अपने शासनकाल का कब याद आयेगा भ्रष्टाचार?

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देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत जिनके चार साल के कार्यकाल में भ्रष्टाचार और घोटालों का खूब खेल चलता रहा और उनके कुछ करीबियों के भ्रष्टाचार को लेकर हुये स्टिंग देशभर की जनता ने देखे और झारखण्ड प्रकरण में उनके खिलाफ हुये सीबीआई जांच के आदेश से मचे भूचाल की गूंज किसी से छुपी नहीं रही भले ही अभी यह मामला देश की सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है लेकिन उनके शासनकाल में जीरो टॉलरेंस सरकार चलाने का शोर एक हवाबाजी से कुछ नहीं दिखा था। अब यूकेएसएसएससी में भर्तियों के सबसे बडे गुनाहगार हाकम सिंह रावत की त्रिवेन्द्र सिंह रावत के साथ सोशल मीडिया पर वायरल हुई फोटो और हाकम सिंह की मां के लिए उसे हैलीकाप्टर उपलब्ध कराना और हरिद्वार में एक घोटाले में दर्ज हुये मुकदमें में उसे बचाने के आरोप उन पर लगे तो उससे एक बार फिर त्रिवेन्द्र सिंह रावत उत्तराखण्ड के अन्दर चर्चाओं का केन्द्र बन गये। गजब की बात तो यह है कि पुष्कर सिंह धामी की बेदाग सरकार चलाने पर जहां त्रिवेन्द्र सिंह रावत को उनकी पीठ थपथपानी चाहिए थी वहीं वह पूर्व विधानसभा अध्यक्ष के कार्यकाल में हुई नियुक्तियों पर ही अपनी सरकार को कटघरे में खडा करने से नहीं चूके जिससे राज्य के अन्दर बहस चल गई है कि वह अपने कार्यकाल में हुये भ्रष्टाचार व घोटालों की जांच भी सीबीआई से कराने के लिए ऐलान करेंगे?
उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत को उनके चार साल पूरे होने से पहले ही भाजपा हाईकमान ने हटा दिया था और त्रिवेन्द्र के समर्थकों ने राज्य के अन्दर यह दम भर रखा था कि उन्हें भाजपा हाईकमान राज्य सभा भेज सकती है लेकिन भाजपा हाईकमान ने इन सभी चर्चाओं को विराम लगा दिया था। अब राज्य के अन्दर पुष्कर सिंह धामी की स्वच्छ राजनीति पारी का आगाज हो रखा है और जिस तरह से यूकेएसएसएससी में हुये पेपर लीक में हाकम सिंह रावत की गिरफ्तारी हुई और उसकी पूर्व मुख्यमंत्री के साथ काफी फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुई तो उससे राज्य के अन्दर एक बार फिर त्रिवेन्द्र सिंह रावत चर्चा का केन्द्र बन गये कि आखिर हाकम सिंह रावत पर त्रिवेन्द्र रावत इतने कृपा पात्र क्यों थे कि उसकी मां को उत्तरकाशी से दून लाने के लिए उन्होंने हैलीकाप्टर तक उपलब्ध कराया था और यह सवाल भी खडे हुये कि उनके शासनकाल में जब हरिद्वार के एक थाने में हाकम सिंह रावत के खिलाफ मुकदमा कायम हुआ था तो उसे बचाने का खेल आखिर क्यों खेला गया? अब जिस तरह से प्रेमचंद अग्रवाल के कार्यकाल में मात्र एक वर्ष के लिए विधानसभा में हुई नियुक्तियों पर त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सरकार को ही घेरने का काम किया है उससे वह अपने ही जाल में फंसते हुए नजर आ रहे हैं?

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