प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री राज्य में सिर्फ नकल माफियाओं के खिलाफ ही बडा ऑपेरशन चलाने में विश्वास रख रहे हैं और उनकी सोच है कि उत्तराखण्ड को नकल माफियाओं से मुक्त कराकर राज्य के युवाओं के भविष्य को सुरक्षित रखें। हाल ही में बेरोजगार छात्रों के आंदोलन के पीछे कुछ ऐसी शक्तियां मौजूद थी जिन्होंने पथराव की घटना को अंजाम देकर सरकार और युवाओं के बीच एक बडा टकराव खडा कर दिया जिसके चलते बेरोजगार युवाओं को भी जेल की सलाखों के पीछे जाना पड गया लेकिन राज्य के मुख्यमंत्री ने इस मामले की मजिस्ट्रेट जांच कराने के आदेश देकर यह पता लगाने का मिशन शुरू कर दिया है कि बेरोजगार युवकों की आड में वो कौन डरावने चेहरे थे जिन्होंने युवाओं को आंदोलन की राह में आक्रामक रूख से आगे करने का खेल खेल दिया? युवा राजनीति में बडा दिल रखने वाले राज्य के मुख्यमंत्री इस बात पर भी गंभीर और चिंतित नजर आ रहे हैं कि बेरोजगार युवाओं पर दर्ज मुकदमों को वह समाप्त करने की दिशा में भी जहां आगे बढेंगे वहीं वह बेरोजगार छात्रों को भी गले लगाकर उन्हें सही दिशा दिखाते हुए यह वचन देंगे कि युवाओं के भविष्य के साथ कभी कोई खिलवाड नहीं होने दिया जायेगा और सरकार और युवा उत्तराखण्ड को एक नई दिशा में ले जाकर राज्य को आदर्श राज्य बनाने की दिशा में आगे बढेंगे? मुख्यमंत्री जो कि खुद छात्र राजनीति में अगली पक्ति में थे वह बेरोजगार छात्रों के साथ खुले मन से एक टेबल पर मंथन करते हुए आने वाले समय में जरूर दिखाई देंगे और जो बेरोजगार युवा सलाखों के पीछे पहुंचे हैं उनके मुकदमें भी समाप्त कराने की दिशा में वह एक बडी पहल करेंगे ऐसी उम्मीद उन लोगों को है जो राज्य के मुख्यमंत्री को नजदीक से पहचानते हैं।
उत्तराखण्ड में पूर्व की कई सरकारों के कार्यकाल में देखने को मिलता रहा है कि जब भी छात्रों पर लाठीचार्ज जैसी घटना हुई है उससे छात्रों के मन में हमेशा सरकार को लेकर उनकी नाराजगी देखने को मिलती रही है इसलिए चंद सरकारें यही रणनीति बनाती थी कि ऐसा मंजर उनके सामने न आये कि उन्हें छात्रों के साथ सख्ती करनी पडे। उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के शासनकाल में जब चमोली के एक गांव के लोग सडक निर्माण की मांग को लेकर गैरसैंण विधानसभा कूच कर रहे थे तो उस समय आंदोलनकारियों पर हुये लाठीचार्ज से त्रिवेन्द्र सरकार की उत्तराखण्ड से लेकर दिल्ली तक में काफी किरकिरी हुई थी और यह बहस चली थी कि क्या अपनी मांग के लिए आवाज उठाना विद्रोह है कि उसके चलते उन्हें लाठियों का सामना करना पडा। उत्तराखण्ड में जब युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को राज्य की सत्ता मिली तो राज्यवासियों और युवाओं के मन में एक आशा की किरण जाग गई थी कि उनके बीच अब एक युवा मुख्यमंत्री हैं जो उनका दर्द समझेंगे क्योंिक बाइस सालों से उनका दर्द सुनने वाला कोई नजर नहीं आ रहा था। उत्तराखण्ड में भ्रष्टाचार से हुई भर्तियों का काला चि_ा भी राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ही खोला है जिससे राज्यवासियों और युवाओं के मन में उनके प्रति एक विश्वास बडा कि वह हर उस चेहरे को बेनकाब करेंगे जिन्होंने युवाओं के सपनों के साथ खिलवाड करते हुए नौकरियों को बेचने का खुला तांडव मचाया था। बेरोजगार युवाओं के सामने एक के बाद एक जब भ्रष्टाचार से हुई भर्तियों का सच सामने आने लगा तो उन्होंने सरकार से इन सभी भर्तियों की जांच सीबीआई से कराने के लिए अपनी मांग शांतिपूर्ण ढंग से रखी लेकिन सत्याग्रह कर रहे बेरोजगार छात्रों को गांधी पार्क में जिस तरह से बेवजह छेडा गया उसी दिन से युवाओं का क्रोध सरकार के समक्ष दिखाई देने लगा जो कि उत्तराखण्ड जैसे शांतप्रिय राज्य के लिए शुभ संकेत नहीं माना जा रहा। उत्तराखण्ड की काफी जनता इस बात पर चिंतित नजर आ रही है कि आखिरकार वो कौन चेहरे हैं जिन्होंने राज्य के युवा मुख्यमंत्री को युवाओं के ही खिलाफ राज्य में खडा कर दिया है? बेरोजगार युवाओं पर जिस तरह से मुकदमें कायम किये जा रहे हैं उसको लेकर राज्य के अन्दर भले ही आवाम सडकों पर अपनी नाराजगी न दिखा रहा हो लेकिन उसके मन में इस बात की पीडा है कि जो राज्य का भविष्य हैं उन पर आखिरकार एक के बाद एक मुकदमें कायम करना कहां तक जायज है? आवाम चाहता है कि राज्य के मुख्यमंत्री जो कि खुद छात्र राजनीति में बडा योगदान रखते थे उन्हें बडा दिल करके बेरोजगार छात्रों के बीच जाकर उन्हें विश्वास दिलाना चाहिए कि वह उनके साथ खडे हैं और जिन बेरोजगार युवाओं पर मुकदमें कायम किये गये हैं उसे भी सरकार वापस लेगी तो उससे राज्य के अन्दर युवा मुख्यमंत्री की दरियादिली को लेकर जितना बडा उत्साह राज्य की जनता और युवाओं के बीच देखने को मिल सकता है उसकी कल्पना शायद अभी सरकार नहीं कर पा रही है। उत्तराखण्ड के युवाओं में देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति अटूट विश्वास है और वह उनके शासनकाल में उत्तराखण्ड को भी आदर्श राज्य देखने का सपना मन में रखते हैं ऐसे में राज्य के अन्दर यह आवाज भी उठ रही है कि सरकार छात्रों को मुकदमों के बंधन में न बांधकर उनका दिल जीतकर उनके साथ नये राज्य की कल्पना को साकार करें तो उत्तराखण्ड जरूर आदर्श राज्य बनेगा। मुख्यमंत्री एक बडी सोच और बडे दिल वाले राजनेता हैं और वह यह कभी नहीं चाहेंगे कि बेरोजगार छात्रों पर मुकदमों का साया रहे इसलिए आने वाले दिनों में सरकार और बेरोजगार छात्र एक टेबल पर बैठकर सिर्फ नकल माफियाओं और नौकरी के सौदागरों के खिलाफ बडी लडाई लडने का संकल्प ले सकते हैं?