चम्पावत बोलाः मेरा पुष्कर आया है…

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड की जनता ने राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को हृदय सम्राट राजनेता का खिताब दे दिया है और जनता के सपनों को सच करने के लिए पुष्कर सिंह धामी ने जिस तरह से अपने कदम आगे बढा रखे हैं उससे सभी विपक्षी पार्टिंया पुष्कर सिंह धामी के बढते कदम से डरी और सहमी हुई है और राज्य के अन्दर जिस तरह से कांग्रेस का कुनबा टूटकर धीरे-धीरे भाजपामय हो रहा है और आम आदमी पार्टी के बडे-बडे नेता पार्टी को बाय-बाय कह चुके हैं उससे साफ संकेत मिल रहा है कि विपक्षी पार्टियों के चंद दिग्गज नेताओं का इस बात का इल्म हो चुका है कि पुष्कर सिंह धामी उत्तराखण्ड के अन्दर एक ब्रांड बन चुके हैं जिन्होंने राज्य की जनता का दिल इस कदर जीत लिया है कि हर किसी में मुख्यमंत्री से मिलने की एक बडी तडफ हमेशा देखने को मिलती है और मुख्यमंत्री जहां पर भी जाते हैं वह जनता के बीच जाकर उन्हें सिर्फ एक ही संदेश देते हैं कि वह राज्य के मुख्यमंत्री नहीं बल्कि एक मुख्य सेवक के रूप में जनता की सेवा के लिए ही बने हैं। चम्पावत में उपचुनाव का काउन डाउन शुरू हो गया है और आज जब राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जनता के बीच संवाद करने के लिए रोड-शो करते हुए निकले तो चम्पावत के लोग एक ही स्वर में यही कहते हुए दिखाई दिये कि देख-देख मेरा पुष्कर आया है….।
उत्तराखण्ड का जन्म आखिर किस विजन को लेकर हुआ था इसको लेकर पिछले इक्कीस सालों से राज्य के अन्दर एक बडी बहस चली आ रही है और राज्यवासियों के साथ उत्तराखण्ड के लिए आंदोलन करने वाले आंदोलनकारियों के मन में इक्कीस साल से एक बडी पीडा देखने को मिलती आ रही है कि जिस सोच से उत्तराखण्ड का निर्माण किया गया था वह सोच आज तक धरातल पर सच साबित नहीं हो पाई और राज्य के अन्दर बडे-बडे भ्रष्टाचार और घोटालों ने राज्यवासियों के मन में एक आक्रोश पैदा किया कि आखिरकार जिस राज्य को उन्होंने अपने खून से सींचा था उस राज्य को आखिरकार ऐसी नजर कैसे लग गई कि राज्य आज भी उसी राह पर खडा हुआ है जहां इक्कीस साल पहले खडा हुआ था? हालांकि दस माह पूर्व जब राज्य की कमान युवा नेता पुष्कर सिंह धामी के हाथों में आई तो उन्होंने अपनी भविष्य की राजनीति को दांव पर लगाकर मात्र छह माह के लिए मुख्यमंत्री बनने के लिए हामी भर दी थी उस समय राज्य के अन्दर यह बहस शुरू हुई थी कि अगर पुष्कर सिंह धामी विधानसभा चुनाव में पार्टी को जीत न दिला पाये तो उनके राजनीतिक जीवन पर हमेशा के लिए एक बडा ग्रहण लग जायेगा। हालांकि पुष्कर सिंह धामी ने देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से गुरूमंत्र लेकर जिस तरह से मात्र छह माह के भीतर अपनी ईमानदार किचन टीम के साथ सत्ता चलाने का रोल प्ले किया तो उसे देखकर राज्य की जनता भी आश्चर्यचकित हो गई थी कि ऐसा राजनेता आज से पहले कहां लुप्त था जो उत्तराखण्ड को आदर्श राज्य बनाने का लम्बे अर्से से सपना देख रहा था। पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य सेवक के रूप में जिस तरह से सत्ता चलाते हुए छोटे से छोटे इंसान के दिलों को जीतने का मिशन शुरू किया उससे राज्य के चारो ओर पुष्कर सिंह धामी का एक बडा डंका बजने लगा। उत्तराखण्ड के लोग पुष्कर सिंह धामी को महानायक और हृदय सम्राट राजनेता का खिताब देने से पीछे नहीं हट रहे हैं और उनका कहना है कि जिसने दस माह के भीतर राज्य के अन्दर पारदर्शिता और सौम्यता के साथ सत्ता चलाई वह अपने शासनकाल में किसी भी भ्रष्टाचारी को पनपने नहीं देंगे यह अब हर राज्यवासी को विश्वास हो चला है। खटीमा में भीतरघात के चलते पुष्कर सिंह धामी को विधानसभा चुनाव में हरवाने की बडी साजिश का खेल हुआ और इस खेल में साजिशकर्ता सफल भी हुये लेकिन उनके अरमान उस समय धडाम हो गये जब भाजपा हाईकमान ने पुष्कर सिंह धामी को दुबारा राज्य का मुख्यमंत्री बनाकर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सपनों का उत्तराखण्ड बनाने का जिम्मा सौंप दिया। 31 मई को चम्पावत में उपचुनाव होना है और इस उपचुनाव में पुष्कर सिंह धामी का खुद से ही सामना होने जा रहा है क्योंकि कांग्रेस प्रत्याशी का कहीं भी कोई अता पता नहीं दिखाई दे रहा और तो और कांग्रेस के बडबोले राजनेता भी चम्पावत की चुनावी रणभूमि में पुष्कर सिंह धामी के सामने आने का साहस नहीं दिखा पा रहे हैं जिसके चलते चम्पावत में होने वाला उपचुनाव एकतरफा नजर आ रहा है। आज राज्य के महानायक और आवाम के दिलों में राज करने वाले हृदय सम्राट बन चुके पुष्कर सिंह धामी जब चम्पावत में चुनावी रोड-शो के लिए आये तो चम्पावत की जनता के मन में एक बडी खुशी दिखाई दी और तो और समूचा चम्पावत एक ही स्वर में बोलता दिखाई दिया कि देखो मेरा पुष्कर आया है…।

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