पारदर्शिता से सरकार चलाते धामी

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देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सत्ता चलाने के लिए देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मंत्र को सफलता के साथ धरातल पर उतारने का जो मिशन शुरू किया उससे राज्य के बडे-बडे सफेदपोशों और मीडिया के एक संगठित ग्रुप के हाथ पांव फूल गये और उन्होंने उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री द्वारा यूकेएसएसएससी द्वारा कराई गई भर्तियों में घोटालों की जांच के लिए जिस तरह से युवाओं के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए बडा फैसला लेकर उसकी जांच एसटीएफ और विजिलेंस से कराने का जो हुक्म जारी किया उससे इन भर्तियों में शामिल बडे-बडे गुनाहगारों का जेल जाना शुरू हो रखा है और मुख्यमंत्री के बढते वजूद से धबराये सफेदपोश और कुछ मीडिया के संगठित सिंडिकेट ने पूर्व विधानसभा अध्यक्ष के कार्यकाल में हुई मात्र चंद भर्तियों को लेकर जो शोर मचाना शुरू किया उससे साफ झलक गया कि यह शोर एक प्रायोजित शोर है और इस शोर के बहाने बेदाग दिखाई दे रहे मोदी के सखा पुष्कर सिंह धामी को अस्थिर करने के लिए जो चक्रव्यूह रचा गया उसका सच दिल्ली में बैठे भाजपा के बडे-बडे दिग्गज नेताओं को भी पता चल चुका है और यह बात भी साफ हो चुकी है कि मोदी के सखा पुष्कर सिंह धामी राज्य में बेदाग होकर एक के बाद एक बडे-बडे फैसले लेकर भ्रष्टाचारियों पर जिस तरह से हंटर चला रहे हैं वह उन्हें रास नहीं आ रहा है और इसी के चलते विधानसभा में हुई भर्तियों को लेकर उन्हें एक साजिश के तहत निशाना बनाने का हथकंडा अपनाया गया अब इंतजार की घडियां खत्म हो गई हैं और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी राज्यहित में कडा फैसला लेने का मन बना चुके हैं और उसके चलते वह सभी साजिशकर्ता धडाम हो जायेंगे जो राज्य में सरकार को अस्थिर करने का तानाबाना बुने हुये थे?
उल्लेखनीय है कि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सखा पुष्कर सिंह धामी ने सत्ता संभालने के बाद से ही ऐलान कर दिया था कि वह राज्य में भ्रष्टाचार व घोटालेबाजों को किसी भी कीमत पर पनपने नहीं देंगे और राज्य को आदर्श राज्य बनाने की दिशा में वह काम करेंगे और भ्रष्टाचार व घोटाले करने वाले सभी गुनाहगारों को सलाखों के पीछे पहुंचाया जायेगा। नरेन्द्र मोदी के सखा पुष्कर सिंह धामी ने एक साल से बेदाग होकर सत्ता चलाई तो उनके इस रूप को देखकर दर्जनों सफेदपोश और मीडिया के कुछ लोगों ने एक सिंडिकेट बनाकर राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के तेजी के साथ बढ रहे इकबाल पर ग्रहण लगाने का चक्रव्यूह रचा और उन्होंने विधानसभा में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल के कार्यकाल में हुई मात्र 72 भर्तियों पर इतना बडा भूचाल मचा दिया मानो किसी विधानसभा अध्यक्ष ने पहली बार ऐसी भर्तियां की हों? हैरानी वाली बात यह है कि इन भर्तियों का मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से कोई लेना देना नहीं लेकिन उसके बावजूद भी उनके फैसले पर जिस तरह से उंगलियां उठाने का खेल शुरू हुआ उससे साफ नजर आ गया कि उन्हें अस्थिर और दिल्ली में कमजोर करने का इन भर्तियों के सहारे बडा खेल खेला जा रहा है? सवाल यह है कि मात्र 72 भर्तियां जिनमें मुख्यमंत्री का कोई लेना देना नहीं उस पर तो भूचाल मचा दिया गया लेकिन यूकेएसएसएससी से हुई हजारों भर्तियों में हुये भ्रष्टाचार के खिलाफ जांच कराने का साहस दिखाने वाले पुष्कर सिंह धामी के सख्त रूख के चलते ही एसटीएफ अब तक 32 गुनाहगारों को सलाखों के पीछे पहुंचा चुकी है और इन गुनाहगारों के जेल जाने से उस युवा पीढी को एक बडी राहत मिली है जो वर्षों से सरकारी नौकरी पाने में सफल नहीं हो पाये थे। युवाओं के रियल हीरो बनते मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के बढते कदमों से षडयंत्रकारियों की नींद उड गई और उन्हें यह आभास हो गया कि अगर इसी तरह से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बडे-बडे फैसले लेकर भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम चलाते रहे तो वह एक लम्बे युग तक मुख्यमंत्री की कुर्सी पर आसीन रहेंगे इसी के चलते उन्हे निशाने पर एक साजिश लेने का खेल खेला गया जिसका पर्दाफाश हो चुका है? अब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी विधानसभा अध्यक्ष और दिल्ली में भाजपा के दिग्गज नेताओं से मंथन कर विधानसभा में हुई भर्तियों पर कोई बडा फैसला ले सकते हैं और यूकेएसएसएससी से हुई भर्तियों की जांच पर भी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी कोई कडा फैसला लेकर साफ संदेश देंगे कि वह भ्रष्टाचार करने वाले किसी भी गुनाहगार को खुली हवा में सांस लेने नहीं देंगे।

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