डीजीपी साहब, पीड़िता की शिकायत पर क्यों कुंडली मारे बैठी रही दून पुलिस?

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सीएम का चला अब हंटर
देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड के डीजीपी अपने कार्यकाल में दावा करते आ रहे हैं कि अगर किसी भी जनपद में पुलिस ने फरियादी का मुकदमा लिखने के लिए कोई पहल नहीं की तो उसके खिलाफ सख्त कार्यवाही अमल में लाई जायेगी लेकिन जब एक महिला ने अपने साथ हुये अत्याचार की शिकायत दून पुलिस को दी थी तो उस पर कैसे पुलिस के चंद अफसर कुडली मारकर बैठे रहे यह हैरान करने वाली बात है? अब जब उत्तराखण्ड के महानायक बन चुके सीएम पुष्कर सिंह धामी का हंटर चला तो आखिरकार आनन फानन में डीजीपी ने राजधानी के पुलिस कप्तान को जांच सौंप दी। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का साफ कहना है कि वह मुख्य सेवक के रूप में सत्ता चला रहे हैं और किसी के साथ भी अगर अन्याय हुआ है तो उसे इंसाफ दिलाना उनका काम है इसलिए अब हर भ्रष्टाचारी व गुनाह करने वाले लोगों को समझ लेना चाहिए कि अब राज्य में उस पुष्कर का युग शुरू हो गया है जो आवाम का महानायक है।
उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग पेपर लीक मामले की लपटें उत्तराखंड लोक सेवा आयोग की दहलीज तक भी पहुंच गई है। एक महिला अभ्यर्थी ने लोक सेवा आयोग के सदस्य पर नौकरी देने के नाम पर यौन उत्पीड़न व पैसे मांगने का आरोप लगाया है। लेकिन हाई प्रोफाइल अधिकारी से जुड़े तीन साल पुराने इस मामले में पीड़ित महिला की शिकायत को रद्दी की टोकरी में डालने पर भी दून पुलिस कठघरे में खड़ी दिखाई दे रही है? साल 2018 के प्रवक्ता भर्ती के इस मामले में पीड़ित महिला व आयोग के तत्कालीन सदस्य (पूर्व जज) के बीच बातचीत ( 2019) का ऑडियो भी वॉयरल हो रहा है। भाजपा के शासन में तीन साल पहले भी महिला ने शिकायत की थी लेकिन पुलिस ने मामला दबा के रखा। पीड़िता ने एक महिला पुलिस अधिकारी पर भी मानसिक प्रताड़ना का आरोप भी लगाया है। इस मामले से यह भी सम्भावना पुष्ट होने लगी है कि लोक सेवा आयोग की भर्तियों में भी काफी घोटाला हुआ है?
वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए और उसी के चलते डीजीपी अशोक कुमार ने महिला के शिकायती पत्र व अन्य सबूतों के आधार पर मामले की जांच एसएसपी दलीप कुंवर को सौंप दी है । यह आदेश होते ही आयोग व सत्ता के गलियारों में हलचल मच गई है।
पीड़ित महिला का यह कहना है
23 जून 2019- पीड़ित महिला को आयोग के सदस्य के पीए ने दस्तावेज ठीक करने के बहाने रिस्पना पुल पर बुलाया। महिला जब रिस्पना पुल पहुंची तो पीए फिर कागजात ठीक करने के बहाने आनन्दा आपार्टमेंट ले गया। वहॉं जयदेव सिंह ने इंटरव्यू में पास करने के बदले पैसे व शारीरिक समझौते के लिए दबाव बनाया। महिला ने विरोध किया। नतीजतन लिखित परीक्षा में टॉप 5 मेरिट में होने के बावजूद सेलेक्शन नहीं हुआ। जुलाई 2019- पीड़ित महिला ने आयोग के सदस्य से नौकरी नहीं मिलने पर फोन पर बात की। और इस बात को रिकॉर्ड भी किया। यही ऑडियो इन दिनों वॉयरल हो रहा है। 12 मार्च 2020- पीड़ित महिला ने पुलिस महानिरीक्षक को शिकायत भेजी। लेकिन आयोग के सदस्य के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। 13 मार्च 2020- पीड़ित महिला पुलिस उपाधीक्षक पल्लवी त्यागी से मिली लेकिन कोई एक्शन नहीं हुआ। 19 मार्च 2020- राज्य महिला आयोग को शिकायत भेजी। 20 जुलाई 2020- पीड़ित महिला फिर ब्व् पल्लवी त्यागी से मिली लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। 28 जुलाई 2020- पीड़ित महिला ने दून के एसएसपी को शिकायत भेजी । पुलिस ने महिला के कई बार बयान लिए लेकिन दोषी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की।
इसी बीच, पुलिस में शिकायत होने पर अंदरखाने मचे बवाल के बाद आयोग के सदस्य (पूर्व जज) ने चुपचाप इस्तीफा दे दिया। लेकिन पीड़ित महिला न्याय पाने के लिए अपने स्टैंड पर डटी रही। इस मामले का एक गंभीर पहलू यह है कि दून निवासी पीड़ित महिला ने मार्च 2020 में शिकायत की। उस समय डीजीपी अनिल रतूड़ी थे। नवंबर 2020 में अशोक कुमार डीजीपी बने। इनके अभी तक जारी लम्बे कार्यकाल में भी पीड़ित महिला को न्याय नहीं मिला पाया यह भी हैरान करने जैसा है क्योंकि उन्होंने बार-बार ऐलान किया कि अगर किसी पीडित व्यक्ति का मुकदमा नहीं लिखा गया तो कार्यवाही की जायेगी लेकिन इस मामले में मुकदमा कायम न करने वालों पर अब डीजीपी क्या कार्यवाही करेंगे यह देखने वाली बात होगी?

यह है मामला
2018-19 में उत्तराखंड में प्रवक्ता पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई थी। शिकायतकर्ता महिला का कहना है कि 2018 में लिखित परीक्षा पास की थी। इंटरव्यू पैनल में मौजूद आयोग के एक सदस्य ने बाद में उन्हें शैक्षिक दस्तावेज के साथ एक स्थान पर बुलवाया। और शारीरिक सम्बंध बनाने का दबाव बनाते हुए छेड़छाड़ की यही नहीं नौकरी के बदले पैसे की भी डिमांड की। 2018 में उत्तराखंड अधीनस्थ शिक्षा (प्रवक्ता संवर्ग समूह ग) की इस परीक्षा में पीड़ित महिला का चयन नही हो पाया था।

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