भावना के साथ कार्य कर रहे है। उन्होंने कहा कि आपदायें ग्लोमिंग वार्मिंग का असर है और वह निश्चित रूप से उसका असर यहां भी है और पूरी दुनिया पर असर हो रहा है और जहां पर कोई निर्माण कार्य नहीं हुआ है और जिसे अनियोजित विकास कहते है और इसके बाद भी ऐसा असर हो रहा है और संस्थानों जो इस दिशा में काम करते है और उनका भी सहयोग लिया जाएगा और विशेषज्ञों आदि से सर्वे व परीक्षण भी करायेंगें और आपदाओं को रोक नहीं सकते है और पूर्व में सूचना मिलने पर आपदाओं के असर को कम कर सकते है।
उन्होंने कहा कि हेलीकॉप्टर सुरक्षा के मानकों का कडाई से इस बार पालन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भारत सरकार के नागर विमानन मंत्रालयों के सभी अधिकारियों के साथ मंत्री राममोहन नायडू से भी विस्तृत रूप से वार्ता की गई है और एक एसओपी भी बनाई गई है और प्रदेश में दो एटीसी स्थापित किये गये है और एक सहस्त्रधारा में दूसरा सिरसी में स्थापित किया गया है यात्रियों की सुरक्षा के लिए किया गया है। उन्होंने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और जो भी संचालन होगा उसे ध्यान में रखा जाएगा।

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