घपलेबाजों के खिलाफ पुष्कर की धांय-धांय

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देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 2०25 तक राज्य को भ्रष्टाचारमुक्त करने का जो संकल्प लिया हुआ है वह अब धरातल पर भी दिखाई देने लगा है। उत्तराखण्ड में यूकेएसएसएससी में भर्ती घोटाले के सम्बन्ध में अपनी टीम के साथ बैठक कर उन्होंने जिस तरह से दोषियों को चिन्हित कर उनकी गिरफ्तारी, अवैध सम्पत्ति को जब्त करने और गैंगेस्टर एक्ट व पीएमएलए में कार्यवाही करने का खुला आदेश दिया उससे राजनीति हल्कों में तूफान मच गया और जिन परीक्षाओं में गडबडी के साक्ष्य मिले उन्हें निरस्त कर नये सिरे से चयन प्रक्रिया शुरू करने का खुला ऐलान किया उसने राज्य में साफ संदेश दे दिया कि पुष्कर फ्लावर के साथ फायर भी हैं जो भ्रष्टाचारियों और घोटालेबाजों का संहार करने के लिए आर-पार की लडाई लडने के लिए आगे आ गये हैं। धामी की धांय-धांय से घोटालेबाज डरे और सहमें हुये नजर आ रहे हैं।
उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को जब सत्ता सौंपी गई थी तो हर कोई यह शंकित था कि क्या पुष्कर सिंह धामी उत्तराखण्ड को शहीद आंदोलनकारियों के सपनों का उत्तराखण्ड बना पायेंगे? वहीं जब उन्होंने सत्ता संभालने के बाद बडे-बडे फैसले लेने शुरू किये तो उससे राज्य में कुछ राजनीतिक पार्टियों के बडे नेताओं की नींद उड गई और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने साफ अल्टीमेटम दे दिया था कि उनके राज्य में भ्रष्टाचारियों और घोटालेबाजों पर जहां नकेल लगेगी वहीं खनन, भू-माफियाओं पर भी शिंकजा कसा जायेगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य की जनता को जहां सीने से लगाया वहीं उन्होंने भ्रष्टाचारियों के खिलाफ आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भ्रष्टाचारमुक्त देश के संकल्प को उत्तराखण्ड में धरातल पर उतारने के लिए अपने कदम तेजी के साथ बढा दिये और यही कारण है कि जब अधीनस्थ सेवा चयन आयोग में बीते वर्ष हुई परीक्षा का पेपर लीक हुआ तो उन्होंने मामले की जांच एसटीएफ के एसएसपी अजय सिंह को सौंप दी और अजय ंिसह ने भी पेपर लीक प्रकरण में घोटालेबाजों को बेनकाब करने का ऑपरेशन शुरू किया और अब तक हुई गिरफ्तारियों से उत्तराखण्ड में बडा भूचाल मचा हुआ है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी साफ ऐलान कर चुके हैं कि पेपर लीक मामले में छोटी से लेकर हर बडी मछली सलाखो के पीछे होगी। राजनीति में कुछ कर गुजरने की जिद्द में पुष्कर सिंह धामी उत्तराखण्ड को भ्रष्टाचारमुक्त करने के लिए अपनी टीम के साथ आगे बढते जा रहे हैं। मुख्यमंत्री के कडे तेवरों से उत्तराखण्ड में हुई अधिकतम भर्तियों के जांच के आदेश दिये जाने से सत्ता के गलियारों में हडकम्प मचा हुआ है। देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से पुष्कर सिंह धामी ने वायदा किया हुआ है कि वह 2०25 तक उत्तराखण्ड को भ्रष्टाचारमुक्त कर देंगे। हालांकि शुरूआती दौर में मुख्यमंत्री के इस ऐलान को उत्तराखण्डवासी और सफेदपोश हवाबाजी समझ रहे थे लेकिन जब पुष्कर सिंह धामी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ धांय-धांय करनी शुरू की तो उससे भ्रष्टाचारी व घोटालेबाज धडाम होते जा रहे हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भ्रष्टाचारियों के खिलाफ जिस तरह से आर-पार की लडाई का ऐलान किया और अपनी टीम के साथ उन्होंने खाका तैयार किया कि जिन भर्ती परीक्षाओं में गडबडी के सबूत मिले हैं उन्हें निरस्त कर नये सिरे से भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाये और भर्ती घोटाले में शामिल गुनाहगारों पर गैंगेस्टर एक्ट लगाकर उनकी सम्पत्ति सीज की जाये। अब देखने वाली बात है कि राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भर्ती मामलों में गुनाहगारों को चिन्हित कर जिस तरह से सलाखों के पीछे पहुंचाने का टास्क डीजीपी को सौंपा है वह इस टास्क को चुनौती के रूप में स्वीकार करते हुए कब तक नकल माफियाओं के सिंडिकेट को नेस्तानबूत कर सकेंगे यह देखने वाली बात होगी? मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की किचन टीम ने जिस तरह से राज्य से भ्रष्टाचार व घोटालों को भेदने के लिए ऑपरेशन चला रखा है उससे आने वाले समय में उत्तराखण्ड भ्रष्टाचारमुक्त नजर आयेगा वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की धांय-धांय से घपलेबाजों का कुनबा बिखरता हुआ नजर आने लगा है।

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