ईमानदार पुष्कर राज में आखिर किससे डर रहा पुलिस कप्तान?

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। गजब की बात है कि उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वच्छता के साथ राज्य को चलाने के विजन पर आगे बढ रहे हैं और वह पुलिस महकमें को अपराधियों व पुलिस में फैले भ्रष्टाचार पर प्रहार करने के लिए सभी पुलिस कप्तानों को आदेश दिये हुये हैं लेकिन हैरानी वाली बात है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग लड रहे ईमानदार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के राज में भी एक पुलिस कप्तान चंद कोतवाल व कुछ थाना प्रभारियों से डरा हुआ नजर आ रहे हैं? सवाल खडे हो रहे हैं कि पुलिस कप्तान को इस बात का भय है कि अगर उन्होंने भ्रष्टाचार में डूबे चंद कोतवाल व थाना प्रभारियों पर कार्यवाही की तो उनकी सफेदपोशों में अच्छी साठगांठ के चलते कहीं उनकी कुर्सी भी न चली जाये? उत्तराखण्ड के डीजीपी चाहते हैं कि राज्य में पुलिस आम आदमी के साथ मित्र व्यवहार करे और अपराध करने वालों पर वह शिकंजा कसे लेकिन एक जनपद में मुख्यमंत्री और डीजीपी के आदेशों को भी चंद कोतवाल व थाना प्रभारी हवा में उडा रहे हैं और ऐसा नहीं है कि इसकी गूंज पुलिस कप्तान के कानों में नहीं गूंजी है लेकिन अपनी कुर्सी जाने का भय देखकर वह ऐसे भ्रष्ट कोतवाल व थानेदारों पर कार्यवाही करने का तिनकाभर भी साहस नहीं दिखा पा रहे हैं ऐसेे में मुख्यमंत्री का अपराधमुक्त राज्य का सपना कैसे परवान चढेगा यह समझ से परे है।
उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री राज्य के अन्दर पारदर्शिता के साथ सरकार चला रहे हैं और उन्होंने सभी जनपदों के पुलिस कप्तानों को आदेश दे रखा है कि वह राज्य को अपराधमुक्त करने की दिशा में काम करें और इस बात का भी ध्यान रखा जाये कि किसी भी व्यक्ति के साथ अन्याय न हो और जो अपराध की दुनिया में अपने कदम आगे बढाकर सिस्टम को चुनौती दे रहे हैं उन पर नकेल लगाई जाये जिससे कि उनके मन में एक खौफ दिखाई दे कि अब राज्य के अन्दर न तो बाहर का कोई अपराधी उत्तराखण्ड को अपनी शरणस्थली बना पायेगा और न ही कोई अपराधी यहां अपराध कर पायेगा। मुख्यमंत्री स्पष्ट विजन के बावजूद उत्तराखण्ड के एक जिले का पुलिस कप्तान न जाने क्यों चंद कोतवाल व थाना प्रभारियों से डरे और सहमें हुये हैं? चर्चा है कि पुलिस कप्तान को इस बात का इल्म है कि उनके जनपद में चंद कोतवाल व थाना प्रभारी किस तरह से भ्रष्टाचार के दलदल में डूबकी लगाकर दौलत कमाने का खुला खेल खेल रहे हैं लेकिन उन्हें इस बात की आशंका उठ रही है कि इनमें से कुछ थानेदारों की राजनीतिक पहुंच इतनी हाईलेवल है कि कुछ सफेदपोश उनके सारे कारनामों को जानने के बावजूद भी उन्हें नहीं हटने देना चाहते? उत्तराखण्ड के इतिहास में पहली बार ऐसा देखने को मिल रहा है कि किसी पुलिस कप्तान को अपने भ्रष्ट कोतवाल व थानेदारों को हटाने में इस बात का भय सता रहा है कि अगर उन्होंने उन्हें हटाने के लिए अपने कदम आगे बढाये तो कहीं ऐसा न हो कि उनकी कुर्सी ही छीन जाये? पुलिस कप्तान के इस रूख को देखकर सवाल खडे होने लगे हैं कि क्या वह अपने जनपद में सिर्फ गरीब, असहाय और कभी किसी छोटे अपराध में जेल गये व्यक्ति को ही पुलिस का इकबाल दिखाने की सौगंध खाये हुये हैं? अब देखने वाली बात है कि राज्य के ईमानदार मुख्यमंत्री कप्तान के मन में छाये राजनीतिक भय को दूर करने के लिए उन्हें अपना आशीर्वाद देंगे जो अपने जनपद मंे चंद भ्रष्ट कोतवाल व थानेदारों की अदृश्य राजनीतिक पहुंच से डरे और सहमें हुये हैं?

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