शिक्षा विभाग से सीएम दिखे ‘नाराज’

0
167

देहरादून(संवाददाता)। सहसपुर क्षेत्रान्तर्गत झाझरा में विद्यालयी शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय शैक्षिक चिंतन शिविर में मुख्यमंत्री ने सरकारी स्कूलों में घटती छात्र संख्या पर जिस तरह से शिक्षा विभाग को आईना दिखाया है वह कई सवालों को जन्म दे गया कि आखिरकार उत्तराखण्ड में इक्कीस साल बाद भी सरकारी स्कूलों की शिक्षा पर आम आदमी क्यों विश्वास नहीं दिखा रहा है जबकि दिल्ली में केजरीवाल सरकार ने सरकारी स्कूलों में पढाई का जो स्तर बनाया है उसकी गंूज समूचे देश से लेकर विदेशों तक में भी गूंजी। उत्तराखण्ड के स्वास्थ्य मंत्री को स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में सम्मानित किये जाने को लेकर भी बहस शुरू हो गई है कि जब राज्य में स्वास्थ्य और शिक्षा का स्तर धडाम हो चुका है तो फिर मंत्री को कौन सी उपलब्धि को लेकर आखिर सम्मानित किया जा रहा है? सरकारी स्कूलों में घटती छात्रों की संख्या से जब उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री रूबरू हुये तो वह भी चिंतित दिखाई दिये और उन्होंने शिक्षा विभाग को आईना दिखाते हुए जिस तरह से कहा कि सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या के घटने के कारणों और उसके बढाने को लेकर एक बडा मंथन होना चाहिए जिससे राज्यवासी अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में दाखिला कराने के लिए अगली पक्ति में खडे हुये दिखाई दें। मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी जिस तरह से उत्तराखण्ड को आदर्श राज्य बनाने की दिशा में आगे बढ रहे हैं उसमें उत्तराखण्ड की शिक्षा को भी पहले पायदान पर लाने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ंिचतित और गम्भीर नजर आ रहे हैं। उनके चिंतन से शायद शिक्षा विभाग अपने पुराने ढर्रे को त्यागकर मुख्यमंत्री की सोच के सरकारी विद्यालय बनाने की ओर अपने कदम आगे बढाये?
उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन को उत्तराखण्ड में धरातल पर उतारने की दिशा में अपने कदम आगे बढाये हुये हैं। प्रधानमंत्री ने देश में शिक्षा के क्षेत्र में नई शिक्षा नीति बनाकर जिस तरह से एक नई क्रांति का आगाज किया है उससे पुष्कर सिंह धामी काफी प्रभावित हैं और यही कारण है कि उन्होंने उत्तराखण्ड में सरकारी स्कूलों में घटती छात्र संख्या पर चिंता दिखाते हुए कहा कि आखिर क्या कारण है कि सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या बढने के बजाए लगातार कम हो रही हैं। उन्होंने सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या बढाने की एक बडी चुनौती माना है और शिक्षा विभाग के अफसरों को आदेश दिया है कि वह इस बात का मंथन और चिंतन करें कि सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या में कैसे इजाफा किया जाये। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का मानना है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2०2० का लक्ष्य विद्यालयी शिक्षा के सभी स्तरों पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करते हुए श्रेष्ठ मानव का निर्माण करना है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कहना है कि जब उत्तराखण्ड अपनी रजत जयंती मनायेगा तब तक शिक्षा विभाग बेस्ट प्रैक्टिस के तहत क्या कर सकता है इस पर भी अभी से ही ध्यान देना होगा।
उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड का जन्म होने के बाद से ही राज्य का शिक्षा विभाग सरकारी स्कूलों में छात्र-छात्राओं को शिक्षा लेने के लिए कभी आकर्षित नहीं कर पाया जिसके चलते पिछली सरकार में दिल्ली के उपमुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने उत्तराखण्ड आकर भाजपा के चंद मंत्रियों को डिबेट करने के लिए ललकारा था और वह पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ंिसह रावत के डोईवाला इलाके में स्थित सरकारी स्कूल का ढांचा देखने के लिए गये थे तो उन्हें वहां स्कूल की इमारत जहां जर्जर हालत में मिली वहीं शिक्षा का कोई स्तर उन्हें नजर नहीं आया इसके चलते उन्होंने उत्तराखण्ड सरकार को शिक्षा, स्वास्थ्य के क्षेत्र में ललकारा था। अब राज्य में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी हर क्षेत्र में उत्तराखण्ड को आदर्श बनाये जाने के लिए दिन-रात मंथन व चिंतन कर रहे हैं और उन्हें इस बात का इल्म है कि अगर राज्य की शिक्षा और स्वास्थ्य सेवायें बेहतर होंगी तो उससे समूचा उत्तराखण्ड अपने आपको गौरवान्वित महसूस करेगा कि जो काम इक्कीस सालों में नहीं हो पाया वह अब नई सरकार में हो रहा है।

LEAVE A REPLY