प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के अन्दर बाइस सालों से राज्य के कई जनपदों की जनता यह देखकर मन में आक्रोश की ज्वाला रखती थी कि लव और लैंड जिहाद पर सरकारें क्यों हमेशा घृतराष्ट्र बनकर बैठी रही? लव और लैंड जिहाद के खतरनाक खेल को नेस्तनाबूत करने की दिशा में कांग्रेस व भाजपा के अधिकांश पूर्व मुख्यमंत्रियों ने कोई पहल नहीं की जिसके चलते राज्य के अन्दर लव और लैंड जिहाद का जहर इस कदर फैलता चला गया कि राज्यवासियों के सामने एक बडा धर्मसंकट खडा हो गया था कि आखिरकार इस जिहाद के खिलाफ कौन उनकी रक्षा करने के लिए आगे आयेगा? उत्तराखण्ड की कमान जबसे युवा मुख्यमंत्री को मिली है तो उन्होंने लव और लैंड जिहाद पर वो प्रहार किया जिसकी राज्यवासियों ने कभी कल्पना भी नहीं की थी। मुख्यमंत्री ने अपने शासनकाल में पहाड से लेकर मैदान तक में हिंदुत्व की रक्षा करने का जो संकल्प लिया हुआ है और एक बडे विजन के तहत वह राज्य में हिंदुत्व की रक्षा के लिए हमेशा आगे खडे हुये दिखाई दे रहे हैं उससे देवभूमि के संत समाज की नजरों में मुख्यमंत्री वो राजनेता बन गये हैं जो हिंदुत्व का रक्षक बनकर आवाम के साथ खडे हुये हैं। चारधाम यात्रा, कावंड यात्रा और हरिद्वार में होने वाली धर्म पंचायतों को जिस शैली में सफलता के साथ पूरी कराने के लिए आगे बढे हैं उससे वह देशभर के संत समाज की नजरों में भी हिंदुत्व रक्षक बन गये हैं।
मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड के धार्मिक स्थलों को एक बडी पहचान दिलाने के लिए जिस विजन के साथ राज्य में रेल और हवाई यात्राओं का आगाज कराने मे सफलता की नई सीढी पर चढे हैं उससे यह साफ दिखाई दे रहा है कि वह देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के धर्माटन को नई दिशा में ले जाने के विजन पर काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी देवभूमि के स्वरूप को बचाये रखने के लिए बडे कदम उठा रहे हैं और उन्होंने राज्य के अन्दर हिंदुत्व की रक्षा करने का जो संकल्प लिया हुआ है उससे वह अपनी पहचान संत समाज मे भी हिंदु रक्षक के रूप में बना रहे हैं। मुख्यमंत्री ने अपने शासनकाल में लैंड, लव जिहाद पर तो अपना प्रहार किया ही हुआ है लेकिन उन्होंने पिछले कुछ समय से थूक जिहाद को लेकर भी अपना आक्रामक रूख दिखाना शुरू कर दिया है और वह हर मंच से साफ ऐलान कर रहे हैं कि राज्य केे अन्दर अगर किसी भी जिहादी ने कोई भी जिहाद करने का ख्वाब भी देखा तो उसे किसी भी कीमत पर बक्शा नहीं जायेगा। मुख्यमंत्री के हिंदुत्व एजेंडे से उन्हें राज्य की जनता व संत समाज भी धर्मरक्षक के रूप में देख रहा है और यही कारण है कि जब केदारनाथ में उपचुनाव हो रहा था तो मुख्यमंत्री ने वहंा की जनता के बीच हिंदुत्व को लेकर जो उमंग भरी थी उसी के चलते वहां कमल खिलखिला गया था।
उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड की तीन साल से कमान संभाल रहे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी धर्म की रक्षा करने के लिए हमेशा अगली पक्ति मे खडे दिखाई दे रहे हैं और उसी के चलते उत्तराखण्ड से लेकर देशभर के संत समाज से जुडे लोग मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को धर्मरक्षक मान रहे हैं। मुख्यमंत्री ने अपने कार्यकाल मे धर्म की रक्षा करने के लिए खुला संकल्प लिया हुआ है और वह संत समाज को लेकर उत्तराखण्ड के धार्मिक स्थलों की मर्यादा को कायम रखने के मिशन मे हमेशा आगे खडे हुये नजर आ रहे हैं। चारधाम यात्रा को हमेशा सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए उन्होंने बडे विजन के साथ काम किया और केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम मे हो रहे निर्माण कार्यों को जल्द से जल्द पूरा करने के लिए उन्होंने हमेशा एक बडे विजन के साथ वहां काम कर रही संस्थाओं का हौसला बढाया है। मुख्यमंत्री के कार्यकाल से चारधाम यात्रा मे श्रद्धालुओं का जिस तरह से हर बार सैलाब उमड़ रहा है उससे साफ समझा जा सकता है कि देश-विदेश के श्रद्धालुओं को मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी से एक बडी उम्मीद बनी हुई है कि वह श्रद्धालुओं के हमेशा रक्षक बनकर उनके साथ खडे होंगे और यही वजह है कि चारधाम यात्रा मे श्रद्धालुओं का अभी भी बडी संख्या मे उमडकर आना यह साबित कर रहा है कि देश-विदेश के श्रद्धालु भी मुख्यमंत्री को धर्मरक्षक मानकर उनमे अपनी आस्था रखे हुये हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी गढवाल व कुमांऊ मे धार्मिक स्थलों को एक बडे विजन के तहत भव्य रूप देने के एजेंडे पर काम कर रहे हैं और उसी के चलते गढवाल व कुमांऊ के मन्दिरों मे श्रद्धालुओं का सैलाब उमडऩा यह बता रहा है कि श्रद्धालुओं को उत्तराखण्ड मे आस्था के पथ पर आकर कितना सुकून मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने अपने अब तक के कार्यकाल में आस्था के पथ को जिस पवित्र आस्था से अपने आपको आगे बढाया है उसके चलते आज राज्य के अन्दर छोटे-बडे सभी धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं का आगमन दिखाई दे रहा है। उत्तराखण्ड देवो की भूमि है और इस देवभूमि मे हिन्दुत्व की रक्षक करने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी हमेशा आवाम के सामने धर्मरक्षक बनकर आगे खडे हुये हैं और उसी के चलते आवाम के मन मे उत्तराखण्ड के धार्मिक स्थलों मे आने की जो लम्बे अर्से से होड़ मची हुई है वह किसी से छिपी नहीं है। उत्तराखण्ड मे कावंड मेले को हमेशा एक एतिहासिक यात्रा बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने जो बडी रणनीति के तहत काम किया है और हर बार कांवडियों पर पुष्पवर्षा करने के लिए उन्होंने बडी पहल की है उसके चलते धर्मनगरी मे आने वाले कावंडियों ने भी मानना शुरू कर रखा है कि उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एक सच्चे धर्मरक्षक हैं।

