मरीजों को जीवनदान देते स्वास्थ्य सचिव राजेश

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जहां यह संदेश दिया कि अगर किसी भी अधिकारी ने आम जन का कॉल नहीं उठाया तो उसके खिलाफ कार्यवाही की जायेगी और यह भी संदेश दिया कि अगर वह व्यस्त होने के कारण फोन न उठा सकें तो उसके बाद वह बैक कॉल करें। वहीं उत्तराखण्ड के स्वास्थ्य सचिव डा० आर राजेश कुमार ऐसे अधिकारी हैं जिनके फोन पर एक ही घंटी बजती है तो वह तत्काल उस फोन को रिसीव करते हैं और हर मरीज को जीवनदान देने के लिए वह आगे खडे हुये नजर आते हैं। वहीं शहर की शान माने जाने वाले 95 वर्षीय बाबू क्षेत्री का दून अस्पताल के ईएनटी में इलाज चल रहा है और जैसे ही स्वास्थ्य सचिव को इस बात की जानकारी मिली तो वह उनके इलाज के लिए काफी गंभीर नजर आये और उन्होंने अस्पताल के सीएमओ और ईएनटी डाक्टर को आदेशित किया कि क्षेत्री के इलाज में किसी भी तरह की कोई कमी न हो और अस्पताल प्रशासन ने जिस तरह से बाबू क्षेत्री की देखभाल का जिम्मा संभाल रखा है उसे देखते हुए साफ झलक रहा है कि पुष्कर सरकार के स्वास्थ्य सचिव परोपकारी रूप धारण करके किस तरह से हर मरीज का जीवन बचाने के मिशन में एक बडे एजेंडे के साथ काम कर रहे हैं।
उत्तराखण्ड का जन्म होने के बाद से ही सरकारी अस्पतालों में इलाज को लेकर आवाम के मन मे ंशंकाओं का दौर बना रहता था और यही कारण था कि सरकारी अस्पतालों में जाने से कतराता था। उत्तराखण्ड में स्वास्थ्य सचिवों के अन्दर ऐसा जज्बा देखने को कभी नहीं मिला था कि राज्य के स्वास्थ्य ढांचे इतना विशाल कर दिया जाये कि आम आदमी प्राईवेट अस्पताल में जाने के बजाए सरकारी अस्पतालों में जाने के बारे में सोच सके? उत्तराखण्ड में पुष्कर सिंह धामी ने जबसे सत्ता संभाली है तो उन्होंने राज्य के स्वास्थ्य महकमें को बडा रूप देने के लिए एक बडा प्लान तैयार किया और उन्होंने आईएएस डा० आर राजेश कुमार को अपना स्वास्थ्य सचिव बनाया और उन्हें मिशन सौंपा कि वह राज्य के स्वास्थ्य महकमें को पटरी पर लाये और मरीजों को बेहतर इलाज तो मिले ही साथ में उन्हें निशुल्क दवाईयां भी उपलब्ध कराई जायें। मुख्यमंत्री के विजन को धरातल पर उतारने के लिए स्वास्थ्य सचिव डा० आर राजेश कुमार ने जिस संकल्प के साथ अपने दायित्व को निभाने का जिम्मा संभाला है और वह राज्य के मैदान से लेकर पहाडी जिलों में जा-जाकर वहां की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को पंख लगाने के मिशन में आगे बढे हुये हैं वह देखते ही बनता है। स्वास्थ्य सचिव डा० आर राजेश कुमार सम्भवत: पहले ऐसे अफसर हैं जो चमोली में हेमकुंड साहब जाने के लिए लगभग 35 किलोमीटर पैदल खतरनाक रास्तों को पार करते हुए सरकारी अस्पताल पहुंचे थे। उत्तराखण्ड के सभी जिलों में जाकर जिस तरह से स्वास्थ्य सचिव ने स्वास्थ्य सेवाओं में एक नई अलख जगाने का जो काम शुरू कर रखा है वह हैरान करने जैसा ही दिखाई दे रहा है। स्वास्थ्य सचिव हर मरीज का जीवन बचाने के मिशन में हमेशा आगे खडे हुये दिखाई देते हैं और उनके अन्दर तिनकाभर भी अपने पद का गुमान देखने को नहीं मिलता क्योंकि उनके फोन पर जब भी किसी व्यक्ति का फोन जाता है तो उसे उठाने में वह तिनकाभर भी देर नहीं करते। शहर की शान माने जाने वाले 95 वर्षीय बाबू राम क्षेत्री का स्वास्थ्य कुछ दिन पूर्व खराब हुआ और वह दून अस्पताल के महिला ईएनटी वार्ड में भर्ती हुये तो स्वास्थ्य सचिव को बताया गया कि उनका यहां कोई नहीं है तो उन्होंने गम्भीरता दिखाते हुए तत्काल अस्पताल के सीएमओ और ईएनटी डाक्टर को आदेशित किया कि वह बाबू राम क्षेत्री का बेहतर इलाज करें और उन्हें किसी भी प्रकार की कोई दिक्कत न आ पाये। यही कारण है कि सीएमओ और डाक्टर लगातार बाबू क्षेत्री का इलाज गंभीरता से कर रहे हैं।

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