गीता ने पुष्कर की जीत की लिखी बडी पटकथा

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देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड के इतिहास में पुष्कर सिंह धामी पहले ऐसे मुख्यमंत्री बन गये हैं जिनकी जीत का इतिहास रचने के लिए उनकी पत्नी गीता धामी अपने पति के साथ चम्पावत की चुनावी रणभूमि में उनके साथ कदम से कदम मिलाते हुए आगे बढी और अपने पति की जीत को उत्तराखण्ड के इतिहास में सबसे बडी जीत के रूप में दर्ज करा दिया। नारी शक्ति के बीच जिस तरह से गीता धामी ने अपने आपको सौम्य रूप में प्रस्तुत किया उससे उनकी सादगी देखते हुए चम्पावत की महिलाओं के मन में गीता धामी को लेकर एक बडी आस्था देखने को मिली थी और उनका मानना था कि जो गीता धामी मुख्यमंत्री की पत्नी होने के बावजूद भी हर कदम पर सबके सामने हाथ जोडकर खडी हुई है उस गीता के पति की तो जीत को इतना एतिहासिक बनाना है जिन्हें एक साजिश के तहत खटीमा में चुनाव के अन्दर हरवा दिया गया था। इस एतिहासिक जीत में पुष्कर ंिसह धामी की पत्नी का भी उतना ही रूतबा बना जितना पुष्कर सिंह धामी का अब तक की राजनीति मे ंबना हुआ था।
उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दस माह के भीतर जिस तरह से देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दिल में अपनी बडी जगह बनाई और वह उनके सखा बन गये उससे उत्तराखण्ड के अन्दर साफ संदेश चला गया था कि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पुष्कर सिंह धामी की स्वच्छता के साथ चलाई गई सत्ता का ही परिणाम रहा कि खटीमा में पुष्कर सिंह धामी की चुनाव में हार के बाद भी नरेन्द्र मोदी और भाजपा हाईकमान ने उन्हें ही दुबारा राज्य का मुख्यमंत्री बनाया। चम्पावत में पुष्कर सिंह धामी के होने वाले चुनाव की जब घोषणा हुई तो पुष्कर धामी की पत्नी गीता धामी ने अपने पति की जीत को एतिहासिक बनाने के लिए खुद चम्पावत की रणभूमि में अपने कदम रखे और उन्होंने अपने पति के कदम से कदम मिलाकर जिस तरह से चम्पावत की जनता का दिल जीतने का मिशन शुरू किया उससे शुरूआती दौर में ही पुष्कर सिंह धामी की एतिहासिक जीत की सम्भावना प्रबल हो गई थी। चुनावी रणभमि में जिस तरह से पुष्कर ंिसह धामी समूचे चम्पावत के बीच जाकर आवाम का दिल जीत रहे थे वहीं उनकी जीवन संगनी गीता धामी भी अपने पति के साथ चुनावी रणभूमि में कदम से कदम मिलाकर नारी शक्ति का दिल जीत रही थी और समूचे चम्पावत का दिल जीतने वाले पति-पत्नी की सौम्यता देखकर समूचे चम्पावत ने उत्तराखण्ड के हृदय सम्राट को एतिहासिक जीत का ताज पहना दिया।

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