देहरादून(प्रमुख संवाददाता)। पुलिस कप्तान के आदेश पर अपराधियों और गैर कानूनी काम करने वालों पर पुलिस का शिकंजा लगातार कसा जा रहा है इसी बीच पुलिस कप्तान को सूचना मिली कि उनके इलाके में फर्जी मार्कशीट व शैक्षणिक दस्तावेज बनाकर लोगों के साथ एक गैंग धोखा कर रहा है जिस पर पुलिस कप्तान ने एसओजी प्रभारी, शहर कोतवाल व धारा पुलिस चौकी प्रभारी के नेतृत्व में एक टीम का गठन किया और उन्हें इस गैंग को बेनकाब करने का जिम्मा सौंपा जिसके बाद एसओजी व कोतवाली पुलिस ने संयुक्त ऑपरेशन चलाकर गैंग के सरगना को दबोच लिया जिसके पास से फर्जी संस्थान राष्ट्रीय शिक्षा अनुसंधान परिषद के सीनियर सैकेण्डरी स्कूल, एग्जामिनेशन व सैकेण्डरी स्कूल एग्जामिनेशन फर्जी अंक तालिका और काफी सामान बरामद किया है पकडा गया गैंग लीडर उत्तर प्रदेश के गाजीपुर का रहने वाला है और इस गैंग के दो सदस्यों की पुलिस तलाश में जुटी है।
पुलिस कप्तान दलीप कुंवर ने मीडिया से रूबरू होते हुए बताया कि शहर कोतवाल विध्याभूषण नेगी और एसओजी प्रभारी मुकेश त्यागी को सूचना मिली कि एमडीडीए कॉम्पलैक्स में स्थित एक दुकान पर कुछ लोग फर्जी मार्कशीट व शैक्षणिक दस्तावेज बनाकर लोगों से वसूली कर रहे हैं इस पर कोतवाल, एसओजी प्रभारी व धारा चौकी प्रभारी विवेक राठी के नेतृत्व में एक संयुक्त टीम का गठन किया गया और इस गैंग को बेनकाब करने का मिशन सौंपा गया। उन्होंने बताया कि पुलिस टीम ने जब कॉम्पलैक्स में स्थित दुकान के आश्रय फॉउडेशन के ऑफिस में पहुंचे तो वहां एक व्यक्ति मौजूद मिला जिससे पूछताछ करने पर उसने अपना नाम राजकिशोर निवासी पित्थूवाला बताया मौके पर ऑफिस में टेबल में एक लैपटॉप, एक डेकस टॉप और एक प्रिंटर के साथ एक सीपीयू दिखाई दिया। कप्तान ने बताया कि लैपटॉप के पास कुछ राष्ट्रीय शिक्षा अनुसंधान परिषद के सीनियर सैकेंडरी स्कूल एग्जामिनेशन व सैकेंडरी स्कूल एग्जामिनेशन के प्रमाण पत्र रखे मिले जिसके बारे में सख्ती से पूछताछ की तो उसने बताया कि साहब वह अपने साथी सहेन्द्र पाल जो कि खतौली मुजफ्फरनगर का रहने वाला है के साथ मिलकर राष्ट्रीय शिक्षा अनुसंधान परिषद के नाम से फर्जी वैबसाइट बनाकर लोगों का रजिस्ट्रेशन कर उनको प्रमाण पत्र देते हैं जिसके एवज में वह छात्रों से पैसे लेते हैं। फर्जी प्रमाण पत्र से प्राप्त रूपयों में से वह व सहेन्द्र पाल पैसे बांट लेते थे। पुलिस कप्तान ने बताया कि पूछताछ में यह बात सामने आई कि ठग राजकिशोर राय के साथ अन्य अभियुक्त इंदु व सहेन्द्र पाल के साथ मिलकर एक नेशनल कांउसलिंग ऑफ रिसर्च इन एजुकेशन के नाम से एक ट्रस्ट बनाया गया जिसे पंजीकृत कराया गया साथ ही ट्रस्ट के नाम से एक वेबसाइट बनाई गई जिसमें दसवीं व बारवीं के विद्याथियों की परीक्षा कराने व उसके पश्चात उन्हें मार्कशीट प्रमाण पत्र उपलब्ध कराये जाने के सम्बन्ध में प्रचार प्रसार करते थे जिसमें राजकिशोर का मोबाइल नम्बर अंकित है। पुलिस कप्तान ने बताया कि पूछताछ में खुलासा हुआ कि अलग-अलग राज्यों से युवकों द्वारा रजिस्ट्रेशन कराया गया और गैंग के लीडर द्वारा कुछ विद्यार्थियों को लिंक भेजकर फर्जी परीक्षायें भी कराई जाती थी और उन्हें फर्जी संस्थान की मार्कशीट व प्रमाण पत्र उपलब्ध कराये जाते थे तथा कुछ छात्रों को बिना परीक्षा के भी बैक डेट की भी मार्कशीट व प्रमाण पत्र छह से आठ हजार रूपये में दिये जाते थे। उन्होंने बताया कि इस कार्यवाही में सात पासबुक, पांच चैक बुक के अलावा दो पैनकार्ड, सोलह प्रिंटिंग सीट और काफी सामान बरामद किया है।