प्रमुख संवाददाता
देहरादून। खाकी जब दबे कूचलों पर ही अपना डंडा और उन्हें अपनी वर्दी का रौब गालिब करने के लिए आगे आये तो समझ लेना चाहिए कि किस तरह से अवैध धंधे करने वालों को पुलिस के कुछ लोग अपनी पनाह में रखकर उन्हें गुनाह करने के लिए अपना साथ देने के मिशन में लगे हुये हैं? हैरानी वाली बात है कि पिछले लम्बे समय से व्यापारियों और युवाओं में सट्टे का चस्का उनके अन्दर कैंसर की तरह तेजी के साथ फैलता जा रहा है जिसका इलाज शायद न तो व्यापारी के पास है और न ही युवाओं के? सभी इस सट्टे के खेल में रातो-रात करोडपति बनने के सपने देखकर अपना सबकुछ बर्बाद कर रहे हैं और कुछ मौत को गले लगा चुके हैं तो कुछ अपना परिवार छोडकर गुमनाम जिंदगी जी रहे हैं? राजधानी के हनुमान चौक में एक बडा व्यापारी लम्बे अर्से से क्रिकेट का ‘छोटा दाऊदÓ माना जाता है लेकिन गजब की बात यह है कि न तो छोटे दाऊद और न ही उसके इशारे पर सट्टे का बडा धंधा करने वाले एक परिवार पर एसटीएफ, एसओजी व पुलिस उनके गिरेबान तक अपना हाथ नहीं पहुंचाना चाहती क्योंकि कुछ दरोगाओं को छोटा दाऊद और उसके साथ पल रहे बडे सट्टेबाज दौलत की रौशनी दिखाकर उन्हें ऐसा घृतराष्ट्र बना चुके हैं जो सबकुछ जानते हुए भी कुछ देखना नहीं चाहते?
हैरानी वाली बात है कि पुलिस कप्तान ने संकल्प लिया था कि वह अपने कार्यकाल में सट्टेबाजों, जुआरियों, अपराधियों और तस्करी करने वालों को किसी भी कीमत पर नहीं बक्शेंगे और यहां तक दम भरा था कि गुनाह से दौलत का किला खडा करने वालों की सम्पत्तियों को 14ए में सीज किया जायेगा और उन पर गैंगेस्टर के साथ उनकी हिस्ट्रीशीट भी खोली जायेगी। मजे की बात तो यह है कि पुलिस के कुछ दरोगा सिर्फ चंद छुटभैयों को सट्टे, जुए और खुखरी में गिरफ्तार दिखाकर ऐसे बयानवीर बन रहे हैं मानो उन्होंने कितने बडे अपराधियों को दबोच लिया हो। राजधानी के अन्दर क्रिकेट के सट्टेबाजों का इतना बडा सिंडिकेट बना हुआ है जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती और तो और इस सिंडिकेट को पर्दे के पीछे से चलाने के लिए हनुमान चौक का एक बडा व्यापारी लम्बे समय से ‘छोटा दाऊद’ बना हुआ है जो अपने आसपास के एक ही परिवार के कुछ बडे सट्टेबाजों से गठबंधन किये हुये है और उनका सट्टे का काला कारोबार इतना उफान पर है कि उसके मकडजाल में काफी व्यापारी और युवा पीढी फसती चली जा रही है और सट्टे का चस्का उनके अन्दर एक कैंसर का रूप ले चुका है लेकिन इसके बावजूद भी वह इस कैंसर के इलाज की ओर ध्यान नहीं दे रहे जिसके चलते हनुमान चौक में शालीनता के साथ अपनी दुकान पर बैठा बडा व्यापारी छोटा दाऊद बनकर अपने साथ के चंद सट्टेबाजों के साथ क्रिकेट के होने वाले सभी मैचों पर बडा सट्टा लगाने का खेल खेल रहा है। एक ऑपरेशन टीम का पुलिसकर्मी इन सट्टेबाजों के साथ पार्टियां मनाता है और तो और वह उनका इतना बडा हमराज है कि वह सट्टेबाजों को अपनी ऑपरेशन टीम द्वारा की जाने वाली हर गोपनीय कार्यवाही की सूचना बडे नाटकीय ढंग से लीक करता है? सवाल यह है कि आखिरकार क्या ऐसे बडे सट्टेबाजों के मकडजाल में फंसकर कुछ व्यापारी और युवा अपना सबकुछ हारने के लिए आगे आते रहेंगे जिसके चलते एक बडा कर्ज होने पर उन्हें या तो मौत को चुनना पडेगा या फिर वह गुमनाम होकर अपने परिवार को छोटकर कहीं लापता हो जायेंगे? क्रिकेट के सट्टे के इस मकडजाल को भेदने के लिए कब पुलिस कप्तान अपना हंटर चलायेंगे इस पर अब सबकी नजरें लगी हुई है?