उत्तराखण्ड का सुरक्षा कवच बने पुष्कर

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी राज्यवासियों के लिए हर मोर्चे पर सुरक्षा कवच बनकर आगे खडे हुये दिखाई दे रहे हैं और उनका साफ मानना है कि वह मुख्य सेवक के रूप में सत्ता पर आसीन हैं तो हर व्यक्ति को संकट के समय बचाना उनका पहला कर्तव्य है और इस कर्तव्य को निभाने के लिए वह कभी भी पीछे नहीं हटेंगे। उत्तराखण्ड में बादल फटने से कुछ जिलों में इंसानों की मौत से वह आहत हैं तो राज्य में बहे पुल, टूटी सडकों व आवाम के बहे घरों को लेकर वह बेहद चिंतित नजर आ रहे हैं और उन्होंने बहे पुलों के कारण आवागमन में हो रही परेशानी को देखते हुए विकल्प मार्गों से आवाम को आने-जाने का रास्ता मुहैया कराने के आदेश तो वहीं बडे पैमाने पर बचाव व राहत का कार्य उन्होंने अपनी देखरेख में शुरू करा रखा है और इस आपदा के शिकार हुये परिवारों के साथ वह सुरक्षा कवच बनकर उनके साथ खडे हुये हैं और चौबीस घंटे से ज्यादा हो गये और वह आपदा के रण में अभेद होकर डटे हुये हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जिस तरह से बारिश के तांडव से आई आपदा पर खुद मोर्चा संभाल रखा है उससे राज्यवासियों के मन में मुख्यमंत्री को लेकर एक बडी आशा दिखाई दे रही है कि वह आपदा के शिकार परिजनों को सरकारी मद्द और उनके पुर्नवास के लिए बडा ऐलान करेंगे जिससे कि किसी भी परिवार के सामने सिर छुपाने का संकट खडा न हो सके।
उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री राज्य में मुख्य सेवक की भूमिका में हैं और उनका साफ मानना है कि राज्य के हर व्यक्ति की सुरक्षा का जिम्मा उनके पास है इसलिए देखने में आ रहा है कि जहां पर भी अभी तक दैवीय आपदायें आये व कोई बडी दुर्घटना घटी तो मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद आगे बढकर घटना स्थल पर डेरा डालने के लिए पहुंच गये और उन्होंने हर बार मोर्चा संभाला और अफसरों की टीम को जिस तरह से मैदान में उतार कर हर इंसान को राहत देने की दिशा में अपने कदम आगे बढाये उसी का परिणाम है कि राज्य की जनता को पुष्कर सिंह धामी से एक बडी उम्मीद जगने लगी है।
48 घंटे पूर्व जब उत्तराखण्ड के गढवाल में तीन जनपदों के अन्दर बादल फटने से पानी के तांडव ने अपना रूप दिखाया उससे राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से लेकर समूचा सिस्टम डर गया और आवाम की सुरक्षा के लिए पुष्कर सिंह धामी उनका सुरक्षा कवच बनकर खुद रायपुर में डेरा डालने के लिए पहुंच गये थे और उन्होंने अपनी समूची टीम को जिस तरह से बचाव व राहत कार्य में लगाया और लापता लोगों को खोजने के लिए अपनी टीमों को लगातार सर्च ऑपरेशन के आदेश दिये उससे साफ नजर आ गया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इस आपदा को लेकर कितने गम्भीर हैं। पुष्कर सिंह धामी के साथ कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने भी बचाव व राहत कार्य के लिए खुद मोर्चा संभाला और उम्र के इस पडाव में भी उन्होंने जिस तरह से आपदा स्थलों पर खतरनाक रास्तों से होकर वहां तक का सफर तय किया वह साफ दिखा गया कि पुष्कर सिंह धामी और उनकी टीम किस तरह से राज्य में आने वाली दैवीय आपदाओं को लेकर खुद मोर्च पर डट जाती है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आपदा स्थल से लेकर आपदा प्रबन्धन कार्यालय में डेरा डालकर जिस तरह से बचाव व राहत कार्य के लिए खुद मोर्चा संभाला और आवाम का सुरक्षा कवच बनकर वह आपदा स्थलों पर डटे हुये हैं उससे राज्य की जनता के मन में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को लेकर एक बडा विश्वास जाग उठा है कि ऐसे मुख्यमंत्री के कार्यकाल में वह सुरक्षित रहेंगे क्योंकि जो मुख्यमंत्री आपदा आने के बाद खुद कुछ समय बाद ही मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाल लेते हैं वह आज तक राज्य के किसी पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने शासनकाल में नहीं किया? मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि जो पुल बह गये हैं उसके विकल्प का काम किया जा रहा है जल्द से जल्द स्थिति सामान्य करने की कोशिश की जा रही है और वह खुद हर चीज की देखरेख कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नदियों का जलस्तर बढा हुआ है कई लोग घायल हुये हैं उनका इलाज चल रहा है जो लोग लापता हैं उनकी भी सरगर्मी से तलाश की जा रही है जहां आवागमन के रास्ते कट गये हैं वहां भोजन और जरूरी सामानों की व्यवस्था की जा रही है।

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