सीएम के खिलाफ किसने रची थी ‘साजिश

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देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को जबसे राज्य का मुख्यमंत्री बनाया गया तबसे षडयंत्रकारी उनकी गद्दी पर अपनी गिद्द जैसी नजर लगाये हुये हैं और उनमें इस बात को लेकर एक बडा डर बना हुआ है पुष्कर सिंह धामी पर जिस तरह से देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह का अभेद आशीर्वाद है तब तक उनकी कुर्सी पर कोई खतरा नहीं है? विधानसभा चुनाव में भाजपा को प्रचंड बहुमत दिलाने वाले राज्य के मुख्य सेवक पुष्कर सिंह धामी के खिलाफ खटीमा में कुछ अपनों ने ही इतनी बडी साजिश रची कि उन्हें चुनावी रणभूमि में हरवाकर यह सपना देखा गया कि अब पुष्कर सिंह धामी मुख्यमंत्री की कुर्सी पर आसीन नहीं हो पायेंगे लेकिन ऐसा सपना देखने वालो को मुंह की खानी पडी और भाजपा हाईकमान ने पुष्कर सिंह धामी को दुबारा मुख्यमंत्री की कुर्सी पर आसीन कर उन पर अपना बडा विश्वास दिखाया था। पुष्कर सिंह धामी को दुबारा सत्ता मिलने पर राज्य के कुछ षडयंत्रकारियों में बेचैनी थी और उनकी यह बेचैनी मुख्यमंत्री के उपचुनाव से चंद दिन पूर्व एक बडी साजिश रचती हुई दिखाई दी और जिस निचता के साथ राज्य के मुख्य सेवक के खिलाफ षडयंत्रकारियों ने एक बडी घिनौनी साजिश रचकर उन्हें निशाने पर लेने का जो खेल खेला था उस साजिश ने षडयंत्रकारियों को ही कटघरे में लाकर खडा कर दिया और राज्य की जनता को इस बात का इल्म है कि जो मुख्यमंत्री गरीब से गरीब इंसान को अपने सीने से लगा रहा है उस मुख्य सेवक को राज्य के कुछ षडयंत्रकारी पचा नहीं पा रहे हैं और यही कारण है कि उपचुनाव से ठीक पूर्व उन्होंने एक साजिश रची थी लेकिन वह ओंहदे मुंह जा गिरी। अब देखने वाली बात होगी कि बार-बार ऐसी साजिशें रचने वालों के चेहरे कब बेनकाब होंगे और उन्हें जेल की सलाखों के पीछे उनके गुनाह की सजा मिलेगी?
भाजपा में आधा दर्जन से अधिक राजनेता ऐसे हैं जिनकी चाहत हमेशा मुख्यमंत्री बनने की रही है और वह मुख्यमंत्री बनने के लिए हमेशा उत्तराखण्ड से लेकर दिल्ली तक में अपने पक्ष में एक बडा माहौल बनाते रहे हैं लेकिन भाजपा के हाईकमान को इस बात का इल्म है कि राज्य के कौन-कौन भाजपा नेता हमेशा मुख्यमंत्री बनने की दौड में दौडते ही रहते हैं। भाजपा हाईकमान ने 2०17 से 2०22 तक उत्तराखण्ड में रही अपनी सरकार में दो पूर्व मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल को देखकर जब अपनी नाराजगी दिखाई तो उसके बाद खटीमा से दो बार के युवा विधायक पुष्कर सिंह धामी को उत्तराखण्ड का छह माह के लिए मुख्यमंत्री बनाया गया था और इस अल्प कार्यकाल में उन्हें राज्य के अन्दर भाजपा की सत्ता में वापसी का वचन भी लिया था। छह माह के लिए अपनी भविष्य की राजनीति को दांव पर लगाकर पुष्कर सिंह धामी ने एक चुनौती के रूप में सत्ता चलाने के लिए एक बडा बीडा उठाया और उन्होंने अपने आपको जिस तरह से राज्य का सेवक मानकर आवाम के बीच अपने आपको लाकर खडा किया और गरीब से गरीब इंसान को उन्होंने अपने सीने से लगाकर उसे अपने परिवार का सदस्य माना उसी को देखकर राज्य के लोगों के मन में यह बात समा गई कि पुष्कर सिंह धामी एक ऐसे मुख्यमंत्री हैं जिन्हें सत्ता का तिनकाभर भी अहंकार नहीं है और उनके अन्दर इसंानियत कूट-कूट कर भरी हुई है इसलिए जब विधानसभा चुनाव हुये तो राज्य की जनता ने पुष्कर सिंह धामी को उत्तराखण्ड का भाग्यविधाता मानकर भाजपा पर अपनी आस्था दिखाई और पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में एक बार फिर राज्य के अन्दर भाजपा को प्रचंड बहुमत की सरकार बनाने का मौका मिला लेकिन हमेशा विरोधियों के निशाने पर रहने वाले पुष्कर सिंह धामी को कुछ अपनों ने ही भीतरघात कर उन्हें खटीमा के विधानसभा चुनाव में यह सोचकर हरवा दिया था कि चुनाव हारने के बाद पुष्कर सिंह धामी को मुख्यमंत्री नहीं बनाया जायेगा और इसी के चलते मीडिया के एक संगठित ग्रुप ने मुख्यमंत्री की ताजपोशी होने से पहले कुछ ऐसे नामों को उछालना शुरू किया था कि इनमें से किसी को मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है लेकिन इस ग्रुप का अरमान उस समय धडाम हो गया था जब भाजपा हाईकमान ने पुष्कर सिंह धामी की दुबारा मुख्यमंत्री रूप में ताजपोशी की थी। छह माह के भीतर पुष्कर सिंह धामी को उपचुनाव लडना था और उन्होंने ताजपोशी के चंद समय बाद ही चम्पावत से चुनाव लडने की ताल ठोकी तो फिर कुछ षडयंत्रकारियों ने सपना देखा कि किसी तरह से पुष्कर सिंह धामी को चुनाव हरवा दिया जाये लेकिन इस बार अभिमन्यु से अर्जुन की भूमिका में आये पुष्कर सिंह धामी और उनकी पत्नी गीता धामी ने जब चम्पावत के चुनाव की कमान अपने हाथों में ली तो समूचा चम्पावत पुष्करमय हो गया जिससे कुछ षडयंत्रकारियों ने चुनाव से ठीक चंद दिन पूर्व एक घिनौनी साजिश रची और इस साजिश के तहत पुष्कर सिंह धामी को निशाने पर लेने का तानाबाना बुना लेकिन षडयंत्रकारियों ने जो साजिश रची थी उस पर किसी ने तिनकाभर भी विश्वास नहीं किया और कहा कि उत्तराखण्ड के हृदय सम्राट बन चुके पुष्कर सिंह धामी की धाकड राजनीतिक पारी देखकर षडयंत्रकारियों ने घिनौनी साजिश का चक्रव्यूह रचा था जिसमें शायद अब वह खुद भी फंस जायेंगे?

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