सट्टा, जुआ, नशा, वैश्यावृत्ति, अवैध खनन रोकने में कप्तान नाकाम?

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शहर में छह लॉज में चल रहा हुक्का कब बंद कराओगे हुजूर!
तड़के तक ‘पॉवरफुल लॉज’ में चलती हैं पार्टियां
एक लॉज में छापे के बाद युवक-युवतियों का पुलिस ने बनाया ‘तमाशा’
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। हैरानी वाली बात है कि जहां समूची सरकार, शासन-प्रशासन मौजूद है वहां अगर सट्टे, जुए के अड्डे एक बडा सिंडिकेट और सफेदपोश चला रहा हो तो उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि राजधानी में पुलिस के कुछ दरोगा और गैर कानूनी धंधे करने वालों के बीच किस तरह से गठबंधन हो रखा है? सरकार ने नशामुक्त उत्तराखण्ड का संकल्प ले रखा है लेकिन राजधानी में सिर्फ छुटभैयों को नशें की तस्करी में पकडकर पुलिस के कुछ दरोगा ऐसे दमभर रहे हों मानो उन्हांेने नशा तस्करों के खिलाफ कितना बडा ऑपरेशन शुरू कर रखा हो? राजधानी में अब यह चर्चाएं जन्म ले रही हैं कि सट्टा, जुआ, नशा, कथित वैश्यावृत्ति और अवैध खनन रोकने में जनपद के पुलिस कप्तान नाकाम साबित हो रहे हैं जिससे सरकार को भी आवाम कटघरे में खडा कर रही है? हैरानी वाली बात है कि एक आईपीएस और कुछ पॉवरफुल लोगों के इशारे पर पुलिस के कुछ दरोगा शहर के कुछ लॉज और कैफों को अपने निशाने पर लिये हुये हैं जहां वह उन्हें अपनी वर्दी का खुलकर खौफ दिखाने के मिशन में आगे बढे हुये हैं? गजब की बात तो यह है कि शहर के आधा दर्जन पॉवरफुल लॉज में न तो पुलिस हाकिम आज तक वहां चल रही पार्टियों का सच जानने के लिए अपनी पुलिस को वहां भेजने का साहस दिखा पाये और न ही वह इन लॉज की ताकत को देखते हुए उनके यहां जाने का कोई खाका बनाने के लिए आगे आये? शहर में हमेशा लम्बे समय से एक ही सवाल खडा होता आ रहा है कि शहर के आधा दर्जन लॉज जो सुबह छह बजे तक चलने वाली पार्टिंयों में हुक्का खुलकर चलता है और वहां शराब की पार्टिंयां होती है क्योंकि वहां बार भी है लेकिन समय के बाद वह आखिर किसके इशारे पर सुबह तक चलते हैं इसका कभी सच जानने के लिए पुलिस कप्तान आगे आयेंगे यह एक बडा सवाल बना हुआ है? बीती रात शहर के एक लॉज में पुलिस टीम ने हुक्का पी रहे काफी युवक-युवतियों को पकडा और उनसे जुर्माना भी वसूला लेकिन गजब की बात तो यह है कि लॉज में पकडे गये युवक, युवतियों के साथ कुछ नाबालिग युवतियों को जिस तरह से थाने में लाकर उनका तमाशा बनाकर उनकी फोटो खींची गई और फोटो को बलर कर पुलिस ग्रुप में पोस्ट किया गया उससे सवाल खडे हो रहे हैं कि क्या हुक्के में नशा परोसा जा रहा था जिसके चलते उसके मालिक और नौकरों को गिरफ्तार दिखाकर पुलिस अपनी पीठ थपथपाने के लिए आगे आ गई?
