राजधानी में लॉज और कैफे चलाना महाभारत!
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री और उनकी किचन टीम तो राज्य को आदर्श राज्य बनाने और सबके व्यापार को पंख लगाने के लिए उनके साथ खडी हुई दिखाई दे रही है जिससे व्यापारियों के मन में कोरोना काल के दौरान डूब चुके व्यापार को लेकर अब कोई रंज दिखाई नहीं दे रहा था लेकिन राजधानी में उत्तराखण्ड के एक आईपीएस के इशारे पर काफी लॉज और कैफे चलाना उनके संचालकों के लिए एक बडी महाभारत बन चुका है? चर्चाएं तो यहां तक हैं कि राजधानी पुलिस के कुछ दरोगा एक आईपीएस के इशारे पर काफी लॉज और कैफों पर चलने वाले शराब बार पर अपनी रडार लगाकर उन्हें पुलिसिया डर दिखाने के मिशन में आगे बढे हुये हैं जिससे काफी व्यापारियों को अपना व्यापार चलाना और परिवार को पालने का इसलिए भी बडा संकट आकर खडा हो गया है कि उन्होंने अपने व्यापार को चलाने के लिए लोगों से और बैंकों से कर्ज ले रखा है जिसकी किश्ते भी वह इसलिए नहीं दे पा रहे क्योंकि उनके लॉज व कैफे में शराब बार पर एक आईपीएस के इशारे पर कुछ दरोगा ब्रेक लगवा रहे हैं जिससे सवाल खडा हो रहा है कि आखिरकार अगर एक आईपीएस के इशारे पर ही सिस्टम को नाचना है तो फिर अधिकांश बार व कैफे संचालक कैसे अपने व्यापार को आगे बढा पायेंगे?
राजधानी के अन्दर काफी लॉज और कैफे मौजूद हैं और शराब बार का लाईसेंस लेने के लिए वैसे ही व्यापारियों के सामने उसका लाईसेंस हासिल करना एक टेडी खीर बना रहता है और अगर उन्हें बार का लाईसेंस मिल भी जाये तो पुलिस के कुछ दरोगाओं की चंद लॉज व कैफों पर गिद्द दृष्टि से वह चल नहीं पाते क्योंकि जब शाम ढलते ही अगर कुछ दरोगा चंद लॉज व कैफे में जांच पडताल करने के लिए पहुंच जायेंगे तो फिर वहां आम इंसान जाना भी पसंद नहीं करता क्योंकि कोई भी परिवार व युवा पीढी पुलिस के साय से अपने आपको दूर रखना चाहती है यही कारण है कि शहर में कुछ लॉज व कैफे चलाने वालों ने करोडो रूपये खर्च करके अपने लॉज व कैफे को आगे बढाने का मिशन तो किया लेकिन उनके मिशन पर कुछ दरोगाओं ने ही अकसर ग्रहण लगा दिया जिससे उनके ठिकाने का नाम सुनते ही परिवार और युवा पीढी वहां जाने से कतराने लगे? एक लॉज के मालिक ने बताया कि शराब बार के लिए वह हर साल लाखों रूपये का राजस्व सरकार को देते हैं और वह नियम के अनुसार अपने शराब बार चलाते हैं लेकिन उसके बावजूद भी पुलिस के कुछ दरोगा उन्हें तंग करने का कोई मौका नहीं छोडते जिसके चलते उनके लॉज में आने वाले परिवारों व युवा पीढी की संख्या न के बराबर हो गई और उनके सामने इतना बडा संकट आकर खडा हो गया कि वह करोडो रूपये के लिए कर्ज को कैसे चुकायेंगे? हैरानी वाली बात है कि राजधानी के अन्दर चंद लॉज संचालकों ने यहां तक आरोप लगाया कि एक आईपीएस के इशारे पर कुछ लॉज व कैफों मंे पुलिस के कुछ दरोगा आ धमकते हैं और उस कारण उनका व्यापार शून्य जैसा हो रहा है और वह अपने लॉज का किराया तक नहीं चुका पा रहे? सवाल यह है कि आखिरकार उत्तराखण्ड का वह कौन आईपीएस अफसर है जिसके इशारे पर पुलिस के कुछ दरोगा कुछ लॉज व कैफों संचालकों के सामने उनकेे व्यापार को चलाने में बडी बाधा उत्पन्न कर रहे हैं और पुलिस के कुछ अधिकारी इस मामले में सम्भवतः चुप्पी साधे बैठे हैं? चंद लॉज के संचालकों का खुला आरोप है कि एक पॉवरफुल इंसान के लॉज पर पुलिस के किसी भी अधिकारी, दरोगा व आबकारी महकमें के किसी अफसर ने वहां जाने का साहस नहीं दिखाया जबकि उस लॉज में नियमों की धज्जियां उडाते हुए देर रात तक शराब की पार्टियां और डांस के साथ हुक्का भी खुलकर परोसा जाता है? एक लॉज या कैफे का संचालक अगर अपने यहां किसी ग्राहक को फलेवर वाला हुक्का परोसने के लिए आगे आता है तो उसके लॉज या कैफे पर पुलिस के कुछ दरोगा ऐसे आये दिन छापे मारते हैं मानो वहां हुक्के में नशा परोसने का तांडव चल रहा हो? हालांकि एक पॉवरफुल इंसान के लॉज में आज तक न तो किसी पुलिस अफसर और न ही किसी दरोगा ने यह साहस दिखाया कि वह एक बार तो वहां जाकर यह देख ही ले कि वहां ग्राहकों को क्या-क्या परोसा जाता है और वहां देर रात तक कितने बजे तक पार्टिंया आयोजित होती है? अगर एक आईपीएस के इशारे पर कुछ लॉज व कैफे चल रहे हैं तो उससे सवाल खडे होने तय हैं कि आखिरकार उन व्यापारियों का क्या कसूर है जिनका न तो कोई आईपीएस अफसर जानने वाला है और न ही कोई पॉवरफुल व्यक्ति उनके व्यापार को बचाये रखने के लिए उनके साथ खडा हो रहा है?