धामी की चाणक्य राजनीति से चकरा रहे राजनेता

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। तीन साल से अधिक का कार्यकाल पूरा कर चुके मुख्यमंत्री आवाम की उम्मीदों पर शत-प्रतिशत खरा उतरने मे अपना झंडा बुलंद कर चुके हैं और यही कारण है कि आज राज्य की जनता मुख्यमंत्री को उसी भाव में देख रही है जैसे देश के लोग प्रधानमंत्री को स्वच्छ राजनीति करते हुए देख रहे हैं। मुख्यमंत्री आवाम के दिलों में इस कदर छा गये हैं कि उन्हें मुख्यमंत्री की राजनीति इतनी दिल अजीज लगने लगी है कि वह उन्हें 2०27 में होने वाले विधानसभा चुनाव मे भी जीत का अभी से ही आशीर्वाद देकर उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में उस दौर में देखने की अभी से चाहत पाल रहे हैं। हैरानी वाली बात है कि मुख्यमंत्री भाजपा हाईकमान की राजनीतिक पाठशाला में अव्वल आकर अपने आपको स्वच्छ राजनेता के रूप में अपनी पहचान बनाने का बडा डंका बजा चुके हैं लेकिन अभी भी भाजपा के अन्दर कुछ चेहरे ऐसे हैं जो राज्य में राजनीति करने के दौरान खिलखिला रहे मुख्यमंत्री के खिलाफ पर्दे के पीछे रहकर कुछ न कुछ ऐसी साजिश का तानाबाना बुनने मे जुटे रहते हैं जिससे कि मुख्यमंत्री के विकास की ओर बढते कदमों को रोका जा सके?
उत्तराखण्ड की कमान जिस दिन युवा राजनेता पुष्कर सिंह धामी को भाजपा हाईकमान ने सौंपी थी उसने उत्तराखण्ड के बडे-बडे भाजपा नेताओं की नींद उडा कर रख दी थी और उन्होंने यह ढोल पीटना शुरू किया था कि जो राजनेता कभी मंत्री पद पर भी आसीन नहीं रहा वह राज्य की कमान कैसे संभाल पायेगा? उस दौर में खूब शोर मचा था कि मुख्यमंत्री सत्ता चलाने मे मात्र कुछ महीनों के भीतर ही फेल साबित हो जायेंगे लेकिन ऐसा सोचने वालों को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपनी स्वच्छ राजनीति का जो आईना दिखाना शुरू किया उसने उन राजनेताओं का बीपी बढा दिया जो यह ख्वाब पाले हुए थे कि मुख्यमंत्री सत्ता चलाने मे सफलता की सीढी नहीं चढ पायेंगे? मुख्यमंत्री ने सत्ता चलाने के लिए चाणक्य नीति अपनाई और उसी पर वह आगे बढते चले गये तथा उन्होंने आवाम का दिल जीतने का जो सिलसिला शुरू किया उससे वह मात्र छह माह की सरकार चलाने के बाद एक बार फिर राज्य के अन्दर भाजपा की सरकार बनाने का ताज अपने सिर पर बंधवा गये थे। मुख्यमंत्री की चाणक्य नीति ने भाजपा के ही कुछ राजनेताओं को पिछले तीन साल से बेचैन कर रखा है क्योंकि वह जो ख्वाब वर्षों से पालते आ रहे थे वह अभी तक भी एक ख्वाब ही बना हुआ है।
उत्तराखण्ड मे अधिकांश पूर्व मुख्यमंत्रियों के खिलाफ साजिशों का खेल खेलना कोई नया खेल नहीं है क्योंकि यह खेल तो राज्य बनने के बाद से ही प्रदेश की जनता देखती आ रही है? साजिशों के चक्रव्यूह मे फंसकर कुछ पूर्व मुख्यमंत्रियों की कुर्सी चली गई थी और उसके बाद उन्हें कभी मुख्यमंत्री की कुर्सी नसीब नही हुई। भाजपा के अन्दर भी ऐसी साजिशें हुई जबकि भाजपा पार्टी को अनुशासन वाली पार्टी माना जाता है लेकिन वहां भी कुछ राजनेताओं ने मुख्यमंत्री की कुर्सी पर पहुंचने के लिए पार्टी के अन्दर ही रहकर साजिशों का चक्रव्यूह रचने मे कभी भी डर को अपने करीब नहीं आने दिया? वहीं उत्तराखण्ड मे सियासत की एक नई इबारत लिख रहे मुख्यमंत्री भले ही आवाम की पाठशाला मे अव्वल आ रहे हैं लेकिन पार्टी के ही कुछ अपनों की आंखो मे वह उस समय से ही चुभ रहे हैं जबसे भाजपा हाईकमान ने मुख्यमंत्री की कुर्सी पर आसीन किया था?
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पार्टी के ही काफी राजनेता पचा नहीं पा रहे हैं क्योंकि भाजपा हाईकमान ने पुष्कर ंिसह धामी को मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी देकर उन्हें उत्तराखण्ड को एक नया उत्तराखण्ड बनाने का विजन सौंप रखा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पार्टी और संगठन को साथ लेकर चलने मे ही हमेशा विश्वास रखते रहे हैं और उनके शासनकाल मे कभी भी सरकार व संगठन के बीच टकराव की कोई पटकथा नहीं लिखी गई। उत्तराखण्ड के अन्दर मुख्यमंत्री का बढ़ता रूतबा देखकर पार्टी के ही कुछ राजनेताओं को लम्बे समय से बेचैनी मे डाले हुये है क्योंकि उन्हें अपने राजनीतिक भविष्य की चिंताओं से हर दिन रूबरू होना पड रहा है? मुख्यमंत्री के कार्यकाल में भाजपा मंगलौर और बद्रीनाथ सीट पर हुआ उपचुनाव हारी तो पार्टी के ही कुछ नेताओं ने साजिशों का तानाबाना फिर बुना था और वह इस चाहत में लग गये थे कि किसी तरह से केदारनाथ उपचुनाव में भाजपा को हार मिल जाये तो मुख्यमंत्री की कुर्सी जरूर खतरे मे आ जायेगी? मुख्यमंत्री को इस बात का इल्म था कि केदारनाथ में होने वाले उपचुनाव को जीतना उनके लिए जरूरी है इसी के चलते उन्होंने केदारनाथ उपचुनाव जीतने के लिए एक बडी रणनीति के तहत चुनाव लडा और चुनाव जीतने के लिए उन्होंने जो बिसात बिछाई थी उसमें कांग्रेस फंस गई और उसके हाथों से केदारनाथ की सीट फिसल गई थी और वहां कमल खिलने से मुख्यमंत्री का राजनीतिक रूतबा शीर्ष पर पहुंच गया था। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखण्ड को जिस रास्ते पर ले जाने के लिए संकल्प लिया हुआ है वह रास्ता विकास के द्वार पर जाकर खडा हो रखा है और आज राज्य मे रेल से लेकर हवाई सेवाओं को जो एक नई उडान मिली है उससे राज्य की जनता से लेकर देशभर के लोगों में मुख्यमंत्री की कुशल राजनीति का उन्हें आईना दिख गया है और यही कारण है कि आज मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड की राजनीति के सरताज बन चुके हैं।

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