बिल्डर साहनी के प्रोजेक्ट को कब्जाने का था खेल?

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड की राजधानी के प्रसिद्ध बिल्डर ने कुछ समय पूर्व एक इमारत से कूदकर मौत को गले लगा लिया था और जब उसके पास से पुलिस को सुसाइड नोट मिला तो पुलिस ने जांच को सही दिशा मे आगे बढाते हुए गुप्ता बंधुओं को जेल की सलाखों के पीछे डालकर यह संदेश भी दे दिया था कि उत्तराखण्ड मे अपराध करने वाला चाहे कितना भी बडा व्यक्ति क्यों न हो वह कानून से नहीं बच पायेगा। गुप्ता बंधुओं को लेकर राजधानीवासियों मे काफी नाराजगी है और यह नाराजगी उस समय भी साफ झलक गई थी जब कुछ दिन पूर्व गुप्ता बंधु न्यायालय मे पेश होने आये थे तो कुछ लोगों ने उनके खिलाफ प्रदर्शन कर उन पर स्याही फेंककर मामले की जांच सीबीआई से कराने का भी खूब शोर मचाया था। गुप्ता बंधुओं के खिलाफ बिल्डर द्वारा पुलिस कप्तान को दी गई शिकायत का सच पता लगाने के लिए कप्तान ने मनीलॉडरिंग को लेकर ईडी को भी पत्र लिखा हुआ है वहीं पुलिस ने बिल्डर की कम्पनियों मे कई फर्मों द्वारा करोडो का ट्रांजेक्शन बिना अनुबंध के किये जाने पर पांच कम्पनियों व एक व्यक्ति को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। बिल्डर की कम्पनियों मे कई फर्मों द्वारा बिना अनुबंध के करोडो का ट्रांजेक्शन को लेकर यह आशंकायें भी पनप रही हैं कि कहीं गुप्ता बंधुओं ने बिल्डर के प्रोजेक्ट को विवादित बनाकर उस पर कब्जा करने का खेल खेलने के लिए कुछ फर्मों से करोडो का ट्रांजेक्शन तो नहीं कराया था?
उल्लेखनीय है कि कुछ समय पूर्व राजधानी के प्रसिद्ध बिल्डर सतेंद्र सिंह साहनी ने एक इमारत से कूदकर आत्महत्या कर ली थी। बिल्डर द्वारा आत्महत्या किये जाने का मामला राज्य के गलियारों मे गूंजने लगा और इसकी गूंज मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और डीजीपी अभिनव कुमार के कानो मे भी गंूजी तो उन्होंने तत्काल राजधानी के पुलिस कप्तान अजय सिंह को इस मामले का सच जानने के लिए उन्हें आगे किया। पुलिस कप्तान ने इस मामले की सच्चाई पता करने के लिए खुद मोर्चा संभाला और जैसे ही इस बात का पता चला कि अजय कुमार गुप्ता और अनिल कुमार गुप्ता के दिखाये भय से बिल्डर ने आत्महत्या की है तो राजपुर पुलिस ने गुप्ता बंधुओं को आत्महत्या के लिए प्रेरित करने के मामले मे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। वहीं पुलिस कप्तान के पास सतेंद्र साहनी ने जो शिकायती पत्र दस मई को अजय कुमार गुप्ता और अनिल कुमार गुप्ता के खिलाफ दिया था उसकी जांच कराने के बाद गुप्ता बंधुओं पर धारा 42० और 385 भी ऐड की गई।
पुलिस कप्तान अजय सिंह ने सतेंद्र सिंह साहनी द्वारा दिये गये पत्र मे कहा गया था कि उसने अनिल कुमार गुप्ता को सम्पर्क कर हाथ जोडकर कहा था कि वह साधारण व्यवसायी है वह उनके द्वारा दिया गया पैसा अविलम्ब वापस करने को तैयार है परंतु किसी प्रकार की मनीलॉडरिंग या अवैध कार्य में अथवा अवैध धन को अपनी कम्पनियों में निवेशित करेंगे। इस पर अनिल कुमार गुप्ता ने उसे धमकाया है। पुलिस कप्तान ने मनीलॉडरिंग की आशंका को लेकर ईडी को भी पत्र लिखा है। वहीं राजपुर थाने की पुलिस ने मृतक की कम्पनियों मे कई फर्मों द्वारा करोडो का ट्रांजेक्शन बिना अनुबंध के पांच कम्पनियों व एक व्यक्ति द्वारा किये जाने पर कारण बताओ नोटिस जारी किया है। सवाल खडे हो रहे हैं कि जब बिल्डर सतेंद्र सिंह साहनी के साथ कुछ फर्मों द्वारा अनुबंध किया नहीं गया था तो फिर उन्होंने कैसे मृतक की कम्पनियों में करोडो का ट्रांजेक्शन कराने का खेल खेला था? सवाल उठ रहा है कि कहीं बिना अनुबंध करने वाली फर्मों के सहारे गुप्ता बंधुओं ने बिल्डर स्वर्गीय सतेंद्र साहनी के प्रोजेक्ट को कानूनी विवाद मे फंसाकर उस पर कब्जा करने का खेल तो नहीं खेला था जिसके चलते सतेंद्र साहनी की कम्पनी मे करोडो का ट्रांजेक्शन बिना अनुबंध करने वाली फर्मों से डलवा दिया गया और अब पुलिस इसका सच पता करने के मिशन में जुटी हुई है।

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