नशे में मेरा दोस्त चला गया

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री के मन में राज्य को नशामुक्त करने का जो विजन देखने को मिल रहा है उससे साफ झलक रहा है कि वह राज्य की युवा पीढी को नशे के दलदल में धसते देख कितने चिंतित हो रखे हैं और उन्होंने 2025 तक राज्य को नशामुक्त प्रदेश बनाने का जो संकल्प लिया हुआ है उसे वह एक दृढ़ शक्ति के साथ पूरा करने की दिशा में आये दिन आगे बढ रहे हैं। देहरादून जेल में नशामुक्त उत्तराखण्ड को लेकर राज्य में पहली बार किसी मुख्यमंत्री ने कार्यशाला का आयोजन किया और सबको एक संकल्प दिलाया कि उत्तराखण्ड को नशामुक्त करना सबका पहला धर्म है। मुख्यमंत्री अपने सम्बोधन में उस समय भावुक हो गये जब उन्होंने इस बात का खुलासा किया कि नशे के कारण उन्होंने अपना एक दोस्त खो दिया था जो शुरूआती दौर में पत्रकारिता में अपनी अच्छी पहचान बनाये हुये था लेकिन अचानक वह नशे के भ्रमजाल में फंस गया और उसने नशे को ही अपना जीवन मान लिया और उसके चलते वह अपनी मां, पत्नी व बच्चों को नशे के लिए खूब परेशान करता था और उन्होंने भी उसे नशा न करने की अपील की लेकिन वह नशे का गुलाम बन गया था जिसके चलते एक दिन ज्यादा नशा करने से उसे हार्ट अटैक आ गया और वह मौत की नींद हो गया इसलिए इस नशे से हर उत्तराखण्डवासी को बचाना सबका संकल्प होना चाहिए तभी उत्तराखण्ड नशामुक्त बन पायेगा।
आज देहरादून कारागार में उत्तराखण्ड को नशामुक्त बनाने के लिए एक बडी कार्यशाला का आयोजन किया गया जिसमें नशे के खिलाफ लडाई लडने वाले कुछ लोग और अधिकारी शामिल रहे और इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य यही था कि राज्य को 2025 तक उत्तराखण्ड को नशामुक्त बनाना है। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने सम्बोधन में कहा कि कारागार में यह कार्यशाला नशामुक्त उत्तराखण्ड बनाने के लिए जरूर आयोजित की गई है लेकिन इस कार्यशाला के जरिए उत्तराखण्ड को नशामुक्त करने के लिए सबको मन में एक बडी इच्छा के साथ संकल्प लेना पडेगा कि राज्य में एक भी भाई-बहन ऐसा न रहे जो नशा करे और वह चाहते हैं कि 2025 में राज्य का एक भी व्यक्ति इस नशे से हमेशा के लिए तौबा कर ले। उन्होंने कहा कि इस कठिन काम के बाद एक नया सवेरा आयेगा और कहा कि उन्हांेने नशे के खिलाफ लिये संकल्प को लेकर काफी लोगों से बात की जो नशा करते हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपना एक मित्र भी नशे के कारण खोया है जिसका उन्हें हमेशा बडा दुख रहता है इसलिए वह उत्तराखण्ड के हर भाई-बहन को एक ही संकल्प दिलाना चाहते हैं कि वह नशे से दूर रहें। उन्होंने कहा कि उनका एक मित्र था जो स्कूल समय में उनके साथ पढता था और वह उन्हें अकसर सलाह भी दिया गया था तथा पढाई के बाद वह पत्रकारिता में चला गया लेकिन इसी बीच वह नशे के दलदल में फंस गया और एक दिन उसके दोस्त की पत्नी का उन्हें फोन आया और उसने कहा कि उसका पति उसे, मां और बच्चों को काफी परेशान करता है और नशा मांगने के लिए वह उन्हें परेशान करता है। मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने दोस्त की पत्नी का फोन काटकर तुरंत दोस्त को फोन मिलाया और नशा न करने के लिए कहा तो वह कुछ देर शांत हो गया लेकिन वह नशा नहीं छोड पा रहा था और एक दिन ज्यादा नशा करने से उसे हार्ट अटैक आया और वह मर गया। उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि उनका कोई भी भाई-बहन नशा न करें क्योंकि उन्होंने इस नशे के चलते उन्होंने अपना एक दोस्त खोया था। मुख्यमंत्री ने बताया कि उनके एक परिचित का बेटा देहरादून में इंजीनियरिंग करने के लिए आया था और अचानक वह गलत संगत में जुडे छात्रांे का साथ कर बैठा और उसके चलते वह ड्रग एडिट हो गया जिसके चलते उसके माता-पिता उनके पास आये और रो-रोकर अपने बेटे के ड्रग एडिट होने की बात बताई जिस पर उन्होंने अपने बेटे की अधूरी पढाई के दौरान ही उसे इंजीनियरिंग की पढाई से हटा दिया क्योंकि वह अपने लक्ष्य से भटक कर नशे के जाल में फंस गया था। मुख्यमंत्री ने सबसे आह्वान किया कि नशे के बारे में भी अगर उनसे मजाक करे तो वह दृढता से उसे साफ कह दें कि वह कोई भी नशा न करता है और न करेगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में एक नया अध्याय खडा करना होगा क्योंकि उनके संकल्प लेने से या अफसरों के संकल्प लेने से उत्तराखण्ड नशामुक्त नहीं हो पायेगा इसलिए उत्तराखण्ड को नशामुक्त करने के लिए एक-एक व्यक्ति को इसमें अपनी आहूति देनी होगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि वे अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और सभी वर्गों से अपील करते है कि वो सब इस अभियान में आगे आये और इस अभियान को महाअभियान बना दें। मुख्यमंत्री ने कहा कि मनुष्य का जीवन 84 योनियों के बाद मिलता है और अगर हम अच्छे काम और अच्छे कर्म करेंगे तो हमें आत्मिक शांति होगी तथा दूसरा भी इससे सबक लेगा। उन्होंने कहा कि यह कारागार प्राश्चित करने का कारागार है और उसमें कैदियों को यह आत्म मंथन करना पडेगा कि उसने जो अपराध हुआ है उसका वह पश्चाताप करेंगे तो उससे उनका दूसरा जीवन भी सही राह पर रहेगा अगर उन्होंने अपने जीवन को सफल करना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि मनुष्य जो संकल्प कर ले और उस संकल्प में आगे बढे तो वह पूरा होगा। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम जिस तरह से इस जेल में आयोजित हुआ है वह चाहते हैं कि सभी कारागारों में भी नशामुक्ति कार्यक्रम चलाया जाये। उन्होंने कहा कि भारत के गृहमंत्री के दो दिन के चिंतन शिविर में भी नशे से हर व्यक्ति को मुक्ति दिलाने के लिए एक बडा हुआ था और उसमें भी यही संकल्प लिया गया था कि इस नशे से सबको आजादी दिलानी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि केन्द्र सरकार ने जो एक सौ तीस करोड लोगों के लिए जो बजट पास किया है वह भारत को एक नई दिशा में ले जाने का काम करेगा। उन्होंने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जिस तरह से उत्तराखण्ड को आदर्श बनाने के लिए राज्य को आगे बढाया है उससे 2025 तक उत्तराखण्ड जरूर नशामुक्त बनेगा क्योंकि उनके आर्शीवाद से उत्तराखण्ड आगे बढ रहा है।

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