भर्तियों के राजदार हैं हाकम और राजेश

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देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखंड में 2०21 में हुई भर्ती में पेपर लीक प्रकरण में उत्तरकाशी के जिला पंचायत सदस्य ने मात्र कुछ वर्षों में जिस तरह से दौलत का एक बडा किला खडा किया और उसने अपने कई सफेदपोशों और अफसरों से संबंध बनाये उनका राज तभी बेनकाब हो पायेगा जब हाकम सिंह रावत का पोलियाग्राफ टेस्ट होगा क्योंकि पुलिस रिमांड के दौरान एसटीएफ के पास सिर्फ पूछताछ करने के और कोई चारा नहीं है जबकि उसके सीने में दफन राज बिना पोलियोग्राफ टेस्ट के बाहर नहीं आ पायेंगें इसलिए जब राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पेपर लीक मामले में बडे से बडे गुनाहगार को सलाखों के पीछे पहुंचाने का साफ संदेश दिया हुआ है तो सीबीआई से हाकम सिंह रावत और लखनऊ के राजेश चौहान का पोलियोग्राफ टेस्ट ही यह राज खोलेगा की उनके किन किन सफेदपोशों और अफसरों से पर्दे के पीछे से बडा गठजोड था? उत्तराखंड की जनता को जिस तरह से पुष्कर सिंह धामी के भ्रष्टाचार मुक्त करने का मिशन समझ आ रहा है तभी से आवाम यह आशा पाले हुए है कि हाकम सिंह और राजेश चौहान ही राज्य में हुई अधिकांश भर्तियों के बडे गुनाहगार है और उनका गुनाह सिर्फ पूछताछ से नहीं बल्कि वीडियोग्राफी और वैज्ञानिक तरीके से पूछताछ के बाद ही न्यायालय में मजबूती के साथ उन्हें सजा दिलाने के लिए जरूरी होगा। उल्लेखनीय है कि हाकम सिंह रावत को भले ही 2०21 में अधीनस्थ सेवा आयोग द्वारा कराई गई भर्तियों में पेपर लीक का बडा गुनाहगार माना जा रहा हो लेकिन जिस तरह से उसने अपने दो भाईयों को सरकारी नौकरी में फिट कराया उससे आशंकाओं का बाजार गर्म है कि उन्हें भी हाकम सिंह रावत ने पेपर लीक कराकर कहीं न कहीं सरकारी नौकरियों में फिट किया था? पुष्कर सिंह धामी ने एसटीएफ को संदेश दे रखा है कि वह पेपर लीक प्रकरण में गहराई से जांच कर गुनाहगारों को सलाखों के पीछे पहुंचायें। हाकम सिंह रावत का जिस तरह से दौलत कमाने में एक बडा खेल सबके सामने आया है उससे राज्य में हुई अधिकांश भर्तियां संदिग्ध हो गई है और यही कारण है कि राज्य में सभी भर्तियों की जांच सीबीआई से कराने की मांग तेज होती जा रही है। बीते रोज शासन ने 2०15 में हुए दरोगा भर्ती प्रकरण की जांच जिस तरह से विजिलेंस के हवाले की है जिससे यह भर्तियां भी संदेह के दायरे में आ गई है और हाकम सिंह रावत पर भी इस भर्ती में शक की सुंई दौड रही है? बहस यह चल रही है कि यह पेपर पंतनगर यूनिवर्सिटी ने कराई थी लेकिन चर्चा है कि इस भर्ती के प्रश्नपत्र तो लखनऊ से बनकर आये थे और उसी कंपनी ने ही पेपर चेक किये थे जिसके चलते यह भर्तियां भी अब रडार पर है? इस भर्ती की जांच विजिलेंस को दिये जाने से 2०15 में भर्ती हुए काफी दरोगाओं की नींद उड गई है? वहीं एसटीएफ ने जिस तरह से लखनऊ की आरआईएमएस कंपनी के मालिक राजेश चौहान को दबोचा है वह राज्य में हुई अधिकांश भर्तियों में एक बडा साजिशकर्ता माना जा रहा है? एसटीएफ अब इस गुनाहगार को रिमांड पर लेकर उससे क्या क्या राज निकलवा पायेगी यह तो भविष्य के गर्त में कैद है लेकिन अगर एसटीएफ हाकम सिंह रावत और राजेश चौहान को सीबीआई की प्रयोगशाला में ले जाकर उनका पोलियोग्राफ टेस्ट कराने में सफल हो पाये तो उससे राज्य में काफी सफेदपोश और पर्दे के पीछे रहकर उनसे गठजोड रखने वाले काफी अफसर भी बेनकाब हो सकते है?

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