स्वास्थ्य महकमे के कारण गर्भवती महिला को मिली मौत

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देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी राज्य की रजत जयंती पर प्रदेश को आदर्श राज्य बनाने का संकल्प लिये हुये है लेकिन पहाडों में आज भी इलाज के अभाव में जिस तरह से अगर गर्भवती महिलाओं की मौत की खबरें सामने आ रही हैं उससे राज्य के अन्दर अब नई बहस छिड गई है कि मंत्री जी हवा-हवाई स्वास्थ्य योजनायें गर्भवती महिलाओं को जीवनदान तक नहीं दे पा रही हैं? इलाज के अभाव में आज भी अगर गर्भवती महिला की मौत हो रही है तो यह सिस्टम पर एक बडा प्रश्न है कि एक ओर तो उत्तराखण्ड के स्वास्थ्य मंत्री केरल सहित कुछ अन्य राज्यों का दौरा कर उत्तराखण्ड में खूब वाहवाही लूट रहे हैं कि जल्द ही उत्तराखण्ड में स्वास्थ्य के क्षेत्र में क्रांति आ जायेगी लेकिन मंत्री धनसिंह रावत भूल रहे हैं कि राज्य को बने बाइस साल हो गये और उन्हें भी मंत्री बने एक अरसा बीत चुका है लेकिन उन्होंने स्वास्थ्य के क्षेत्र में क्या किया है इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है? आलम यह है कि आये दिन गर्भवती महिलायें इलाज न मिलने के कारण सडक पर ही बच्चे को जन्म दे रही हैं या फिर जच्चा-बच्चा सडक पर ही दम तोड रहा है? यह हालात पहाडी इलाकों के अधिकांश जनपदों में देखे जा सकते हैं। आये दिन बच्चों की उम्मीद में अस्पताल तक पहुंचने के लिए जद्दोजहद करती महिलायें उस समय मौत की नींद सो रही हैं जब उन्हें इलाज नहीं मिल पा रहा है? ऐसेे में उत्तराखण्ड में स्वास्थ्य के क्षेत्र में स्वास्थ्य मंत्री कौन सी क्रांति लाने का दम भर रहे हैं यह हैरान करने वाली बात है? पहाड में इलाज के आभाव में गर्भवती महिला की मौत के बाद जिस तरह से सोशल मीडिया पर स्वास्थ्य महकमें केा कटघरे में खडा किया जा रहा है वह उत्तराखण्ड सरकार के लिए शुभ संकेत नहीं हैं?
उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी राज्य को आदर्श राज्य बनाने के मिशन में आगे बढ रहे हैं और उनका भी सपना है कि हर व्यक्ति को सरकारी अस्पतालों में बेहतर इलाज मिले जिसके चलते उनके मन में नई सरकार का एक बडा भाव देखने को मिले। हैरानी वाली बात है कि उत्तराखण्ड का जन्म हुये बाइस साल हो गये लेकिन इन बाइस सालों में उत्तराखण्ड का स्वास्थ्य महकमा पहाडी जनपदों में अपना मजबूत सिस्टम तक नहीं खडा कर पाया? हैरानी वाली बात है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पहाडों से पलायन रोकने को लेकर एक बडी सोच के साथ आगे बढ रहे हैं लेकिन जिस तरह से कुछ पहाडी जनपदों में इलाज न मिलने के आभाव में गर्भवती महिलाओं की मौत का मंजर देखने को मिल रहा है उससे स्वास्थ्य महकमा आज भी राज्यवासियों के सामने कटघरे में खडा हुआ है? पहाडों में इलाज की बेहतर सुविधा का सपना हजारों पहाडवासी राज्य बनने के बाद से ही देखते आ रहे हैं लेकिन उनके सामने उस समय एक बडा संकट आकर खडा हो जाता है जब किसी गर्भवती महिला को सरकारी अस्पताल ले जाने की तैयारी होती है तो कई बार एम्बुलेंस नहीं मिल पाती और अगर एम्बुलेंस मिल भी जाती है तो कुछ सरकारी अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं के बेहतर इलाज की व्यवस्था न होकर उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है और इस प्रक्रिया के चलते अकसर कई गर्भवती महिलाओं की मौत की खबरें राज्यवासियों को सुनने को मिल जाती हैं? उत्तराखण्ड के स्वास्थ्य मंत्री धनसिंह रावत हाल ही में केरल गये थे और उन्होंने वहां से आकर दावा किया था कि उत्तराखण्ड में केरल के स्वास्थ्य मॉडल को लागू किया जायेगा लेकिन राज्य के लोग अब यह सवाल खडा कर रहे हैं कि मंत्री जी केरल मॉडल तो जब लागू होगा तब हो ही जायेगा लेकिन धरातल पर मौजूदा समय में तो उत्तराखण्ड का मॉडल स्वास्थ्य महकमें में लागू करा दो जिसके चलते पहाडों में गर्भवती महिलाओं को मौत के आगोश में न समाना पडे? सवाल यह खडे हो रहे हैं कि एक इंसान की मौत से पूरे परिवार के अरमान मिट्टी में मिल जाते हैं इसलिए उत्तराखण्ड में स्वास्थ्य महकमें को कम से कम इतना तो आगे बढा दो कि पहाडों में गर्भवती महिलाओं को इलाज के आभाव में मौत न मिले?

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