प्रदेश के युवा मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने चम्पावत उपचुनाव में अब तक के राज्य गठन के बाद के चुनाव में जीत का जो कीर्तिमान स्थापित किया है वह निंसदेंह चम्पावत की जनता की दूरदृष्टि का परिणाम हैं लेकिन ऐतिहासिक विजय के बाद चम्पावत विधानसभा की जनता की मुख्यमंत्री से अपेक्षा काफी बढ़ गयी हैं। वहीं प्रदेश की जनता भी युवा मुख्यमंत्री से जनहित में कोई चमत्कार की अपेक्षा कर रही हैं। गौरतलब हैं कि बारवें मनोनीत मुख्यमंत्री के रूप में पुष्कर धामी ने शपथ लेकर अपने को विधानसभा उप चुनाव में विजयी हासिल करने के लिए विपक्ष के विधायक से सीट खाली कराकर चुनाव लड़ने की परम्परा से हटकर दिग्गज नेता रहे पूर्व मुख्यमंत्री एन डी तिवारी और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत द्वारा अपने विधायक से सीट खाली कराने की बडी राजनैतिक सीख अस्थिर राजनीति से परहेज किया। ये मुख्यमंत्री की दूरदृष्टि सोच को परिदृश्य करता हैं लेकिन अब तक की राज्य की राजनैतिक उठा-पटक से सीख लेकर मुख्यमंत्री धामी को दूध का जला छांछ को भी फूककर पीता हैं वाली कहावत पर अनियोजित विकास का दंश झेल रहे राज्य को आगे बढाने के लिए बड़ा कदम उठाना हैं। अपने विगत के छः माह के कार्यकाल में मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने निःसंदेह जनता के बीच रहकर लोक लुभावने निर्णय लेकर जनता के बीच पैठ बनायी थी, जिसका परिणाम रहा कि उनकी पार्टी ने सत्ता में वापसी की लेकिन राज्य गठन के बाद से ही अधिकांश मौके पर राज्य विधानसभा चुनाव के बाद उप चुनाव, निकाय चुनाव, लोकसभा चुनाव और त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को देखते आ रहा हैं। उससे अनेक मौके पर मुख्यमंत्री विवेकपूर्ण और दूरदर्शी निर्णय लेने में मजबूर हो जाते हैं लेकिन वर्तमान में मुख्यमंत्री पुष्कर धामी को चुनाव जीतने के बाद लगभग डेढ़ वर्ष का समय बिना किसी चुनाव के राज्य के विकास के लिए कार्य करने के लिए उपयुक्त समय मिला हैं। मुख्यमंत्री को अपने कद के हिसाब से अब राज्य की जनता की मूलभूत समस्याओं का समाधान करने के लिए खुलकर आगे आना चाहिए। वर्तमान परिपेक्ष्य में शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विषयों के साथ राज्य के युवा बेरोजगारों को नौकरी देना सबसे बड़ा चुनौती का काम हैं। जिसके लिए मुख्यमंत्री को नौकरशाही पर कडा अंकुश सहित मंत्रियों के कार्यों के भी प्रगति को भी परखना होगा। आज भी नौकरी के प्रदेश का निर्णायक मतदाता युवा बेरोजगार दिगभ्रमित हैं। हालात इस कदर हैं कि योग्य प्रशिक्षित युवा मुफिलिसी के दौर में तीन हजार से लेकर छः हजार की कमरतोड़ मेहनत से अपनी रोजी रोटी को कमाने के लिए मोहताज हैं जो, कि राज्य द्वारा गठित न्यूनतम श्रमिक मजदूरी से भी काफी कम हैं। ऐसे हजारों युवाओं का असंगठित क्षेत्रों में शोषण हो रहा हैं। इस पर युवा मुख्यमंत्री को पैनी नजर रखकर शोषण करने वाले आऊट सोर्स कम्पनियाँ सहित अन्य के खिलाफ टास्क फोर्स गठित कर ईमानदार छवि के अधिकारियों के द्वारा पर्दाफाश करना चाहिए! राज्यगठन के बाद से 22 सालों में सबसे बड़ा दुर्भाग्य यह रहा हैं कि उत्तराखण्ड के जनप्रतिनिधियों सहित नौकरशाहों ने पर्वतीय मूल की अवधारणा के साथ राज्य के भीतर सरकार एंव शासन सहित जिले स्तर पर जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन की कार्य संस्कृति में परिवर्तन नहीं होना सबसे बड़ा प्रश्न हैं। जिससे राज्य के भीतर नियोजित विकास से ज्यादा अनियोजित विकास को बढावा मिला हैं। जिससे अपनी कार्यशैली से दूर करना मुख्यमंत्री पुष्कर धामी के लिए सबसे बड़ी चुनौती हैं। राज्य के युवा मुख्यमंत्री पुष्कर धामी के पास वर्तमान में राज्य के भीतर ऐतिहासिक निर्णय लेने एंव जनता के प्रति अडिग विश्वास जगाने के लिए सारी अनुकूल स्थितियाँ मौजूद हैं, केन्द्र की मोदी सरकार का अपार आर्शीवाद सहित उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी का सहयोग प्राप्त हैं। बस मुख्यमंत्री को अपनी प्रबल इच्छाशक्ति के बल पर जनता के प्रति जवाबदेही और पारदर्शी शासन- प्रशासन सहित भ्रष्टाचार के दीमक की जडो को समाप्त करने का बड़ा मौका हैं।
