कांग्रेस-भाजपा मंे पार्टी प्रत्याशियों को लेकर महामंथन
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में निकाय चुनाव का बिगुल बज चुका है और मेयर व नगर पालिका अध्यक्ष का चुनाव लडने के लिए तो भाजपा कांग्रेस में लम्बे समय से पार्टी के कई उम्मीदवार भागदौड कर रहे हैं कि इस बार उन्हें चुनाव मैदान में उतारा जाये। कांग्रेस व भाजपा में पार्टी उम्मीदवारों की लम्बीचौडी फौज को देखकर दिग्गज राजनेताओं को लम्बा मंथन करना पड रहा है कि आखिरकार इन चुनावों में वह ऐसे कौन से प्रत्याशी उतारे जिससे पार्टी का परचम लहरा सके। निकाय चुनाव को लेकर जिस तरह से चुनाव लडने की इच्छा रखने वाले छोटे-छोटे नेता भी गली मौहल्लों में अपने पक्ष मंे माहौल बनाने के लिए लगे हुये हैं भले ही उन्हें अभी पार्टी की ओर से कोई ग्रीन सिग्नल न मिला हो कि उन्हें ही चुनाव मैदान में उतारा जायेगा लेकिन इसके बावजूद भी वह घर-घर में अपना प्रचार करने की दिशा में आगे बढते हुए नजर आ रहे हैं।
राजधानी में ही भाजपा व कांग्रेस के अन्दर मेयर पद की उम्मीदवारी को लेकर काफी राजनेता अपनी-अपनी ताल ठोक रहे हैं लेकिन अभी भी उम्मीदवारों के नाम को लेकर एक रहस्य बना हुआ है कि दोनो राजनीतिक दल आखिरकार राजधानी में किसे अपना उम्मीदवार घोषित करेगी। भाजपा में इस बार मेयर पद का चुनाव लडने के लिए काफी राजनेताओं ने अपने पक्ष मे लॉबिंग शुरू कर रखी है और इसी बीच जिस तरह से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के मिलन की फोटो सामने आई हैं उससे यह चर्चाएं भी जन्म ले रही हैं कि कहीं त्रिवेंद्र सिंह रावत एक बार फिर सुनील उनियाल गामा को एक बार फिर मेयर पद का उम्मीदवार बनवाने के लिए उनकी मुख्यमंत्री के सामने पैरवी तो नहीं कर गये। वहीं मुख्यमंत्री और सुनील उनियाल गामा की सोशल मीडिया पर दिखाई दी फोटो को लेकर भी एक नई चर्चा ने जन्म ले लिया है कि सरकार व संगठन एक बार फिर सुनील उनियाल गामा को मेयर पद पर चुनाव लडाने के लिए अपनी हरी झंडी देंगे। हालांकि पार्टी के अन्दर कुछ और प्रबल दावेदार भी माने जा रहे हैं और यह चर्चा भी उठ रही है कि भाजपा के एक नेता के लिए दिल्ली से एक बडी पैरवी भी चल रही है कि उन्हें चुनाव मैदान मे उतारा जाये हालांकि अभी मेयर पद के उम्मीदवार को लेकर सरकार व संगठन ने अपने कोई पत्ते नहीं खोले हैं। वहीं कांग्रेस मे भी मेयर पद के उम्मीदवार को लेकर अभी कोई फैसला नहीं हो पाया है क्योंकि चुनाव लडने के लिए कुछ राजनेताओं ने भी अपने पक्ष मे भागदौड शुरू कर रखी है। वहीं पार्षदों का चुनाव लडने के लिए भाजपा व कांग्रेस के दर्जनों छोटे बडे नेता अपनी पैरवी के लिए इधर-उधर दौडभाग कर रहे हैं कि पार्टी उन्हें पार्षद के चुनाव के लिए उन्हें अपना उम्मीदवार बना दें। अभी निकाय चुनाव में प्रत्याशियों के चयन को लेकर दोनो ही राजनीतिक दलों में रसाकसी का दौर चल रहा है और आने वाले चंद दिनों में ही साफ होगा कि पार्टी किसे चुनाव मैदान मे उतारेगी।
उत्तराखण्ड में इस बार निकाय चुनाव बडा दिलचस्प माना जा रहा है क्यांेकि सरकार इस निकाय चुनाव में हर तरफ कमल खिलाने के मिशन में आगे बढी हुई है और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का संकल्प है कि सरकार के विकास पर ही आवाम को भाजपा के पक्ष मंे मतदान कराने के लिए पार्टी नेताओं को आगे बढना होगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कहना है कि सरकार जिस तरह से राज्य के अन्दर विकास का पहिया आगे बढा रही है उससे उन्हें पूरी उम्मीद है कि राज्य की जनता कांग्रेस को नकार कर भाजपा को जीत का ताज पहनायेगी। मुख्यमंत्री ने निकाय चुनाव में बडी जीत दर्ज करने के लिए पार्टी नेताओं के साथ महामंथन शुरू कर दिया है और उनका सबसे बडा विजन है कि चुनाव में ऐसे राजनेता को उतारा जाये जो आवाम के बीच अपनी बडी पैठ रखता हो। फिलहाल कांग्रेस और भाजपा के बीच होने वाला निकाय चुनाव रोचक मोड पर नजर आ रहा है और यह भी तय है कि जब दोनो दल अपने प्रत्याशियों के नामो की घोषणा करेंगे तो पार्टी के कुछ नेता विद्रोह का झंडा उठाकर निर्दलीय चुनाव मैदान मे उतरने की भी ताल ठोक सकते हैं इन्हीं सभी सम्भावनाओं को देखते हुए दोनो दलों के राजनेता अलर्ट दिखाई दे रहे हैं।