राजधानी के पुलिस कप्तान ने पदभार संभालने के बाद तो दावा किया था कि गैर कानूनी धंधे करने वालों पर बडा शिंकजा कसा जायेगा और गैंगेस्टरों की सम्पत्तियों को सील किया जायेगा और उनकी हिस्ट्रीशीट भी खोली जायेगी। हैरानी वाली बात है कि जनपद के पुलिस कप्तान को राजधानी में क्रिकेट व मटका सट्टा करने वालों की पहचान है और कौन लोग जुए के अड्डे चला रहे हैं यह भी उनके कानों में कई बार कुछ लोग बता चुके हैं लेकिन पुलिस कप्तान ने इन गैर कानूनी धंधे को करने वालों किसी भी सफेदपोश व क्रिकेट सट्टेबाजों के सिंडिकेट पर नकेल लगाने के लिए एक कदम भी आगे बढाया हो ऐसा देखने को नहीं मिला? आश्चर्यचकित बात यह है कि पुलिस के कुछ दरोगा या कर्मचारी क्रिकेट सट्टा और जुए के अड्डे चलाने वालों के साथ गोपनीय गठबंधन कर उनके धंधों को अपना खुला संरक्षण दे रहे हैं इनमें से कुछ के नाम पुलिस हाकिम को भी मालूम हैं लेकिन सबकुछ जानने के बावजूद उनकी रहस्यमय चुप्पी कई सवालों को जन्म देती आ रही है? राजधानी के अन्दर जुआ, सट्टा, कथित वैश्यावृत्ति, नशा, अवैध खनन रोकने में पुलिस कप्तान अभी तक तो सफल नहीं हो पाये हैं और यही कारण है कि गैर कानूनी धंधे करने वालों के हौसले इतने बुलंद हो रखे हैं कि उन्हें खाकी का कोई डर दिखाई नहीं दे रहा है? जुआ, सट्टा, नशा, अवैध खनन पर पुलिस हाकिम की चुप्पी कई सवालों को जन्म दे रही है और अब तो उच्च न्यायालय ने भी नदियों में जेसीबी मशीनों से हो रही खुदाई को लेकर अपनी बडी नाराजगी प्रकट करते हुए जेसीबी को सील करने के आदेश दिये हैं ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या जनपद के पुलिस कप्तान राजधानी के कई इलाकों की नदियांे में जेसीबी मशीनों से हो रहे अवैध खनन पर नकेल लगाने के लिए आगे आयेंगे? बीती रात बंसत विहार इलाके में एक लॉज में पुलिस ने छापा मारकर वहां से युवक-युवतियों को पकडा और उनका पुलिस एक्ट 81 में चालान भी किया गया लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात है कि आखिर युवक युवतियों को थाने में किस जुर्म में पुलिस ने वहां लाकर उनका तमाशा बनाते हुए उनकी फोटो खींची और उसे बलर कर अपने पुलिस ग्रुप में पोस्ट कर दी। अचम्बे वाली बात है कि इसमें कुछ नाबालिग युवतियां भी थी उन्हें आखिर कैसे थाने लाकर उनकी फोटो खींची गई इस बात का जवाब क्या पुलिस मुख्यालय राजधानी के पुलिस कप्तान से मांगेंगे? बहस शुरू हो गई है कि अगर पुलिस कप्तान लॉज मंे नियमों के विरूद्व चलने वाली देर रात पार्टिंयों को रोकने व वहां परोसे जा रहे हुक्के पर नकेल लगाने का साहस दिखा रहे हैं तो उन्हें शहर के आधा दर्जन पॉवरफुल लॉज में सरेआम सुबह छह बजे तक चल रही पार्टियां व उसमें परोसा जा रहा हुक्का क्यों नजर नहीं आता यह उनकी कार्यशैली पर सवाल खडे कर रहा है? सवाल यह है कि छोटे मोटे लॉज में छापे मारकर पुलिस क्या वहां आने वाले युवक-युवतियों को यह संदेश दे रही है कि अगर ऐसे लॉज मंे उन्होंने दुबारा कदम रखा तो उन्हें हवालात की सैर भी करनी पड जायेगी? वहीं शहर में आधा दर्जन पॉवरफुल लॉज में जिस दिन पुलिस कप्तान ने छापे डलवाने का साहस दिखाया तो उस दिन यह साफ हो जायेगा कि पुलिस कप्तान अपने एक्शन में कोई भेदभाव नहीं रखते?

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