पापियों का संहार करते सीएम पुष्कर

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में कुछ तेज तरार बनने वाले पूर्व मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में न तो भ्रष्टाचार का अंत हुआ और न ही राज्य में घोटालेबाज और अपराधियों पर लगाम लगाने के लिए कोई ऑपरेशन शुरू हुआ। हैरानी वाली बात है कि त्रिवेन्द्र राज में भी मौजूदा डीजीपी और एसटीएफ के प्रभारी के पास कमान थी लेकिन उनके कार्यकाल में न तो डीजीपी ने घोटालेबाजों और अपराधियों, नशा तस्करों के खिलाफ कोई बडी जंग लडने का साहस दिखाया और न ही राज्य में सबसे पॉवरफुल एसटीएफ ने घोटालेबाजों और कुख्यात अपराधियों के खिलाफ ऐसा कोई ऑपरेशन चलाया जिससे राज्य की जनता के मन में खुद को भय से आजादी मिली हो? हालांकि जैसे ही युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को उत्तराखण्ड की कमान देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक बडे विश्वास के साथ सौंपी तो उसके बाद से ही पुष्कर सिंह धामी ने राज्य में पनप रहे पापियों का नाश करने के लिए जिस तरह से अपने कदम आगे बढाये हैं उसी का परिणाम है कि घोटालेबाजों और बडे अपराधियों के खिलाफ डीजीपी और एसटीएफ ने मोर्चा खोल दिया है लेकिन इस ऑपरेशन के पीछे राज्य के निडर महानायक ही आवाम की नजरों में रियल हीरो हैं जिनके होते हुए आवाम अपने आपको राज्य के अन्दर आजाद समझ रही है और यही कारण है कि जिस यूकेएसएसएससी में वर्षों से होती आ रही भर्तियों में धांधली की गूंज मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कानों में गूंजी तो उन्होंने युवाओं के साथ खिलवाड करने वाले घोटालेबाजों पर बडा चाबुक चलाने के लिए साहस के साथ जो निर्देश दिये उसी का परिणाम है कि राज्य के अन्दर यूकेएसएसएससी में हाल ही में हुई भर्तियों का काला चि_ा खोलकर जिस तरह से साजिशकर्ताओं को सलाखों के पीछे पहुंचाने का काम शुरू किया है उसका श्रेय सिर्फ और सिर्फ राज्य के महानायक बन चुके पुष्कर सिंह धामी को ही जाता है।
उत्तराखण्ड के इतिहास में कुछ पूर्व मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में यूकेएसएसएससी द्वारा कराई गई कई भर्तियां सवालों के घेरे में आई लेकिन राज्य के कुछ पूर्व मुख्यमंत्रियों ने इन धांधलियों पर चुप्पी साधकर रखी और उसी के चलते राज्य में युवा पीढी के साथ एक बडा खिलवाड होता चला गया और राज्य के युवाओं में इस बात को लेकर बडी नाराजगी पनपती रही कि आखिरकार राज्य में होने वाली इन भर्तियों में धांधलियों का शोर सुनने के बाद भी कुछ पूर्व मुख्यमंत्री क्यों मौन धारण करे रहे? उत्तराखण्ड को भ्रष्टाचार और अपराधमुक्त करने के लिए देश के प्रधानमत्री नरेन्द्र मोदी ने युवा नेता पुष्कर सिंह धामी को उत्तराखण्ड की कमान सौंपी और सत्ता पर काबिज होते ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने साफ ऐलान कर दिया था कि राज्य में भ्रष्टाचार व घोटालेबाजों पर सख्त कार्यवाही अमल में लाई जायेगी। मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी ने युवा पीढी के साथ हो रहे खिलवाड पर बडा प्रहार करने के लिए शुरूआती दौर में ही अपना रूख साफ कर दिया था कि जिसने भी यूकेएसएसएससी से हुई भर्तियों में घोटाले किये हैं उन्हें किसी भी कीमत पर बक्शा नहीं जायेगा और यही कारण था कि उनकी इस हुंकार से भ्रष्टाचारियों व घोटालेबाजों में हडकम्प मचा हुआ है। उत्तराखण्ड में सत्ता चलाने के लिए पुष्कर सिंह धामी में निडरता के साथ जिस तरह से पापियों का संहार करने के लिए खुद आगे बढकर उन्हें ललकारना शुरू किया है उससे राज्य में पनपते आ रहे भ्रष्टाचारियों व अपराधियों में हडकम्प मचा हुआ है। उत्तराखण्ड के डीजीपी और एसटीएफ भले ही यूकेएसएसएससी में हुई भर्ती में धांधलियों को लेकर भ्रष्टाचारियों को बेनकाब कर उन्हें सलाखों के पीछे पहुंचा रहे हों लेकिन सवाल यही उठता है कि राज्य के महानायक बन चुके पुष्कर सिंह धामी के निडरपन का ही नतीजा है कि भर्ती में हुई धांधलियों में शामिल बडे-बडे गुनाहगारों को सलाखों के पीछे पहुंचाया जा रहा है? इस मामले में भले ही डीजीपी और एसटीएफ अपनी पीठ थपथपा रही हो लेकिन सवाल यह है कि पूर्व मुख्यमंत्री के कार्यकाल में भी मौजूदा डीजीपी और एसटीएफ की टीम थी तो उस समय भर्तियों में कोई धांधलियों में प्रहार करने के लिए क्यों अपने कदम आगे नहीं बढाये? कुल मिलाकर कहा जाये तो उत्तराखण्ड को एक राजनीति का ऐसा महानायक मिल गया है जो पापियों का नाश करने के लिए निडरता के साथ आगे आ चुका है और महानायक पुष्कर सिंह धामी ने जिस तरह से पापियों का नाश कर उनका संहार करना शुरू किया है उससे राज्य की जनता को आभास हो गया है कि अब राज्य भयमुक्त हो जायेगा और उसी के चलते राज्य की जनता अपने आपको आजाद मानकर पुष्कर राज में खुली हवा में सांस ले रही है और उनका कहना है कि जिस राज्य का राजा एक विजन वाला होता है वहां रामराज होना तय है।

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