सत्ता-विश्वास और शक में हुआ था तख्ता पलट?

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में सत्ता पर काबिज होने वाले कुछ पूर्व मुख्यमंत्री अपनी ही पार्टी के काफी राजनेताओं की साजिशों के शिकार होते रहे क्योंकि साजिश रचने वाले राजनेताओं के मन में हमेशा सबसे बडे पद पर आसीन होने की लालसा देखने को मिलती रही और यही कारण है कि उत्तराखण्ड में जब भी किसी मुख्यमंत्री ने सत्ता की कमान संभाली तो उन्हें गद्दी से हटाने के लिए प्रपंच रचने शुरू हो ह्लद्मह्म्ह्य स्नद्मह्य\ उत्तराखण्ड का एक सच यह भी है कि सत्ता पर काबिज हुये एक पूर्व मुख्यमंत्री के सबसे बडे विश्वासपात्र व्यक्ति ने उन्हें राज्य के अन्दर अभेद बना रखा था और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अपने विश्वासपात्र व्यक्ति के बताये रास्ते पर ही सत्ता चलाने के लिए आगे आये और उनकी सत्ता पर कभी कोई आंच नहीं आई लेकिन कुछ अफसरों की टोली जो पूर्व मुख्यमंत्री के विश्वासपात्र व्यक्ति को हमेशा अपनी रडार पर लेकर यह चक्रव्यूह रचती थी कि कैसे वह पूर्व मुख्यमंत्री के विश्वासपात्र को उनसे अलग कर दें और इस टोली ने ऐसा पासा फेंका कि जो पूर्व मुख्यमंत्री अपने विश्वासपात्र पर अभेद भरोसा कर सत्ता में बने हुये थे उन्होंने जब अपने विश्वासपात्र व्यक्ति को ही शक की नजर से देखकर उन्हे अपने से दूर करने का जो मन बनाया उसी दिन से उनकी सत्ता पर ग्रहण लगता चला गया और सत्ता पर अभेद होकर राज करने वाले पूर्व मुख्यमंत्री को इस बात की भनक तक भी नहीं लगी कि कब उनके खिलाफ एक बडी साजिश रच दी गई और उनका तख्ता पलटकर उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी से महरूम कर दिया गया था? इस तख्ता पलट की दास्ता आज भी राज्य के गलियारों में जब गूंजती हैं तो यह बात उठती है कि राजनीति में सत्ता, विश्वास और छल के राज को जो पहचान जाता है वह साजिशकर्ताओं के चक्रव्यूह में कभी नहीं फंस सकता?
उत्तराखण्ड का जन्म होने के बाद से ही राज्य में जब-जब कांग्रेस व भाजपा ने अपने राजनेताओं को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर आसीन किया तो उसके बाद से ही उन्हें राजगद्दी से हटाने का चक्रव्यूह उनके लोग ही बुनते रहे और उसी के चलते उत्तराखण्ड से लेकर दिल्ली तक में राज्य के कई पूर्व मुख्यमंत्रियों को हटाने के लिए उनकी पार्टी के लोगों ने जो राजनीतिक खेल खेला वह आज भी राज्य के अन्दर चर्चा का विषय जरूर बना रहता है? उत्तराखण्ड का एक सच यह भी है कि राज्य के एक पूर्व मुख्यमंत्री ने जब सत्ता संभाली थी तो उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी पर अभेद बनाये रखने के लिए उनके एक विश्वासपात्र व्यक्ति ने उन्हें सत्ता चलाने की ए-बी-सी-डी समझाई और राज्य में किस तरह से सत्ता चलानी है उसका ज्ञान भी वह अपने मुख्यमंत्री को देते रहे यही कारण रहा कि पूर्व मुख्यमंत्री के खिलाफ कोई भी साजिशें रचने का खेल नहीं खेल पाता था क्योंकि पार्टी के अधिकांश राजनेताओं को इस बात का इल्म रहता था कि अगर उन्होंने कोई साजिश रचने के लिए तानाबाना बुना तो पूर्व मुख्यमंत्री का विश्वासपात्र उनका सारा राज बेनकाब कर देगा\ कुल मिलाकर कहा जाये तो पूर्व मुख्यमंत्री को हर साजिशों से चौबीस घंटे बचाने के लिए उनके विश्वासपात्र अभेद होकर पूर्व मुख्यमंत्री के लिए सुरक्षा कवच तैयार करते थे जिसके चलते राज्य के काफी अफसरों की टोली के मन में एक ही बात उभरती थी कि किस तरह से पूर्व मुख्यमंत्री को उनके विश्वासपात्र से दूर किया जाये? पूर्व मुख्यमंत्री अपनी सत्ता को निर्भीक होकर चलाते रहे लेकिन उनके कानों में कुछ अफसरों की टोली ने उनके विश्वासपात्र को लेकर जो साजिशों का जहर उगला था वह अचानक अपना रंग दिखा गया था और उसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री ने जब अपने विश्वासपात्र को अपने से दूर करने के लिए अपने कदम आगे बढाये तो पार्टी के कुछ राजनेताओं और कुछ अफसरों की टोली के मन में एक बडी आशा पनप गई थी कि अब वह अपने मिशन में कामयाब हो जायेंगे? पूर्व मुख्यमंत्री को इस बात का भ्रम हो गया था कि वह राज्य में पारदर्शिता के साथ सरकार चला रहे हैं और उनकी उत्तराखण्ड की जनता के साथ दिल्ली में राजनेताओं के बीच भी अच्छी छवि है इसलिए उनकी सत्ता को कोई नहीं हिला पायेगा? पूर्व मुख्यमंत्री का यह भ्रम उन्हें सत्ता के पायदान से नीचे ले जाने लगा और एक दिन ऐसा आया कि पूर्व मुख्यमंत्री को यह भनक तक नहीं लगी कि उनके खिलाफ एक बडी साजिश रच दी गई है और उसके बाद अचानक जब उनका तख्ता पलट हुआ तो उन्हें इस बात का अहसास हो गया था कि अगर वह अपने विश्वास पात्र पर शक करने के बजाए उसे अपने साथ रखे होते तो उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी से हटना न पडता? कुल मिलाकर कहा जाये तो उत्तराखण्ड की सियासत मुठ्ठी में रेत के समान ही है और मुठ्ठी बंद होने के बाद रेत कब हाथ से फिसल जाये किसी को पता ही नहीं चल पाता? उत्तराखण्ड की सियासत में जिस तरह से अकसर सत्ता-विश्वास और छल का गठबंधन देखने को मिलता रहा है वह ंिचता का विषय ही कहा जा सकता है?

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