संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के चम्पावत में उपचुनाव को देखते हुए एक माह का समय विकास की राह में बाधक बना रहा और जिस तरह से कांग्रेस प्रत्याशी की जमानत तक जब्त हो गई उसको लेकर राज्य के अन्दर यह बहस भी शुरू हो गई है कि अगर कांग्रेस ने चुनाव की सिर्फ रस्म अदायगी करनी थी तो फिर उत्तराखण्ड के विकास में वह क्यों एक माह तक ग्रहण लगाये रहे? उत्तराखण्ड को आदर्श राज्य बनाने की दिशा में पुष्कर सिंह धामी ने सत्ता संभालने के बाद अपने कदम आगे बढाये थे लेकिन चुनाव की टेंशन और आचार संहिता के कारण राज्य का विकास एक महीने तक पटरी पर नहीं चढ़ सका। अब उपचुनाव की टेंशन खत्म होते ही राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी उत्तराखण्ड के विकास का बडा खाका खींचकर उसमें पंख लगायेंगे और राज्य तेजी के साथ विकास की राह पर आगे बढता चला जायेगा। उधर चम्पावतवासियों को भी मुख्यमंत्री की एतिहासिक जीत के बाद विश्वास हो चला है कि अब उनका चम्पावत नया चम्पावत बनेगा और देश के मानचित्र पर चम्पावत का नाम सुनहरे अक्षरों में लिखा हुआ दिखाई देगा।
उत्तराखण्ड में विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद भाजपा फिर सत्ता में आई लेकिन राज्य के मुख्यमंत्री खटीमा में अपना चुनाव एक बडी साजिश के चलते हार गये थे लेकिन भाजपा हाईकमान ने उन्हें एक बार फिर राज्य के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर आसीन किया और उसी के चलते उन्हें छह माह के भीतर विधानसभा चुनाव लडने की बाध्यता थी। शपथ ग्रहण के चंद माह बाद ही चम्पावत में उपचुनाव की घोषणा हुई और समूचे राज्य में एक माह के लिए विकास कार्यों पर आचार संहिता को लेकर ब्रेक लग गया था। चम्पावत उपचुनाव में पुष्कर सिंह धामी अपनी एतिहासिक जीत को लेकर शुरूआती दौर से ही एक बडी रणनीति के तहत चुनावी रणभूमि में उतरे हुये थे और उनके मन में अर्जुन का वास हो गया था जिसे मछली की आंख की तरह निशाना लगाने के लिए सिर्फ चम्पावत की रणभूमि ही दिखाई दे रही थी। पुष्कर सिंह धामी को इस बात का इल्म था कि चम्पावत में उनकी जीत तय है लेकिन देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सामने अपने आपको राज्य का महानायक साबित करने के लिए पुष्कर सिंह धामी को चम्पावत में अपनी एतिहासिक जीत दर्ज कराने की शुरूआती दौर से ही बडी टेंशन थी और यही कारण था कि जहां एक ओर चुनावी रण में पुष्कर सिंह धामी ने खुद मोर्चा संभाल रखा था तो वहीं उनके साथ कदमताल करती हुई उनकी पत्नी गीता धामी भी नारी शक्ति के बीच जाकर अपने पति की एतिहासिक जीत दर्ज कराने के मिशन में आगे बढी हुई थी। चम्पावत में जहां कांग्रेस नजर ही नहीं आ रही थी वहां पुष्कर सिंह धामी के यादगार जीत के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी पुष्कर सिंह धामी के लिए चम्पावत में रोड-शो और जनसभा कर यह ऐलान किया था कि पुष्कर सिंह धामी की जीत तो निश्चित है लेकिन उनकी जीत एतिहासिक बनाने के लिए वह चम्पावत आये हैं। एक माह तक राज्य का विकास उपचुनाव को लेकर थमा रहा और जैसे ही चम्पावत ने पुष्कर सिंह धामी को उत्तराखण्ड के इतिहास में सबसे बडी जीत का तोहफा दिया उससे अब पुष्कर सिंह धामी की चुनाव को लेकर टेंशन खत्म हो गई है और अब वह उत्तराखण्ड के विकास को पंख लगाने के लिए तेजी के साथ अपने कदम आगे बढायेंगे।
