धामी का आदर्श विजन

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देहरादून(संवाददाता)। देश के प्रधानमंत्री ने उत्तराखण्ड के युवा नेता पुष्कर सिंह धामी को जिस तरह से युगदृष्टा मानकर उन्हें राज्य की कमान सौंपी है उसी का परिणाम है कि राज्य का यह युगदृष्टा उत्तराखण्ड के भविष्य को सजाने संवारने के मिशन में तेजी के साथ आगे बढता जा रहा है। हृदय सम्राट, युग पुरूष, महानायक के रूप में अपनी पहचान बना चुके पुष्कर सिंह धामी को आज राज्य की जनता युगदृष्टा मानने लगी है और उनका कहना है कि यह युगदृष्टा भविष्य को पहले से ही भांपकर राज्य को सही दिशा में ले जाने की ओर तेजी के साथ बढते जा रहे हैं। हर घर में पुष्कर सिंह धामी के चर्चे होना एक आम बात हो गई है और आम आदमी का कहना है कि अगर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहले इस युगदृष्टा पुष्कर सिंह धामी पर नजर चली गई होती तो आज उत्तराखण्ड विकास के पथ पर पहले पायदान पर आ चुका होता।
आज जिस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व मे भारत रोज नये आयाम गढ़ रहा है और विश्व की महानतम राष्ट्र शक्तियों के बीच भारत कई मामलों मे अग्रणी भूमिका निभा रहा है, और देश के अंदर भी नरेन्द्र मोदी के ‘सबका साथ- सबका विकासÓ मंत्र को लेकर राज्यों मे सरकारें कार्य कर रही हो, कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक जब एकटक देश के प्रधान सेवक की हर बात पर सबकुछ न्यौछावर करने वाले जनमानस के नायक नरेंद्र मोदी जिन्होंने की कई बार अपने व्याख्यानों मे कहा है कि जब मुझे कभी भी ऊर्जा की आवश्यकता होती है, तो मै हिमालय से ऊर्जा पाता हूँ, उत्तराखंड से उनका विशेष लगाव है, और वह अपने इस उत्तराखंड को किसी भी कीमत पर ऐसे ही नहीं छोड़ सकते। और यह देखने को भी मिला है चाहे केदारनाथ आपदा हो, कोरोना काल हो या अन्य कोई छोटी या बड़ी संकट की घड़ी हो तो अपने इस प्रिय राज्य को वह ऐसे किसी राजनेतओं को न सौंपकर किसी हरदिल अजीज सबको साथ लेकर चलने वाले, जिसने की कुमाऊं और गढ़वाल दोनों क्षेत्रों, युवा, बुजुर्ग, मातृ शक्ति और बच्चों तक को साथ लेकर सामान्य रूप से चलने वाले ‘पुष्कर सिंह धामी को अपने मुख्य सिपाहसालर के रूप मे चुनकर देवभूमि का गौरव बढ़ाया है। जबकि राजनीतिक चुनावी रणक्षेत्र मे जिस तरह पुष्कर ने अपने बहुत ही कम समय के पिछले मुख्यमंत्री काल मे प्रदेश की जनता के दिलों पर राज करते हुए पूरी भाजपा संगठन को साथ लेकर जो विजयश्री दिलवाई और स्वयं षड्यंत्रो का शिकार हो गए, जब केंद्रीय नेतृत्व ने देखा की जहाज बच गया ‘कप्तान का बलिदान काम आया और तब सबकी नजर अपने उस युवा कप्तान पर गई तो शीर्ष नेतृत्व ने सोंचा की हम ‘गढ़ आया पर सिंह गयाÓको बदलकर ष्गढ़ भी रहेगा और सिंह भी रहेगाÓ की तर्ज पर पुष्कर सिंह धामी को पुन: देवभूमि की कमान सौंपी और आज उस निर्णय का असर देखने को मिल रहा है, चाहे कोरोना काल हो, या कोई आपदा, या किसी के हक की बात हो, कुम्भ का सफलतम आयोजन, और प्रदेश के कौने कौने मे होने वाले आयोजन, उद्योग, फिल्म उद्योग वाले हो सभी को निर्विवाद पुष्कर धामी के नेतृत्व पर अटल आस्था है। इसकी बानगी बार बार देखने को मिलती है चाहे पूर्णागिरि मे, जागेश्वर, बागेश्वर, कावड़,चारधाम यात्रा या टपकेश्वर महादेव कि शोभयात्रा ही क्यों न हो। युगपुरुष नरेंद्र मोदी, संगठन और सभी का चहेता युवा दूरदृष्टि वाला पुष्कर सिंह धामी ही है। कुछ समय पहले भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष, पूर्व गृहमंत्री और वर्तमान रक्षामंत्री राजनाथ सिंह खुले मंच से कह गए-पुष्कर फूल नहीं, फायर है।

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